दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम में आरक्षण प्रक्रिया के कारण कई पार्षद ऐसे है जो अन्य वार्ड की तलाश कर रहे है ऐसा ही एक वार्ड है गंजपारा वार्ड जहाँ से निर्वृत्मान पार्षद और एमआईसी प्रभारी रहे ऋषभ जैन का वार्ड न. 35 आरक्षण के बाद महिला ओबीसी में आ गया जिसके कारण अब पूर्व गृह मंत्री के करीबी ऋषभ जैन किसी सुरक्षित वार्ड की तलाश में है किन्तु गत विधान सभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्यशी अरुण वोरा का विरोध इस बार ऋषभ जैन के लिए भी मुश्किलें पैदा कर सकता है . राजनितिक जानकारों का मानना है कि ऋषभ जैन को पिछली बार टिकिट दिलवाने में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू की अहम् भूमिका रही थी किन्तु हाल ही में हुए विधान सभा चुनाव में जिस तरह दुर्ग विधान सभा में भीतरी घात से कांग्रेस प्रत्यशी की बड़ी हार हुई थी वैसी ही हार दुर्ग ग्रामीण से पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस उम्मीदवार ताम्रध्वज साहू की भी हुई थी . इसी भीतरीघात का परिणाम रहा कि कांग्रेस ना केवल कई विधान सभा सीट में पराजित हुई अपितु प्रदेश में सरकार में भी बदलाव हुआ . भीतरीघात का जो जख्म कांग्रेस ने झेला और लोकप्रिय सरकार का पतन हुआ ऐसे में अब ऐसे कांग्रेसियों से संगठन भी दुरी बनाना चाहता है .
दुर्ग में कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा के चुनावी समर में कांग्रेस विरोधी कहे या प्रत्यशी विरोधी ऋषभ जैन के नाम की भी चर्चा जोरो पर रही वही एमआईसी प्रभारी रहने के दरमियान सचिवालय से ज्यादा घर में ही अधिकारियों को बुलाने और सक्रियता में कमी के चलते काफी आलोचना का शिकार होना पडा . एक बार फिर चुनावी समर आरम्भ हो चुका है ऐसे में शहर में यह चर्चा का विषय है कि क्या परदेश के वरिष्ठ कद्दावर नेता संगठन के हित में फैसला लेंगे या करीबी होने का लाभ दिलाते हुए ऋषभ जैन को किसी अन्य सामान्य सीट वाले वार्ड से कांग्रेस का प्रत्याशी बनाने में अहम् भूमिका निभाएंगे ?