दुर्ग / शौर्यपथ / नगरी निकाय चुनाव का आगज हो चुका है राजनीतिक पार्टियों अपने दावेदारों के आवेदन लेने बैठक कर रही है एवं आगे की रणनीति बना रही है वहीं दुर्ग कांग्रेस में एक बार फिर सभापति कक्षा में उभरे कांग्रेस प्रत्याशी के विरुद्ध विरोधी नीतियों का नजारा हाल ही में राजीव भवन दुर्ग में पहुंचे प्रभारी विकास उपाध्याय के सामने नजर आया है .
मामला यह है कि आरक्षण के चलते कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन जैन का वार्ड आरक्षण की चपेट में आ गया है जिसके कारण मदन जैन वार्ड नंबर 39 से चुनाव लड़ने के लिए अपनी तैयारियां शुरू कर चुके हैं वहीं इस बार से लगातार तीन बार पार्षद रहे शकुंन ढीमर ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर चुकी है सभी को मालूम है कि मदन जैन कांग्रेस नेता के साथ-साथ एक बड़े व्यवसाय हैं पैसों की कोई कमी नहीं है और गए बगाहे चुनावी खर्च में दिए पैसों का जिक्र मदन जैन करते रहते हैं .कल ऐसे ही मामला देखने को मिला जिसमें मदन जैन की तैयारी के चलते शकुंन ढीमर ने अपने कड़े तेवर दिखा दिए तीन बार की पार्षद शकुंन ढीमर ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि वार्ड नंबर 39 में वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगी .वार्ड में लगातार सक्रिय होने के कारण और कांग्रेसी कार्यकर्ता के रूप में वार्ड नंबर 39 से चुनाव लड़ने का हक उनका बनता है क्योंकि मदन जैन ने विधानसभा चुनाव में खुलकर कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा का विरोध किया था और अरुण वोरा को हराने में मदन जैन का भी बड़ा हाथ है ऐसे में अब कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल यह है कि वार्ड नंबर 39 से ऐसे कार्यकर्ता को टिकट दे जो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का विरोध कर कांग्रेस को हराने में भूमिका निभाई हो या फिर ऐसे प्रत्याशी को टिकट दे जिन्होंने हार के बावजूद भी कांग्रेस का दामन थामा रखा .
वही एक बार फिर शकुंन ढीमर के बुलंद स्वर के कारण राजनीतिक हलको में फिर से निर्वृत्मान सभापति राजेश यादव के कक्ष में उठे विद्रोह की चर्चा होने लगी . बता दें कि कांग्रेस प्रत्याशी अरुण गोर के विरोध के स्वर और रणनीति बनाने में मदन जैन की प्रमुख भूमिका रही जो कि पूर्व सभापति के कक्ष में बैठे कांग्रेसी नेता कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा के विरोध के स्वर को हवा देते रहे वही इस हवा को विराम लगाने में निर्वृत्मान सभापति राजेश यादव कहीं से भी सफल होते नजर नहीं आए परिणाम यह रहा की दुर्ग कांग्रेस की आपसी गुटबाजी चरम सीमा पर पहुंची और कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा की 48000 से भी अधिक वोटो से हार हुई .
अब निगम चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा के विरोधी कांग्रेस से टिकट की मांग कर रहे हैं ऐसे में कांग्रेस संगठन के सामने बड़ा सवाल यह है कि जिन्होंने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का विरोध किया हो वह क्या अपने राजनीतिक पहुंच के चलते वार्ड पार्षद का टिकट ले आएंगे या फिर कांग्रेस संगठन ऐसे विरोधियों का साथ न देकर कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में उतार कर यह संदेश देगी की विरोधियों के लिए कांग्रेस में कोई जगह नहीं..