दुर्ग । शौर्यपथ। राजनीति में कौन अपना कौन पराया इसका आकलन लगाना काफी मुश्किल होता है कुछ ऐसा ही हाल दुर्ग नगर निगम के निवृतमान महापौर और सभापति का है. जहां एक और धीरज बाकलीवाल का वार्ड नंबर 32 आरक्षण के कारण पिछड़ा वर्ग महिला हो गया वहीं सभापति राजेश यादव का वार्ड सामान्य तो है परंतु राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार पिछले निकाय चुनाव में इस वार्ड से कांग्रेस के प्रबल दावेदार मनीष यादव और राजेश यादव के बीच हुआ अनुबंध एक बार फिर चर्चा में आ गया हालांकि यह अनुबंध है किसी लिखित पत्र में नहीं हुआ परंतु ऐसी चर्चा है कि पूर्व में मनीष यादव ने यह सीट राजेश यादव के लिए छोड़ी थी और अगली बार इस बार से चुनाव लड़ने की बात पर सहमति बनी थी परंतु एक बार फिर महापौर के आरक्षण में पिछड़ा वर्ग महिला होने से अब सभापति के दावेदारी के लिए महापौर धीरज बाकलीवाल और राजेश यादव फिर चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं जबकि अगर वार्ड नंबर 45 की बात करें तो धीरज बाकलीवाल का वार्ड नंबर 45 में निवास है परंतु इस वार्ड से कांग्रेस से राजेश शर्मा या फिर कमला शर्मा ही चुनावी मैदान में उतरती आ रही है ऐसे में इस वार्ड से एक बार फिर राजेश शर्मा अपनी दावेदारी आगे कर रहे हैं वहीं वार्ड नंबर 6 से मनीष यादव भी चुनावी मैदान में उतरने की बात कर रहे हैं ऐसे में महापौर पद में 5 साल का कार्यकाल पूर्ण करने के बाद अगर वार्ड नंबर 45 से धीरज बकरीवाल चुनाव मैदान में उतरते हैं तो राजेश शर्मा उनके लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ सकते हैं ऐसी स्थिति वार्ड नंबर 6 से भी नजर आ रही है जहां से अगर राजेश यादव जिनका सीएम हाउस से करीबी संबंध है वहीं कांग्रेसी नेता प्रदीप चौबे के कट्टर समर्थक माने जाते हैं के यहां वार्ड नंबर 6 से टिकट लाने पर मनीष यादव निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर सकते हैं जिसका खामियाजा सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस को उठाना पड़ेगा ऐसे में देखना होगा कि चुनाव समिति कैसे स्थिति को नियंत्रण में करती है और अपने कार्यकर्ताओं के बीच चल रहे राजनीतिक मतभेद को दूर करती है।
बता दें कि वार्ड नंबर 6 में मनीष यादव पिछले काफी सालों से सक्रिय रहे हैं और उनके विरोध से कांग्रेस को ही नुकसान होगा वहीं वार्ड नंबर 45 की बात करें तो वार्ड नंबर 45 से भी यही स्थिति नजर आ रही है जहां राजेश शर्मा सकरी रहे हैं परंतु धीरज बकरीवाल के चुनाव मैदान में उतरने से राजेश शर्मा उनके जीत के रास्ते में एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ सकते हैं और कांग्रेस की यह दो सीट आसानी से भाजपा के खाते में चली जाएगी