रायपुर / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री के विदेश प्रवास और नए निवेश आकर्षित करने के दावों पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल किया है कि – “छत्तीसगढ़ में जून 2025 तक 18,940 पंजीकृत कंपनियां संचालित थीं, इनमें से 4,288 कंपनियां आखिर क्यों बंद हो गईं?”
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जापान और दक्षिण कोरिया जाकर विदेशी निवेश का ढिंढोरा पीट रहे हैं, जबकि प्रदेश की हकीकत यह है कि पहले से संचालित स्पंज आयरन प्लांट, रोलिंग मिलें, राइस मिल, सहकारी शक्कर कारखाने और एथेनॉल प्लांट भाजपा सरकार की उपेक्षा और उद्योग-विरोधी नीतियों की वजह से ठप हो गए हैं।
वर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कृषि और वनोपज प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। सीमेंट और स्टील उत्पादन में छत्तीसगढ़ ने नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। लेकिन भाजपा की सरकार आते ही उद्योगों पर लगातार चोट की गई—20 महीनों में चार बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई।
आज की स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ के उद्योगों को पड़ोसी राज्यों उड़ीसा, झारखंड और मध्यप्रदेश की तुलना में डेढ़ गुना महंगी औद्योगिक बिजली चुकानी पड़ रही है। कांग्रेस काल में बनी उद्योग नीति को बदलकर भाजपा सरकार ने स्थानीय उद्योगों को बर्बाद करने की राह पर धकेल दिया।
वर्मा ने आगे कहा—
“भाजपा सरकार एक तरफ छत्तीसगढ़ के लघु और कुटीर उद्योगों तथा रीपा (रूरल इंडस्ट्रियल पार्क) जैसी योजनाओं को समाप्त करने पर तुली है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विदेशी धरती पर उद्यमियों को आमंत्रित कर छत्तीसगढ़ की जनता को गुमराह कर रहे हैं।”
कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि बीते 20 महीनों में हजारों उद्योग बंद होने से लाखों युवा बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन में नाकाम भाजपा सरकार अपनी नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए केवल “राजनीतिक पर्यटन” कर रही है।
? यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में भाजपा सरकार की औद्योगिक नीतियों बनाम कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों के मुकाबले के रूप में उभर चुका है।