रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम पर गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं कि वॉटरमार्क वाले छत्तीसगढ़ी कागज़ से मध्यप्रदेश के लिए लगभग 2 लाख पुस्तकें कैसे छप गईं। उन्होंने इसे बड़ा “कागज़ घोटाला” बताते हुए राज्य सरकार और निगम की जवाबदेही पर प्रश्न चिह्न खड़ा किया।
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि इस छपाई हेतु यहाँ करीब 136 टन कागज़ का उपयोग किया गया, जबकि प्रदेश के स्कूलों को 18 लाख नई पुस्तकों की आवश्यकता है — जिनकी छपाई नहीं होने के कारण बच्चों को नवीन पुस्तकें नहीं मिल पाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तकें न छपने के कारण शिक्षा विभाग ने 6 लाख पुराने पुस्तकों का वितरण किया है, जिससे बच्चों को उचित अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
आरोप-प्रत्यारोप की भाषा में धनंजय ने कहा, “भाजपा की सरकार में चोरी आम बात बन चुकी है। अब बच्चों की पुस्तकों के लिए जिस कागज़ पर छत्तीसगढ़ का वॉटरमार्क लगा है, वह कागज़ भी चोरी हो गया। भाजपा का मूल काम कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार बन गया है — प्रदेश के बच्चे पुस्तक के लिए तरस रहे हैं और वही कागज़ मध्यप्रदेश की पुस्तकें छापने में चला गया। क्या यही सुशासन है?”
कांग्रेस की माँगें और मांगें की विवेचना
धनंजय सिंह ठाकुर ने तत्काल कदम के रूप में मांग की है कि:
इस बड़े कागज़ चोरी/छपाई घोटाले की उच्चस्तरीय तथा निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पाठ्य पुस्तक निगम के प्रमुख को तत्काल पद से हटाया जाए।
प्रदेश के स्कूलों में 18 लाख नई पुस्तकों की तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और जो भी ज़िम्मेदार हैं उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि यह मामला सिर्फ कागज़ की बर्बादी या गड़बड़ी नहीं, बल्कि बच्चों के शैक्षणिक अधिकार एवं सार्वजनिक निधि के दुरुपयोग का विषय है।
आगे की स्थिति
कांग्रेस के इस आरोप के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मामले की सच्चाई और जिम्मेदारों की पहचान हेतु प्राधिकरण द्वारा त्वरित और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।