रायपुर/शौर्यपथ / किसानों को ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था को फिर से बहाल करने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन प्रक्रिया में जानबूझ कर बाधित किया जा रहा है, इस खरीफ सीजन के धान खरीदी को पूरा होने में अब एक पखवाड़ा से भी कम समय शेष बचा है, यही वो समय है जब बड़े किसानों का धान मंडी में आता है, ऐसे समय में ऑनलाइन टोकन बंद करना किसानों के साथ अन्याय है। यह सरकार धान की खरीदी को दुर्भावना पूर्वक नियंत्रित करने के लिए बहुत ही अव्यावहारिक शर्ते रोज रोज लागू कर रही है, पहले धान खरीदी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जारी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि उपार्जन केंद्र में प्रतिदिन काटे गए टोकन और वास्तविक खरीदी में ज्यादा से ज्यादा अंतर लाना है, मतलब जितना टोकन काटा गया है, उतना धान मत खरीदो। धान खरीदी में किसानों को धान बेचने से रोकने की कई तरह से कोशिश की गई है जिसका नतीजा है कि इस बार धान हर सोसाइटियों में अब तक कम खरीदा गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि यह सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों को चोर और तस्कर बता रही है, उनके घरों और खलिहानों में छापे मारे जा रहे हैं, किसानों के मेहनत से उपजाए धान को जप्त कर रही है हकीकत यह है कि प्रदेश में अभी भी करीब 5 लाख ऐसे किसान हैं, जिन्होंने एक बार भी धान नहीं बेचा है। अब अंतिम के 13 दिनों में धान की आवक तेज होगी, इसी को रोकने दुर्भावना पूर्वक किसान विरोधी षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। एक तरफ प्रतिदिन टोकन की मात्रा में यह सरकार कटौती कर रही है, एन आई सी के माध्यम से सोसाइटियों के प्रतिदिन खरीदी की मात्रा को घटाया जा रहा है, दूसरी तरफ सत्यापन के लिए अलग फार्मूला अपनाया जा रहा है ताकि किसानों को अपना पूरा धान बेचने से रोका जा सके। भौतिक सत्यापन के लिए अलग से ऐप बनाया गया है जिसकी ट्रेनिंग पटवारियों को दी जा चुकी है। बिना सत्यापन के किसी भी किसान का धान नहीं खरीदना है। पिछले साल की खरीदी के हिसाब से भौतिक सत्यापन करने का आदेश देकर दबाव बनाया जा रहा है, जिसका विरोध पटवारियों ने किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रकबा समर्पण के नाम पर धान कम खरीदने का आरोप लगाते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसान जान चुके हैं कि ये डबल इंजन वाली भाजपा सरकार किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना चाहती। रायगढ़ जिला पटवारी संघ का ज्ञापन धान खरीदी को लेकर इस सरकार की मंशा को बेहद स्पष्ट करते हैं। पटवारियों ने बड़े ही स्पष्ट रूप से यह कहा है कि राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों द्वारा सभी किसानों पर रकबा समर्पण हेतु अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, ये आरोप बेहद ही संगीन है और भाजपा सरकार के किसान विरोधी चेहरे को बेनकाब करने वाला है । कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है कि इस प्रकार के किसी भी आदेश को तुरंत ही रोका जाए, ऑनलाइन टोकन व्यवस्था पुनः शुरू करें तथा ऐसे किसान विरोधी मानसिकता वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।