धीरज बाकलीवाल की मर्जी के आगे बौनी साबित हुई प्रदेश संगठन की लिस्ट
दुर्ग। शौर्यपथ।
शौर्यपथ समाचार पत्र द्वारा पूर्व में यह समाचार प्रकाशित किया गया था कि दुर्ग शहर कांग्रेस संगठन रिमोट कंट्रोल से संचालित नजर आ रहा है। उस समाचार के बाद दुर्ग कांग्रेस में हलचल जरूर मची, वर्षों से शांत पड़े गुटों में संवाद की कोशिशें भी दिखीं और मीडिया से दूरी बनाए रखने वाला संगठन अचानक सक्रिय भी हुआ।
लेकिन समय बीतते ही एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि शौर्यपथ की उस रिपोर्ट में उठाया गया संदेह कहीं न कहीं सच तो नहीं था?
प्रदेश कांग्रेस संगठन द्वारा हाल ही में दुर्ग शहर कांग्रेस की अधिकृत सूची जारी की गई, लेकिन जैसे ही दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने स्थानीय स्तर पर पदाधिकारियों की घोषणा की, एक बड़ा संगठनात्मक विरोधाभास सामने आ गया।
? शहर अध्यक्ष द्वारा जिन चार नामों को “कांग्रेस प्रवक्ता” के रूप में घोषित किया गया, वे नाम प्रदेश कांग्रेस संगठन की सूची में कहीं भी दर्ज नहीं हैं।
यहीं से सवाल खड़े होते हैं—
क्या दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष को यह अधिकार है कि वह प्रदेश संगठन की सूची में स्वयं संशोधन करें?
क्या यह निर्णय प्रदेश कांग्रेस की अनुमति से लिया गया है या फिर यह व्यक्तिगत मर्जी का विस्तार है?
और सबसे अहम—क्या इससे संगठन की मर्यादा और अनुशासन को ठेस नहीं पहुंची है?
प्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी सूची में कांग्रेस प्रवक्ता पद का कोई उल्लेख ही नहीं है, जबकि स्थानीय स्तर पर अचानक चार प्रवक्ता घोषित कर दिए गए। इससे न केवल संगठनात्मक भ्रम की स्थिति बनी है, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष और अविश्वास भी गहराता जा रहा है।
सूची जारी होते ही दुर्ग शहर कांग्रेस के भीतर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पार्टी के अंदरूनी हलकों में अब खुलकर यह कहा जा रहा है कि
धीरज बाकलीवाल का कार्यकाल संगठन को आगे ले जाने की बजाय पीछे खींचता नजर आ रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए जिस मुखर, आक्रामक और स्पष्ट नेतृत्व की आवश्यकता होती है, वह दुर्ग शहर कांग्रेस में फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर शहर अध्यक्ष का बैकफुट पर जाना, विपक्षी राजनीति को कमजोर कर रहा है।
प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जहां लगातार एक मुखर विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष के चयन को लेकर अब पार्टी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। चर्चा यहां तक है कि
प्रदेश संगठन को जिन उम्मीदों के साथ धीरज बाकलीवाल को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वे अपेक्षाएं अब संदेह के घेरे में हैं।
राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का साफ कहना है कि
? प्रदेश कांग्रेस संगठन की सूची में बिना अनुमति नाम जोड़ना, संगठनात्मक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
? यह कदम “सृजन संगठन अभियान” और अनुशासन की भावना के विपरीत है।
अब निगाहें प्रदेश कांग्रेस संगठन पर टिकी हैं—
क्या प्रदेश संगठन दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा जारी की गई इस सूची पर अपनी मोहर लगाएगा?
या फिर यह स्पष्ट करेगा कि संगठन में अंतिम अधिकार किसका है—प्रदेश का या शहर अध्यक्ष की व्यक्तिगत मर्जी का?
दुर्ग शहर कांग्रेस के भविष्य, उसकी विश्वसनीयता और विपक्ष की भूमिका पर यह मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
प्रदेश संगठन इस पर क्या कदम उठाता है, यही तय करेगा कि दुर्ग कांग्रेस संगठन मजबूत होगा या फिर चंद लोगों की खींचतान में उलझकर रह जाएगा।