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“सक्रियता या सियासी महत्वाकांक्षा? दुर्ग कांग्रेस में ‘महिला अध्यक्ष’ की कुर्सी पर तेज़ हुई अंदरूनी दौड़”

  • rounak group

दुर्ग।

दुर्ग शहर कांग्रेस इन दिनों संगठनात्मक राजनीति और अंदरूनी समीकरणों के चलते चर्चा के केंद्र में है। खासकर महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर हलचल तेज होती नजर आ रही है, जहां एक ओर पुराने और अनुभवी नाम हैं, वहीं दूसरी ओर नई सक्रियता के सहारे उभरती दावेदारियां भी सामने आ रही हैं।

इसी कड़ी में शहर कांग्रेस की महामंत्री निकिता मिलिंद का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है। हाल के दिनों में उनके द्वारा लगातार प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाना और मीडिया में सक्रिय बने रहना, पार्टी के भीतर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।

क्या सक्रियता का लक्ष्य ‘कुर्सी’?

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि—

क्या यह सक्रियता संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति है?

या फिर शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की नजरों में जगह बनाकर महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी मजबूत करने की कोशिश?

हालांकि, इस पद के लिए अब तक  महापौर प्रत्याशी प्रेमलता साहू का नाम सबसे प्रबल माना जा रहा है। उनके संगठन में पुराने और मजबूत संबंध, खासकर शहर अध्यक्ष के साथ, उन्हें स्वाभाविक दावेदार बनाते हैं।

विपक्ष की भूमिका पर उठते सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि शहर कांग्रेस स्थानीय मुद्दों पर कितनी सक्रिय है?

जहां एक ओर शहरी सरकार पर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप लग रहे हैं, वहीं कांग्रेस के पार्षदों की अपेक्षित आक्रामक भूमिका नजर नहीं आ रही।

दिलचस्प बात यह है कि निगम की सामान्य सभा में सत्ता पक्ष (भाजपा) के पार्षद ही अपनी सरकार को घेरते दिखे, जबकि कांग्रेस अपेक्षाकृत शांत नजर आई।

सोशल मीडिया बनाम ज़मीनी राजनीति

दुर्ग कांग्रेस में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि राजनीति का केंद्र जमीनी आंदोलनों से हटकर सोशल मीडिया और प्रेस विज्ञप्तियों तक सिमटता जा रहा है।

निकिता मिलिंद की बढ़ती मीडिया सक्रियता को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है—जहां जमीनी मुद्दों की बजाय राष्ट्रीय राजनीति पर बयानबाजी ज्यादा दिख रही है।

बदलते समीकरण, नई टीम की तैयारी

दुर्ग कांग्रेस की राजनीति में पिछले कुछ समय में बड़ा बदलाव आया है। एक समय तक प्रभावी रहे वोरा परिवार का वर्चस्व अब लगभग समाप्त हो चुका है, और शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में नई टीम और नए चेहरे उभर रहे हैं।

पूर्व राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे राजेश यादव और धीरज बाकलीवाल का साथ आना भी इन बदलते समीकरणों का संकेत है।

क्या संभव है ‘तेज प्रमोशन’?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महामंत्री पद मिलने के तुरंत बाद महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचना आसान नहीं होता, लेकिन

“राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं”—खासकर तब, जब संगठन में बड़े बदलाव की प्रक्रिया चल रही हो।

अब देखना यह होगा कि—

क्या अनुभव और पुराने संबंध बाजी मारेंगे?

या फिर नई सक्रियता और रणनीति संगठन में नया समीकरण बनाएगी?

फिलहाल, दुर्ग कांग्रेस में एक बात साफ है—

“कुर्सी एक, दावेदार कई… और सियासत अपने पूरे रंग में!”

लेख - राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर 

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