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मिलपारा वार्ड में “दौरे की राजनीति” पर सवाल: क्या पार्षद की निष्क्रियता से मंत्री यादव की छवि पर पड़ रहा असर? Featured

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दुर्ग / शौर्यपथ।

दुर्ग विधानसभा के मिलपारा वार्ड क्रमांक 38 में इन दिनों स्थानीय राजनीति गरमाई हुई है। वार्ड पार्षद रामचंद्र सेन पर लगातार भेदभाव, निष्क्रियता और जनता से दूरी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब मामला केवल वार्ड की समस्याओं तक सीमित नहीं रहा—बल्कि सीधे प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की छवि तक जुड़ता नजर आ रहा है।

वार्ड के कई मोहल्लों से लगातार यह शिकायत सामने आती रही है कि पार्षद न तो नियमित रूप से क्षेत्र में दिखाई देते हैं और न ही सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। निचले स्तर की सफाई व्यवस्था और जनसमस्याओं की अनदेखी ने पहले ही वार्डवासियों में असंतोष का माहौल बना रखा है। ऐसे में जब मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्डों का दौरा कर जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की पहल की गई, तो वार्ड क्रमांक 38 के लोगों को भी उम्मीद जगी।

“इंतजार करता रहा मोहल्ला, पर नहीं पहुंचे मंत्री”

जानकारी के अनुसार, मां संकट हरनी मंदिर लाइन (बरपेड चौक) क्षेत्र के लोग मंत्री के स्वागत और अपनी समस्याएं बताने के लिए एकत्रित हुए थे। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद रामचंद्र सेन मंत्री को उस इलाके में लेकर ही नहीं पहुंचे, जहां उनके खिलाफ सबसे ज्यादा आक्रोश था। नतीजतन, मोहल्लेवासी लंबे समय तक इंतजार करते रहे और बाद में उन्हें पता चला कि मंत्री का दौरा महज 10-15 मिनट में समाप्त कर दिया गया।

“दौरे को सीमित कर क्या छिपाना चाहते हैं पार्षद?”

स्थानीय चर्चाओं में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या पार्षद ने जानबूझकर मंत्री का दौरा उन इलाकों तक सीमित रखा, जहां विरोध कम था? क्या यह उनकी निष्क्रियता और जनता के आक्रोश को छिपाने की कोशिश थी?

चुनाव के दौरान घंटों वार्ड में घूम-घूमकर समर्थन मांगने वाले पार्षद पर अब आरोप है कि जीत के बाद वे जनता से दूर हो गए हैं। ऐसे में मंत्री के दौरे को भी सीमित कर देना कई सवाल खड़े करता है।

मंत्री की पहल पर “स्थानीय बाधा”?

गौरतलब है कि मंत्री गजेंद्र यादव लगातार अपने क्षेत्र में जनसमस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं। लेकिन वार्ड 38 की घटना ने यह संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर कुछ जनप्रतिनिधि ही इस प्रक्रिया में बाधा बन रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्री तक वास्तविक स्थिति नहीं पहुंचने दी जाएगी, तो इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित होंगे बल्कि उनकी जन-छवि पर भी अनावश्यक सवाल खड़े हो सकते हैं।

जनता में बढ़ता असंतोष, जवाबदेही की मांग

वार्ड के रहवासियों में अब यह मांग तेज हो रही है कि पार्षद की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मंत्री स्वयं बिना स्थानीय फिल्टर के सीधे जनता से संवाद करें।

फिलहाल, मिलपारा वार्ड में एक ही चर्चा जोरों पर है—

“क्या पार्षद की निष्क्रियता मंत्री की सक्रियता पर भारी पड़ रही है?”

अब देखना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम पर पार्षद रामचंद्र सेन और मंत्री गजेंद्र यादव की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, और क्या वार्ड 38 की जनता को उनके सवालों का जवाब मिल पाता है या नहीं।

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