दुर्ग। शौर्यपथ।
एनएसयूआई द्वारा प्रदेश महासचिव Aditya Narang के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रस्तावित प्रवेश शुल्क लागू करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की गई।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि Bhupesh Baghel के कार्यकाल में शुरू की गई स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था। ऐसे में शुल्क लागू किया जाना इस योजना की मूल भावना के विपरीत है।
एनएसयूआई ने अपने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान महंगाई के दौर में ₹410 एवं ₹445 जैसे अतिरिक्त शुल्क भी अभिभावकों के लिए आर्थिक बोझ साबित होंगे। साथ ही शिक्षा के अधिकार के तहत सरकारी विद्यालयों में शिक्षा सर्वसुलभ होनी चाहिए और शुल्क का प्रावधान शिक्षा के लोकतंत्रीकरण में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
प्रदेश महासचिव आदित्य नारंग ने कहा कि समाचार माध्यमों से यह जानकारी सामने आई है कि फंड की कमी के कारण यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने आग्रह किया कि शासन अन्य स्रोतों या बजट आवंटन के माध्यम से विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित करे, न कि छात्रों पर शुल्क का भार डाला जाए।
एनएसयूआई ने जिला शिक्षा अधिकारी से अनुरोध किया कि जनहित एवं छात्रहित को ध्यान में रखते हुए इस मांग को राज्य शासन तक पहुंचाया जाए, ताकि स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा की निरंतरता बनी रहे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान तिरुपति युवा चंद्राकर, तुषार कुमार, पीयूष सिन्हा, मयंक देशमुख, दीप बंजारे, कैलाश साहू, मृदुल सिंह, अभय देशलहरा, निशांत राव सहित अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।