दुर्ग। यूथ कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर दुर्ग शहर की राजनीति इन दिनों पूरी तरह गर्म हो चुकी है। ऑनलाइन मतदान प्रक्रिया और 35 वर्ष की आयु सीमा के बीच युवा नेतृत्व की इस लड़ाई ने कांग्रेस संगठन के भीतर नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। चुनावी मैदान में मनीष सोनवानी, ऋषि साहू, रौनक दुबे और मोहित वाल्दे जैसे युवा चेहरे अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा मनीष सोनवानी और ऋषि साहू के बीच सीधे मुकाबले की हो रही है।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं और संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों पर नजर डालें तो मनीष सोनवानी वर्तमान समय में सबसे मजबूत और संगठित दावेदार के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। युवा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता, संगठन में बढ़ती स्वीकार्यता तथा विभिन्न स्तरों पर मिल रहा सहयोग उन्हें अन्य प्रत्याशियों की तुलना में बढ़त दिलाता नजर आ रहा है। कांग्रेस के कई सक्रिय कार्यकर्ता मानते हैं कि यदि वर्तमान परिस्थितियां इसी प्रकार बनी रहती हैं तो मनीष सोनवानी अध्यक्ष पद की दौड़ में निर्णायक बढ़त हासिल कर सकते हैं।
दूसरी ओर ऋषि साहू भी चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ डटे हुए हैं। उनके समर्थन में विवेक मिश्रा लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऋषि साहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी पूर्व विधायक अरुण वोरा के करीबी समर्थक के रूप में बन रही छवि है। कांग्रेस के भीतर बदलते शक्ति संतुलन के बीच यह समीकरण कई युवाओं को आकर्षित करने के बजाय दूरी बनाने के लिए भी प्रेरित कर सकता है।
रौनक दुबे भी चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। उन्हें पूर्व विधायक स्तर के कुछ नेताओं का समर्थन मिलने की चर्चाएं हैं और युवा वर्ग का एक हिस्सा उनके साथ दिखाई देता है। हालांकि संगठनात्मक स्तर पर अभी तक वह उतनी मजबूत स्थिति बनाते नजर नहीं आ रहे जितनी मनीष सोनवानी के पक्ष में दिखाई दे रही है।
यदि दुर्ग कांग्रेस की राजनीति को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो एक समय प्रदेश कांग्रेस और दुर्ग कांग्रेस की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा वोरा बंगला अब पहले जैसी राजनीतिक ऊर्जा का केंद्र नहीं दिखाई देता। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में संगठनात्मक शक्ति और प्रभाव के स्तर पर पूर्व विधायक अरुण वोरा की स्थिति लगातार कमजोर हुई है। यही कारण है कि यूथ कांग्रेस चुनाव में भी प्रत्याशियों का पूरा राजनीतिक केंद्र अब केवल वोरा बंगले तक सीमित नहीं रह गया है।
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेजी से चल रही है कि युवा कांग्रेस के इस चुनाव में कई कार्यकर्ता ऐसे प्रत्याशियों के पक्ष में खड़े होना चाहते हैं जो भविष्य की नई राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हों। इस दृष्टिकोण से मनीष सोनवानी को लाभ मिलता दिखाई दे रहा है, जबकि अरुण वोरा समर्थक माने जाने वाले खेमों को अतिरिक्त राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे चुनावी परिदृश्य के बीच मोहित वाल्दे भी लगातार दमदारी से चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं। हालांकि वर्तमान राजनीतिक समीकरणों में मुकाबला मुख्य रूप से मनीष सोनवानी और ऋषि साहू के बीच सिमटता हुआ दिखाई देता है, जबकि रौनक दुबे तीसरे कोण के रूप में चुनावी गणित को प्रभावित कर सकते हैं।
उधर दुर्ग शहर कांग्रेस की सक्रियता भी इस चुनाव को विशेष महत्व प्रदान कर रही है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल में कांग्रेस की जमीनी गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। लंबे समय बाद कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क से लेकर संगठन तक सक्रिय दिखाई दिए हैं। ऐसे में युवा कांग्रेस के चुनाव को केवल एक संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं बल्कि भविष्य के नेतृत्व चयन के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब सबकी निगाहें ऑनलाइन मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हैं। क्या मनीष सोनवानी अपनी बढ़त को जीत में बदल पाएंगे? क्या ऋषि साहू राजनीतिक चुनौतियों को पार कर वापसी करेंगे? क्या रौनक दुबे अंतिम समय में समीकरण बदल देंगे? इन सभी सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। फिलहाल दुर्ग की राजनीति में एक बात स्पष्ट दिखाई दे रही है कि युवा नेतृत्व की इस लड़ाई में मनीष सोनवानी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में चर्चा के केंद्र में हैं।
नोट:यह लेख राजनीतिक विश्लेषण और चर्चाओं की शैली में तैयार किया गया है,