Print this page

झीरम फैसले पर कांग्रेस के तीखे सवाल: ‘छोटे नक्सलियों को सजा, बड़े साजिशकर्ताओं का सच अब भी पर्दे में’

  • doing of business

NIA की जांच पर दंतेवाड़ा कांग्रेस ने उठाए सवाल, पूछा- गणपति और रमन्ना समेत 26 नाम चार्जशीट से क्यों हटाए गए? आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं हुई?

शौर्यपथ संवाददाता-कृष्णा मंडल

दंतेवाड़ा । झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने जांच और कार्रवाई की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने फैसले को “आधा-अधूरा न्याय” बताते हुए आरोप लगाया कि झीरम नरसंहार के पीछे कथित रूप से मौजूद बड़े नक्सली नेताओं और राजनीतिक षड्यंत्र का सच अब तक सामने नहीं आया है।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शकील रिज़वी ने कहा कि कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन अदालत के सामने एनआईए ने जो तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए, फैसला उन्हीं के आधार पर आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही और घटना के राजनीतिक षड्यंत्र से जुड़े पहलू की गंभीरता से जांच नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वारदात केवल छोटे स्तर के नक्सली कैडरों के भरोसे संभव नहीं थी। ऐसे में बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए थी।

गणपति और रमन्ना के नाम चार्जशीट से हटाने पर सवाल
कांग्रेस ने एनआईए की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि शुरुआती एफआईआर में जिन प्रमुख नक्सली नेताओं गणपति और रमन्ना के नाम शामिल थे, उनके नाम बाद की चार्जशीट से क्यों हटा दिए गए?
कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि एनआईए द्वारा वांछित और फरार घोषित किए गए कई नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तो झीरम मामले में उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई? पार्टी ने मांग की कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेताओं से घटना के संबंध में पूछताछ कर उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

26 फरार आरोपियों के नाम हटने पर भी उठे सवाल
पीसीसी संयुक्त महामंत्री छविंद्र कर्मा ने कहा कि एनआईए की शुरुआती कार्रवाई और बाद में प्रस्तुत चार्जशीट के बीच कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अब तक नहीं मिला है। उन्होंने सवाल किया कि गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद बाद की चार्जशीट से उनके नाम क्यों हटाए गए?
उन्होंने कहा कि झीरम मामले की जांच को केवल एक स्तर तक सीमित करने के बजाय घटना की पूरी साजिश और इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका सामने लाने की जरूरत है।

परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा और मार्ग बदलने पर भी सवाल
कांग्रेस नेताओं ने परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई, यात्रा का मार्ग किसने और क्यों बदला, हमले की योजना किसने बनाई और सुरक्षा व्यवस्था में चूक कैसे हुई?
पार्टी ने आरोप लगाया कि हमले में घायल हुए और जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी जांच में अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।

देवती कर्मा ने भाजपा पर साधा निशाना
पूर्व विधायक देवती महेंद्र कर्मा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की तत्कालीन सरकार से लेकर मौजूदा व्यवस्था तक झीरम के पूरे सच को सामने लाने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच को भी आगे नहीं बढ़ाया गया।
देवती कर्मा ने आरोप लगाया कि बड़े नक्सली नेताओं को जांच के दायरे में नहीं लाया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

‘पूरा सच सामने आने तक जारी रहेगी न्याय की लड़ाई’
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झीरम केवल एक नक्सली हमला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का ऐसा गहरा जख्म है, जिसका पूरा सच अब भी सामने आना बाकी है। पार्टी का कहना है कि जब तक हमले के वास्तविक षड्यंत्रकारियों, कथित राजनीतिक साजिश और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तमाम सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक कांग्रेस न्याय की लड़ाई जारी रखेगी।
पत्रकार वार्ता में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव तूलिका कर्मा, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, जिला महामंत्री मनीष भट्टाचार्य, प्रवीण राणा, मनोज मालवीय, महिला कांग्रेस अध्यक्ष इंद्रा शर्मा, दंतेवाड़ा ब्लॉक कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुमित्रा शोरी, जिला सचिव जितेंद्र कश्यप और मनोज कौरव सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

Rate this item
(0 votes)
शौर्यपथ

Latest from शौर्यपथ