राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रूपेश दुबे ने राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडे के देशव्यापी किसान आंदोलन में अर्बन नक्सली शामिल होने की बात पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत बंद की सफलता से बौखला कर सांसद ने यह बात कह कर छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्नदाता किसानों का अपमान किया है, जिसके लिए उन्हें खेद व्यक्त कर सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।
प्रवक्ता श्री दुबे ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की 15 वर्षीय भाजपा शासन काल के कुचक्र में किसान निरंतर पिसते रहे जिसके कारण वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर थे तब भी भाजपा सरकार ना तो 21 सौ का समर्थन मूल्य और ना ही 3 साल का बोनस दी थी।
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आते ही सबसे पहली घोषणा किसानों का कर्जा माफ और 25 सौ रूपये धान का समर्थन मूल्य देने की घोषणा कर अन्नदाताओं को उनका वाजिब हक दिया है और वर्तमान धान खरीदी में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो इसके लिए पुलिस विभाग द्वारा संचालित 112 की भी सुविधा किसान ले इसकी भी घोषणा मुख्यमंत्री ने कर पुनः एक अभिनव पहल छत्तीसगढ़ ही नहीं देश में की है, जो उनके किसान हितैषी सोच का परिचायक है। सांसद संतोष पांडे ने रिश्वत का बोलबाला की बात करते है तो इसके संबंध में सांसद को अपनी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व बंगारू लक्ष्मण एवं छग प्रदेश में जूदेव एवं स्थानीय में पूर्व सांसद प्रदीप गांधी के लोकसभा में प्रश्न पूछने के नाम पर राशि लेने जैसे प्रकरणों पर चिंतन करें।
किसान या परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु निश्चित ही दुखद घटना होती है, ऐसी घटना के लिए कांग्रेस पार्टी भी अपनी संवेदना दुखी परिवार के प्रति रखती है और प्रकरण के सभी तथ्यों की जांच के लिए प्रशासनिक दल मौके पर पहुंचकर कार्यवाही प्रारंभ कर दी है, ऐसे समय में मौसमी मेंढक की भांति भाजपाई गुटबाजी के चलते अपनी अपनी सुप्त राजनीति को जगाने का असफल प्रयास कर रहे हैं और किसानों की मौत पर राजनीति कर रहे हैं, यहां यह बताना लाजिमी है कि पूरा विश्व कोरोना वायरस से गुजर रहा था, तब राजनांदगांव के सांसद पांडे झूठे श्रेय के चलते अपने 25 लाख के फंड में एक करोड़ देने की गुमराह घोषणा कर महामारी के समय झूठ की बुनियाद पर राजनीति करने का कार्य कर चुके हैं, वो तो जिलाधीश की सजगता थी जो 1 करोड़ की अटपटी घोषणा में मात्र 25 लाख ही स्वीकार कर सत्यता से कार्य किया था। भाजपा को किसानों के आड़ में घड़ियालु आंसू बहाते छत्तीसगढ़ की जन हितैषी कांग्रेस सरकार के खिलाफ बोलने का नैतिक अधिकार ही नहीं है।