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प्रदेश के खुशहाल किसानों की समृद्धि देखकर भाजपा को पीड़ा, धान से तैयार लेवी का चावल लेने से इंकार करने वाले भाजपा नेता किस आधार पर कर रहे आंदोलन

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दुर्ग । शौर्यपथ । 22 जनवरी को प्रस्तावित आंदोलन करने से पहले भाजपा नेता पहले स्पष्ट तो करें कि किस आधार पर आंदोलन किया जा रहा है। रमन सरकार के कार्यकाल में किसानों से औसतन 50 लाख टन धान खरीदी होती थी। भूपेश सरकार ने इस साल लगभग 81 लाख टन धान की खरीदी कर ली है। करीब 9 टन धान की खरीद और संभावित है। ये आंकडे बताते हैं कि रमन सरकार की तुलना में भूपेश सरकार काफी ज्यादा धान खरीदी कर रही है। इन आंकड़ों से भाजपा का यह आरोप अपने आप खारिज हो जाता है कि कांग्रेस सरकार में धान खरीदी न होने से किसान परेशान हैं। रमन सरकार ने 15 साल तक छत्तीसगढ़ में राज किया लेकिन न तो वादे के मुताबिक 21 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की गई, न 3 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया गया। भूपेश सरकार ने 1868 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के साथ राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 10 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देकर किसानों को बड़ी राहत दी है। 15 साल में रमन सरकार ने कर्जमाफी नहीं की। भूपेश सरकार ने सत्ता संभालने के चार घंटे के भीतर किसानों की कर्जमाफी का ऐतिहासिक फैसला कर दिया। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले भाजपा नेता पूरे देश में एक-दो किसान का ही नाम बता दें, जिससे निजी मंडियों में धान के समर्थन मूल्य 1868 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक दर पर धान खरीदी की गई हो। उसकी रसीद दिखा दें ताकि हमारे किसान भी अधिक दर पर धान बेच सकें। सच ये है कि कृषि बिल के कारण किसानों को समर्थन मूल्य से काफी कम दर पर अनाज बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा। किसानों की उपज का दाम बड़े उद्योगपति और व्यवसायी तय करेंगे। इस कानून से किसान दिनोंदिन बदहाल हो जाएंगे। कृषि बिल को डेढ़ साल के लिए स्थगित करना दर्शाता है कि केंद्र सरकार पीछे हट रही है और कृषि बिल में खोट है। पूरा देश जानता है कि बड़े उद्योगपतियों के मोहजाल में फंसकर केंद्र सरकार ने कृषि बिल लागू किया है। खुले बाजार में कहीं पर भी समर्थन मूल्य पर अनाज की खरीदी नहीं हो रही है। व्यापारी 14 सौ या 15 सौ रुपए की दर से धान खरीदी कर रहे हैं। रमन सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े में बेतहाशा वृद्धि हुई। कर्ज के बोझ तले रहने वाले किसानों को भूपेश सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब किसानों की जेब में बारहों महीने पैसा रहता है। समर्थन मूल्य पर अनाज की खरीदी के साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना की राशि साल भर में चार किस्तों में मिलने से प्रदेश के किसान खुशहाल हैं। प्रदेश के भाजपा नेताओं को आंदोलन करना है तो केंद्र सरकार के तीनों कृषि बिल के खिलाफ आंदोलन करें। देश में बेतहाशा महंगाई बढ़ने और महिला असुरक्षा सहित कृषि बिल की खामियों को छुपाने के लिए प्रदेश में भाजपा संगठन 22 जनवरी को आंदोलन कर रहे हैं। जिस भाजपा की केंद्र सरकार ने किसानों के धान से बने चावल को लेवी में लेने पर टालमटोल और रोक लगाने का काम किया है, उस भाजपा को किसानों के हित में आंदोलन करने का अधिकार ही नहीं है। सच ये है कि छत्तीसगढ़ का किसान खुशहाल है। किसी भी किसान ने कांग्रेस सरकार पर आरोप नहीं लगाया। शिकायत नहीं की है। कर्जमुक्त और खुशहाल किसानों के कारण व्यापारियों का व्यापार भी बेहतर है। भाजपा को जवाब देना होगा कि क्या खुशहाल किसानों की समृद्धि देखकर लेवी का चावल लेने से टालमटोल किया जा रहा है। किसानों की समृद्धि देखकर भाजपा को पीड़ा क्यों हो रही है।

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शौर्यपथ

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