रायपुर /शौर्यपथ / मजदूरो को राज्य में आने की अनुमति में गलत समय के फैसले पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मो. असलम ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कोरोना वायरस से व्याप्त महामारी की स्थिति देश में अब कम्युनिटी ट्रांसमिशन के खतरे की ओर बढ़ रही है, जो बेहद खतरनाक एवं डरावनी है। हालांकि छत्तीसगढ़ में स्थिति राज्य सरकार की सतर्कता के कारण बेहद व्यवस्थित, नियंत्रित और संतुलित है। जिस तरह से महामारी के कारण देश में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति निर्मित हो रही है उससे यही लगता है कि करोना पर काबू पाना फिलहाल मोदी सरकार के लिये संभव नहीं है। केंद्र सरकार नागरिकों पर बोझ डालकर और महामारी को नजरअंदाज करते हुए जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहती है। प्रारंभ में कोरोना वायरस को लेकर केंद्र सरकार ने सारी बागडोर और जवाबदेही खुद ही संभाली हुई थी। अब बीमारी के विस्तार से हड़बड़ाहट में आलम यह है कि राज्यों को जिम्मेदारी हस्तांतरित कर कोरोनावायरस के फैलाव का ठीकरा फोडऩे की तैयारी की जा रही है।
मोहम्मद असलम ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजकर 30 हजार करोड़ मांगे थे, जिसमें 10,000 करोड़ तत्काल प्रदान करने की मांग की गई थी, वहीं राज्यों की सीमा नहीं खोलने का आग्रह किया गया था और विमान सेवाएं निलंबित रखने का सुझाव दिया गया था। किंतु केन्द्र सरकार द्वारा राज्य की एक भी बात नहीं सुनी गई। अब केंद्र सरकार द्वारा जवाबदारी से बचने का मौका ढूंढा जा रहा है, जो चिंताजनक है। शुरूआत में लाकडाउन क्रूर था और अब लापरवाह बन चुका है। अचानक सख्ती में कमी, नीतियों के समन्वय में कमी और अब जल्दबाजी में लाकडाउन खोलकर दी जा रही, खुली छूट से मिल रही विफलता की कीमत निर्दोष गरीबों, मजदूरों, मजलूमों, सहित बेबस नागरिकों को चुकानी पड़ रही है।
जब संक्रमण की रफ्तार कम थी तब मजदूरों को घर जाने की अनुमति एवं सुविधा नहीं दिया जाना सबसे बड़ी चूक साबित हुई है। अब प्रवासी मजदूर केंद्र सरकार पर अविश्वास करते हुए जमी हुई घर गृहस्थी को छोड़कर, सब कुछ उजाड़ कर लुटाकर, जीवन दांव पर लगाकर अपने राज्यों की ओर जा रहे हैं। जीवन भर की कमाई से बेदखल हो गए हैं, तब भी केंद्र सरकार की आंख बंद है और उनको सीधे सहायता पहुंचाने के लिए राशि प्रदान नहीं करना चाहती है और सब कुछ विपक्ष पर आरोप लगाकर पीछा छुड़ाने से बाज़ नहीं आ रही है।
सुझावों को तहरीर नहीं दिए जाने के बारे में प्रवक्ता असलम ने कहा है की केंद्र सरकार द्वारा विपक्ष के सकारात्मक सुझावों और सहयोग को तरजीह नहीं दिए जाना और महामारी की गंभीरता को लेकर संक्रमण विशेषज्ञों से मशविरा नहीं लिया जाना सरकार की अदूरदर्शिता है। वहीं मेडिकल क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा भी महामारी पर नियंत्रण के लिए अपनाए गए तरीकों की आलोचना की गई है, जो सरकार की विफलता को स्पष्ट दर्शाती है।
विश्व में भारत ऐसा देश है जहां कोरोना वायरस से संक्रमण नियंत्रित भी नहीं हुआ है और निरंतर बढ़ोतरी की ओर है फिर भी मोदी सरकार को अनलॉक करने की जल्दबाजी है। अभी भारत की स्थिति विश्व में छठवें स्थान पर हैं। यही हालत रही तो कोरोना संक्रमण अगर और बढ़ता है तो बेहद खौफनाक होगा। जिसकी आशंका विशेषज्ञों ने भी जताई है।