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टीकाकरण हेतु उपयुक्त पॉलिसी और प्रबंधन बनाने में भूपेश सरकार नाकाम-मेहरबान सिंह

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दुर्ग / शौर्यपथ / आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी ने काँग्रेस नित भूपेश बघेल सरकार पर टीकाकरण अभियान की पॉलिसी एवं प्रोग्राम प्रबंधन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि टीकाकरण अभियान के अंतर्गत कोरोना वारियर्स ,फ्रंट लाइन वर्कर को टीके के दोनों डोज़ देने एवं 45 वर्ष आयु से ऊपर के लोगों को प्रथम डोज़ देने के बाद जब 18वर्ष से अधिक आयु वर्ग के तथा 45वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को दूसरे डोज़ की बारी आई तो सरकार की पॉलिसी पर सवालिया निशान लग गया है और टीकाकरण का प्रबंधन लड़खड़ा गया है।
यहाँ तक की हाई कोर्ट को पॉलिसी में सुधार के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा जिसके फलस्वरूप 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण प्रोग्राम रुक गया है।उन्होंने आगे कहा कि टीकाकरण का प्रोटोकॉल केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को सौंपना चाहिए।विकसित देशों में टीकाकरण के पूर्व Covid-19 टेस्ट किया जाता है, टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही लोगों का टीकाकरण किया जाता है।भारत में ऐसा क्यों नहीँ किया जा रहा है इसे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा स्पष्ट किया जाना चाहिए।साथ ही जनता के एक बड़े वर्ग के बीच यह अफवाह फैली हुई है कि टीका लगाने के बाद बहुत से लोगों की तबियत बहुत ज्यादा बिगड़ रही है इस अफवाह का भी संज्ञान सरकार को लेना चाहिए और इसे उचित माध्यम से दूर करना चाहिए।
डॉ एस के अग्रवाल ने कहा राज्य सरकार को सलाह देते हुए कहा कि कोरोना टेस्टिंग हेतु जितने भी सेंटर बनाए गए हैं उनकी संख्या बढ़ाई जाए और उन्हें टीकाकरण का केंद्र भी बनाया जाए।प्रत्येक जिलों में प्रतिदिन हजारों की संख्या में टेस्टिंग हो रहे हैं जिनमेँ लगभग एक चौथाई लोग ही पॉजिटिव और शेष निगेटिव निकल रहे हैं।जिस समय लोग अपनी रिपोर्ट लेने आएँ उसी समय नेगेटिव रिपोर्ट वाले लोगों को टीकाकरण कक्ष में टीका लगा दिया जाए।वर्तमान में जब टीकों की उपलब्धता में कठिनाई हो रही है तब यह व्यवस्था कारगर साबित हो सकती है और विकसित देशों के अनुरूप टीकाकरण से पूर्व टेस्टिंग का मापदंड भी आसानी से पूरा हो जाएगा। उन्हीं टीकाकरण केंद्रों में दूसरे डोज़ का टीकाकरण भी बिना टेस्टिंग के किया जा सकता है।

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शौर्यपथ

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