शौर्यपथ । सत्ता चाहे कांग्रेस की हो चाहे भाजपा की हो या किसी अन्य दलों की जिसके हाथ सत्ता रहती है पुलिस प्रशासन उनके आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य होती है यही लोकतंत्र का नियम है दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हर सत्ताधारी पुलिस को अपने आदेशों को पालन करने के लिए निर्देशित करता है पुलिस प्रशासन चेहरा देखकर निर्देशों का पालन कभी नहीं करती वह चुने हुए सरकार के आदेशों के अधीन कार्य करती है और आंदोलन का कार्य विपक्ष के द्वारा किया जाता है .रायपुर में 24 तारीख को भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा हल्ला बोल आंदोलन किया गया था साथ ही सीएम के आवास घेराव का ऐलान किया गया था जिसकी सुरक्षा में पुलिस प्रशासन सुबह से ही मुस्तैद रही पुलिस प्रशासन समाज में शांति व्यवस्था लागू करने के लिए प्रयासरत रहती है किंतु आज जिस हिसाब से आंदोलनकारियों ने पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर हाथ उठाया क्या वह सही है ऐसा कई बार देखने को मिलता है कि नेता अपने भाषण में यह कहते हुए पाए जाते हैं कि पुलिस प्रशासन आज तुम अपने मंत्रियों की सुनो किंतु कल जब हमारी सत्ता आएगी तो देख लेना इस प्रकार के वक्तव्य आम सुनने को और सोशल मीडिया के माध्यम से देखने को मिल ही जाते हैं .
आज जिस हिसाब से भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के ऊपर हाथ उठाया वह क्या सही है सत्ता चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की पुलिस प्रशासन हर परिस्थिति में अपनी ड्यूटी निभाती है चाहे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार हो चाहे मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार हो चाहे केंद्र में भाजपा की सरकार चाहे ,बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है हर प्रदेश सरकार के निर्देशों का पालन प्रदेश सरकार की पुलिस प्रशासन करती है एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहती है किंतु पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर किसी भी दल द्वारा हाथ उठाना कहां तक सही है सोशल मीडिया में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिसमें अन्य प्रदेशों में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के समय पुलिस प्रशासन को भला बुरा कहा हो धक्का-मुक्की की हो हाथ उठाया हो तब उस वीडियो को सोशल मीडिया में वायरल कर यह दर्शाया जाता है कि उक्त कांग्रेसी नेता पुलिस अधिकारियों का सम्मान नहीं करते किंतु आज वही स्थिति रायपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा देखने को मिली जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस के अधिकारियों कर्मचारियों पर जवानों पर हाथ उठाया कुछ समय पहले ऐसे ही एक आंदोलन में 15 साल तक सत्ता में रहे पूर्व मंत्री ने भी पुलिस प्रशासन को गंदी गंदी गालियां दी थी जो कि सोशल मीडिया में काफी वायरल हुई थी चाहे वह भाजपा कार्यकर्ता हो चाहे वह कांग्रेस कार्यकर्ता हो चाहे किसी भी दल का कार्यकर्ता हो पुलिस प्रशासन पर हाथ उठाना कहां तक सही है पुलिस प्रशासन तो सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रही है कल दूसरे की सरकार आ जाएगी उनकी ड्यूटी करेगी क्या ड्यूटी करने की आवाज में अपमानित करना सही है