February 05, 2023
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शौर्य की बाते ( सम्पादकीय )

शौर्य की बाते ( सम्पादकीय ) (108)

दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर के बहुत लंबे समय तक NSUI के दमदार अध्यक्ष रहे छात्रः राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले अरुण वोरा के सबसे करीबी रहे कुणाल तिवारी ने स्व वासुदेव चंद्राकार जी के पुण्यतिथि के अवसर उनकी एक यादे को शौर्यपथ समाचार के साथ सांझा की . कुणाल तिवारी ने बताया यह उस समय की बात है। जब वह NSUI अध्यक्ष थे। तब स्व. वासुदेव चंद्राकार जी का विशेष स्नेह वा आशीर्वाद प्राप्त रहता था। स्व दाऊ जी ( स्व. वासुदेव चंद्राकर जी कोसभी प्यार से दाऊ जी संबोधित करते थे ) के अंतिम समय के कुछ दिन पूर्व  कुणाल तिवारी  वा विजय चंद्राकार जो कि वर्तमान मे युवा कुर्मी समाज के जिला अध्यक्ष के रूप मे कार्य कर रहे है स्व. दाऊ जी का आशीर्वाद लेने दाऊ जी के निवास पहुचे थे। ठंड का समय था दाऊ जी गोरसी मे आग सेंक रहे थे। दोनों युवा नेताओ ने स्व. दाऊ जी के चरण छू कर आशीर्वाद लिया। दाऊ जी ने अपने अंदाज मे कहा केसे आए हों रे युवा नेता मन। तब कुनाल ने कहा दाऊ जी आपका आशीर्वाद लेने व राजनीति का गुण सीखने आये है । तब दाऊ जी ने अपने अंदाज मे कहा कि आज तो मोर तबीयत खराब है। फिर भी तुमन आए हों तो एक बात बोलू एला तुमन गाँठ बाँध लो आग ला आग जइसन रहना चाहिए और पानी ला पानी जइसन रहना चाहिए जो अपन अस्तित्व मे परिवर्तन लाईस समझो वो समाप्त हो गए.उसके बात बोले अब तुमन जाओ मे ह आराम करूँह । वह मुलाकात हम लोगों की आखिरी मुलाकात थी। पर वो दिन और दाऊ जी की बात और उनका अंदाज भी आज भी हमारे स्मरण मे जिवित है।

शौर्यपथ लेख। दुर्ग जिले में वीरा सेठ  को कौन नहीं जानता वीरा सेठ मतलब ट्रांसपोर्ट जगत के राजा जितने बड़े व्यक्ति थे उतना ही बड़ा उनका दिल गरीबों का ख्याल रखना मदद उनका मकसद रहा अपने जीवन काल में उन्होंने पैसा तो बहुत कमाया किंतु पैसे के साथ जो इज्जत शोहरत कमाई वो उनके जाने के बाद भी आज जीवित है आज भी वीरा सेठ का नाम दुर्ग जिले बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है ।
   आज वीरा सेठ को जीवित रखने में उनकी यादों को आम जनता के दिलो में कायम रखने में उनके पुत्र इंदर सिंह ने अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है  । आज जहा दुनिया में पैसे के खातिर बेटा बाप का दुश्मन बन जाता है वही इंदर सिंह अपने पिता के द्वारा किए हुए कार्यों को ना सिर्फ अनवरत जारी रख रहे है बल्कि आगे भी बढ़ा रहे।आज जिस तरह से इस जमाने में जहा दूसरे लोग स्वास्थ के क्षेत्र में लूट खसोट कर रहे है वही उच्चतम स्तर की स्वास्थ्य सेवा एस बी एस हॉस्पिटल के माध्यम निम्मतम मूल्य पर उपलब्ध करा रहे है । अपने सैकड़ों स्टाफ के साथ हर उस व्यक्ति की मदद के लिए तैयार रहते है जो जरूरत मंद है सामाजिक क्षेत्र में भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाले इंदर सिंह उर्फ छोटू भैया आज भिलाई ही नही दुर्ग जिले की पहचान बन गए है । जो कार्य सरकार आम जनता के हित के लिए करती है वही कार्य छोटू भैया उर्फ इंदर सिंह कर रहे है । अपने पिता की पुण्यतिथि में 3 अक्टूबर को इंदर सिंह ने जिस तरह ट्रांसपोर्ट क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के बेटियो के विवाह में 25 हजार की सहायता राशि देने का पुनीत कार्य का आगाज किया वह उनके पिता की आत्मा को सुकून ही देगा और आज इस ब्रम्हांड में जहा भी वीरा सेठ होंगे वह गर्व महसूस कर रहे होंगे और सीना चौड़ा कर कह रहे होंगे की वो देखो मेरा बेटा इंदर सिंह है मेरा बेटा है समाज को अपना समझने वाले वीरा सिंह बेटे के लिए बस मेरा बेटा है कहकर खुश हो रहे होंगे । सच में नमन है वीरा सेठ को जिन्होंने एक ऐसा बेटा समाज को दिया जो निरंतर सेवा भाव से समाज की सेवा कर रहा ऐसा बेटा की चाह आज हर व्यक्ति को होगा मेरी नजर में वीरा सेठ से ज्यादा आदर सम्मान आज इंदर सिंह के लिए है जिन्होंने अपने पिता के सपने को जीवित ही नहीं रखा बल्कि उसे निरंतर बढ़ा रहे है । सही मायने में देखा तो आज इन्दर सिंह से मुझे प्रेरणा मिलती है आज मेरे जीवन का लक्ष्य भी बस यही है कि मेरे शौर्य का ना इस दुनिया में हमेशा जीवित रहे और यही मेरे जीवन का मकसद है कहा तक सफल हो पाऊंगा ये तो नहीं पता पर कोशिश निरंतर ज़ारी रहेगी शोर्य तेरा पापा तेरे लिए कुछ नहीं कर पाया किन्तु तेरे नाम को जीवित रखना ही जिन्दगी का मकसद बन गया है .
लेख वीरा सेठ को समर्पित ??
शरद पंसारी ( संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार )

 शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम के सभी कर्मचारियों ने जिस तादाद में कांग्रेस ज्वाइन की है उसे देखकर लगता है कि अब दुर्ग नगर निगम के कर्मचारी खुलकर कांग्रेस के समर्थन में सामने आ गए हैं जिससे भाजपा की मुश्किलें आने वाले समय में और बढ़ सकती है इस बात में कितनी सच्चाई है कि दुर्ग नगर निगम के कर्मचारी कांग्रेस प्रवेश कर लिए हैं या फिर उन्हें कांग्रेस का गमछा पहनाकर फोटो खिंचवा कर कोई बड़ी राजनीतिक प्रक्रिया  चल रही है .
  जो भी हो किंतु जिस तरह से शासकीय कर्मचारी खुलकर राजनीतिक पार्टी का गमछा पहनकर मैदान में उतर गए हैं यह एक अलग ही राजनीतिक परिदृश्य को इंगित करता है वही प्रशासनिक व्यवस्था का राजनीतिकरण करने की दिशा में एक कदम और बढ़ गया यह वही कर्मचारी है जो 2 दिन पहले तक भूपेश सरकार के खिलाफ आंदोलनरत थे और भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं लोक सभा सांसद के समर्थन से खुश थे क्या आप प्रशासनिक विभाग भी राजनीतिक करण की चपेट में आ गया है या सिर्फ फोटो खिंचवा कर प्रसिद्धि पाने का जरिया बन गया है .  कुछ ऐसी ही चर्चा इन दिनों दुर्ग की राजनीती में चल रही है . वही कुछ लोगो का कहना है कि यह गमछा तो लाडले भैया ने पहना दिया और फोटो खिचवा दिया हम तो सिर्फ आरती में गए थे . आखिर ऐसी क्या बात हुई कि इस तरह फोटो खिचवाना सोशल मिडिया में पोस्ट करना फिर कुछ समय बाद डिलीट कर देना , सब कुछ काली दाल के जैसे प्रतीत हो रहा है और चर्चा का विषय बन रहा है . वैसे ही इन दिनों विधायक जी और एक अन्य व्यक्ति का ऑडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ ...
गमछा और फोटो विधायक एवं महापौर के साथ इसका एक दूसरा पहेली भी पर्दे के पीछे रचा गया पूरी कूटनीतिक रचना के लिए देखिए शौर्यपथ का धमाकेदार खबर...

शौर्यपथ ।   सत्ता चाहे कांग्रेस की हो चाहे भाजपा की हो या किसी अन्य दलों की जिसके हाथ सत्ता रहती है पुलिस प्रशासन उनके आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य होती है यही लोकतंत्र का नियम है दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हर सत्ताधारी पुलिस को अपने आदेशों को पालन करने के लिए निर्देशित करता है पुलिस प्रशासन चेहरा देखकर निर्देशों का पालन कभी नहीं करती वह चुने हुए सरकार के आदेशों के अधीन कार्य करती है और आंदोलन का कार्य विपक्ष के द्वारा किया जाता है .रायपुर में 24 तारीख को भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा हल्ला बोल आंदोलन किया गया था साथ ही सीएम के आवास घेराव का ऐलान किया गया था जिसकी सुरक्षा में पुलिस प्रशासन सुबह से ही मुस्तैद रही पुलिस प्रशासन समाज में शांति व्यवस्था लागू करने के लिए प्रयासरत रहती है किंतु आज जिस हिसाब से आंदोलनकारियों ने पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर हाथ उठाया क्या वह सही है ऐसा कई बार देखने को मिलता है कि नेता अपने भाषण में यह कहते हुए पाए जाते हैं कि पुलिस प्रशासन आज तुम अपने मंत्रियों की सुनो किंतु कल जब हमारी सत्ता आएगी  तो देख लेना इस प्रकार के वक्तव्य आम सुनने को और सोशल मीडिया के माध्यम से देखने को मिल ही जाते हैं .
   आज जिस हिसाब से भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के ऊपर हाथ उठाया वह क्या सही है सत्ता चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की पुलिस प्रशासन हर परिस्थिति में अपनी ड्यूटी निभाती है चाहे छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार हो चाहे मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार हो चाहे केंद्र  में भाजपा की सरकार चाहे ,बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है हर प्रदेश सरकार के निर्देशों का पालन प्रदेश सरकार की पुलिस प्रशासन करती है एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहती है किंतु पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर किसी भी दल द्वारा हाथ उठाना कहां तक सही  है सोशल मीडिया में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जिसमें अन्य प्रदेशों में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के समय पुलिस प्रशासन को भला बुरा कहा हो धक्का-मुक्की की हो हाथ उठाया हो तब उस वीडियो को सोशल मीडिया में वायरल कर यह दर्शाया जाता है कि उक्त कांग्रेसी नेता पुलिस अधिकारियों का सम्मान नहीं करते किंतु आज वही स्थिति रायपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा देखने को मिली जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस के अधिकारियों कर्मचारियों पर जवानों पर हाथ उठाया कुछ समय पहले ऐसे ही एक आंदोलन में  15 साल तक सत्ता में रहे पूर्व मंत्री  ने भी पुलिस प्रशासन को गंदी गंदी गालियां दी थी जो कि सोशल मीडिया में काफी वायरल हुई थी चाहे वह भाजपा कार्यकर्ता हो चाहे वह कांग्रेस कार्यकर्ता हो चाहे किसी भी दल का कार्यकर्ता हो पुलिस प्रशासन पर हाथ उठाना कहां तक सही है पुलिस प्रशासन तो सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रही है कल दूसरे की सरकार आ जाएगी उनकी ड्यूटी करेगी क्या ड्यूटी करने की आवाज में अपमानित करना सही है

शौर्यपथ विश्लेषण / छत्तीसगढ़ में भाजपा की प्रभारी डी पुरंदेश्वरी हमेशा अपने बयानों के लिए विवाद में रहती हैं तीसरी बार जिस तरह डी पुरंदेश्वरी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए बयान जारी किया जिसमें सच ना बोलने पर तंज कसा वही सच कहने पर सिर के हजार टुकडे हो जाने का श्राप देने जैसा वक्तव्य जारी किया क्या यह भारतीय संस्कृति को अपना मानने वाली भारतीय जनता पार्टी कि एक नेता की ऐसी सोच है आज के इस युग में कौन सा नेता है जो हर बात सच बोल रहा है जब तक सत्ता में है सभी बेदाग हैं सत्ता हटते ही कई तरह के घोटाले उनके सामने आने लगते हैं .15 सालों से छत्तीसगढ़ में भाजपा का राज रहा और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह एक बेदाग छवि के मुख्यमंत्री के रूप में आम जनता के सामने आते रहे किंतु सत्ता जाते ही घोटालों की बौछार लग गई यही राजनीति है किंतु इस तरह की राजनीति में श्राप देने जैसा कार्य क्या  डी पुरंदेश्वरी को शोभा देता है .
  आज डी पुरंदेश्वरी एक बड़े पद पर आसीन हैं बावजूद इसके इस तरह का ब्यान देकर छत्तीसगढ़ की जनता को क्या बताना चाहती है अपने पिछले डोरे में भी डी पुरंदेश्वरी ने ऐसा ही विवादित बयान जारी किया था जिसमें यह कहा गया था कि अगर भाजपा कार्यकर्ता मिलकर थूक ही दे तो पूरी कांग्रेस सरकार उस में बह जाएगी क्या डी पुरंदेश्वरी थूकने और श्राप देने से उठकर जनता के हितों की कभी बात करेंगे आज रोजगार की बात है तो यह चुनावी वादा हर पार्टी करती है केंद्र की भाजपा सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिवर्ष 2 करोड़ रोजगार देने की बात कही थी किंतु क्या रोजगार मिला अपितु इसके जवाब में पकौड़ा बेचना भी रोजगार में शामिल है जैसी बात सामने आ गई कांग्रेस ने भी रोजगार की बात कही किंतु वह भी रोजगार देने में फेल हो गई बावजूद इसके अगर बेरोजगारी की बात करें तो केंद्रीय एजेंसी ने भी छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की संख्या काफी कम होने की बात कहीं आज जैसा भी हो छत्तीसगढ़ में बेरोजगारों की संख्या अन्य प्रदेशों के हिसाब से काफी कम है और छत्तीसगढ़ प्रथम स्थान पर है बावजूद इसके बेरोजगारी पर और वादा निभाने पर तंज कसना एवं स्तर हीन शब्दों का इस्तेमाल कर आज डी पुरंदेश्वरी छत्तीसगढ़ के आम जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है राजनीति में हार और जीत लगा ही रहता है किंतु आरोपों की भी एक सीमा होती है किंतु थूकने श्राप देने सिर के हजार टुकडे होने जैसी बात कहकर डी पुरंदेश्वरी ने सिर्फ और सिर्फ छत्तीसगढ़ भाजपा का ही नुकसान किया है और कांग्रेस को आक्रमण करने का मौका दे दिया है इस तरह के बयान से भले ही भाजपा कार्यकर्ता खुश हो जाएं किंतु आम जनता इस तरह की अशोभनीय बयान बाजी को गंभीरता से लेते हैं .छत्तीसगढ़ी ही नहीं भारत की आम जनता सभी बातों को समझती है भले ही कह नहीं पाती किंतु अपना विचार मतदान के मत पेटी में देकर व्यक्त करती है आज छत्तीसगढ़ में जब छत्तीसगढ़िया की बात होती है तब एक दूसरे प्रदेश की नेता द्वारा थूकने , श्राप  देना ,सिर के हजार टुकडे होना जैसे बातों को कर सिर्फ और सिर्फ अपने विचारों को व्यक्त करती है जो कि उनके निजी विचार हो सकते हैं किंतु विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वालों के मुंह से संस्कार की बात करना और इस तरह का बयान देना कहीं से शोभा नहीं देता आज भाजपा का चेहरा और सोच संसकारी पार्टी , हिंदुत्व ,देश भक्ति सुविचार के रूप में परिलक्षित है किंतु ऐसे बयान सिर्फ और सिर्फ भाजपा को ही नुकसान पहुंचा सकते हैं और ऐसे ब्यान बाजी से व्यक्ति की मानसिकता का भी आभास होता है जो आज प्रदेश में सत्ता में नहीं है फिर भी इस तरह की बात कह रही है अगर सत्ता में आ जाये तो फिर ना जाने इससे और क्या बड़ी बड़ी बाते कह सकती है ये तो भगवन ही जाने ...

शौर्यपथ लेख / कभी कभी इंसान की जिन्दगी में कुछ ऐसे पल आ जाते है जो सदैव के लिए यादो में अंकित हो जाति है ऐसी अमिट यादो को कभी भुलाया नहीं जा सकता . वो पल अच्छे भी हो सकते और बुरे भी . किन्तु आज हम जिन पालो की बात कर रहे है वो पल ऐसे है जिसे और सब तो भूल भी जाए कोई कुछ दिनों में कोई कुछ सालो में किन्तु उन पालो को सिर्फ एक ही व्यक्ति है जो कभी नहीं भूल सकता . मनीष पारख दुर्ग शहर के एक सामजिक और व्यावसायिक व्यक्ति है जिन्होंने जमीन से उठ कर आज आसमान की बुलंदियों तक पहुँचने में जो कार्य किया है वो दुर्ग शहर में किसी से छुपा नहीं है सफलता की सीढी चढ़ते हुए सामजिक कार्यो में भी सदा योगदान करना उनकी जिन्दगी में शामिल है . हर क्षेत्र के बारे में बारीकी पकड ही उनकी खासियत है . . इतने सालो की मेहनत के बाद उनके जन्मदिन को यादगार बनाने में जिस जिस ने भी अपनी सहभागिता निभाई वो तो अविस्मरनीय है किन्तु उससे भी बड़ी बात यह है कि उन सभी को ऐसा करने पर अपरोक्ष रूप से अपने कार्यो और सहभागिता के द्वारा प्रेरित करने का श्रेय मनीष पारख को ही जाता है . मनीष पारख जी को शौर्यपथ समाचार पत्र की ओर से जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाये . उनके यादगार जन्मदिन के पल को उन्होंने फेसबुक के माध्यम से जिन शब्दों में पिरोया वो आप सभी सम्मानित पाठको के सामने है  
  25 साल पहले जब मैंने अपना काम चालू किया था कब सोचा नहीं था कि इतना बड़ा काम कर पाऊंगा और इतने लोग मेरे साथ जुड़ जाएंगे बस मेरी एक ही इच्छा थी कि जो भी काम करो इमानदारी से करो और कुछ ऐसा कर सकूं की लोगों के लिए एक एग्जांपल खड़ा कर सकूं जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे बहुत डाउन भी देखा आज से 20 साल पहले जब मैंने एक मोबाइल लिया था तब मेरा एक सपना था की मेरे पास इतने लोग हैं कि मैं फोन करूं और मेरा काम हो जाए और आज मुझे लगता है कि मैं वह कर पाया
   कल जब सुबह में नाश्ता करके उठा और अचानक से लाइफ केयर के पूरे स्टाफ आ गए मैं बहुत आश्चर्यचकित था और बहुत खुशी भी हुई बस रो नहीं पाया मेरे पास शब्द नहीं है कि मैं क्या लिखूं और क्या बोलूं। वह आंटी लोगों का ख़ुशी से झूमना और पूनम और ग्रुप का डांस करना वह निखत हैंड ग्रुप का गाना गाना ?रियली हार्ट टचिंग था । वह सभी स्टाफ का जो डायरेक्टली इनडायरेक्टली इस पूरे प्रोग्राम का हिस्सा थे सब ने बहुत मेहनत की।मैं अपनी खुशी बयान नहीं कर सकता कि कितना अच्छा लगा मुझे और मुझे सबसे ज्यादा इस बात की खुशी थी कि सब लोग मुझे इतना प्यार करते हैं।
अविश एजुकॉम में भी अनएक्सपेक्टेड था बहुत ही अच्छा सेलिब्रेशन किया सब ने मिलकर।
महावीर स्कूल के सभी टीचर से बहुत ही अच्छा सेलिब्रेशन किया जो मेरे लिए अनएक्सपेक्टेड था।
मेरी 25 साल की मेहनत में मुझे अब लगने लगा कि मैं जो प्यार और अपनापन अपने सब साथ ही लोगों से चाहता था वह मुझे मिल रहा है और मैं इसे कभी नहीं भूल सकता इतना प्यार और इतना अपनापन यह प्यार और अपनापन ऐसे ही बनाए रखना लिखना बहुत कुछ चाहता हूं पर शब्द ही नहीं मिल रहे हैं कि मैं कैसे एक्सप्रेस करूं अपनी फीलिंग को।
आज मैं जो कुछ भी कर पा रहा हूं वह लाइफ केयर में हो अविश एडु कॉम में हो या मेरी पर्सनल लाइफ में हो यह सब मेरे साथी मेरे स्टाफ इनकी वजह से ही है क्योंकि सब लोगों का साथ हमेशा रहा है हर वक्त हर पल मुझे आज भी याद है जब पहली बार कंप्यूटर सेंटर मैंने चालू किया था मेरे पास सैलरी देने के पैसे नहीं थे तो स्टाफ ने तीन महीना सैलरी नहीं ली थी और मुझे पूरा सपोर्ट किया था आज जो सेलिब्रेशन आप लोगों ने किया है उसके वीडियोस देख कर बहुत से लोगों के कमेंट से आए और बहुतों ने बोला कि तू बहुत खुशकिस्मत है फिर तुझे ऐसे स्टाफ मिले और वाकई में मैं बहुत खुशकिस्मत हूं की मुझे इतने अच्छे और इतने प्यार करने वाले लोग मिले जिनके लिए मेरे पास कोई शब्द ही नहीं है।
और पूरे स्टाफ को बांधे रखने के पीछे एक लीडर का बहुत बड़ा हाथ होता है और लीडर ही होता है कि जो पूरे स्टाफ को बांध के रखता है लाइफ केयर में आयशा प्रियंका और अविश एडु कॉम मैं नेहा नेहा प्रियो सभी अपना काम बहुत इमानदारी से कर रहे हैं।
   टीम लीडर सभी अच्छे हैं और सभी अपना काम बहुत इमानदारी से कर रहे हैं मैं इतनी बड़ी टीम है कि सबका नाम नहीं लिख पा रहा हूं और आज जब मैं लोगों को बताता हूं कि मेरी इतनी बड़ी टीम है और इतने अलग-अलग फील्ड में काम कर रहे हैं तो लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं कि कैसे इतने अलग-अलग फील्ड को आप मैनेज कर लेते हो मुझे बहुत खुशी होती है की इतने लोगों का परिवार हमारे इस ऑर्गेनाइजेशन की वजह से चल रहा है। एक समय की बात है एक बार मैं बहुत परेशान होकर सोचा कि यार सब काम बंद करते हैं और आराम से घर में बैठेंगे तो नीलेश के एक दोस्त ने एक शब्द बोला कि आप यह मत सोचो कि आप काम करके आराम से बैठोगे आप यह सोचो कि आप के वजह से 300 लोगों का परिवार चल रहा है और आप उनके लिए काम करो वह दिन है और आज का दिन है मैं कभी रुका नहीं मैंने हमेशा सोचा कि मैं अगर कर सकता हूं तो आगे काम करूंगा।
स्पेशल थैंक्स टू आयशा प्रियंका नेहा नेहा , प्रभा मैडम पारस मैडम प्रज्ञा और बाकी सब भी है किस किस का नाम लूं।
अंत मैं यही कहना चाहूंगा की सब लोग पूरी इमानदारी से इसी तरह काम करते रहे और इसी तरह आगे बढ़े मैं हमेशा हर वक्त सबके साथ खड़ा हूं। आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं कि आप लोगों ने इतना समय मेरे लिए निकाला और मेरे बर्थडे को इतना अच्छा बनाया जो मैं कभी भूल नहीं सकता और इतना प्यार बहुत ही किस्मत वालों को नसीब होता है उनमें से मैं एक हूं।
साभार -मनीष पारख के फेसबुक वाल से ...

शौर्यपथ ( व्यंग लेख )। आज के जमाने में हैसियत के एक अलग ही मायने है । किसी की भी हैसियत के हिसाब से ही समाज में उसकी पूछ परख होती है । किंतु आज भी कुछ ऐसे कुंठा जीवी लोग समाज में बहुतेरे पाए जाते हैं जिनकी औकात चवन्नी की भी नही होती किंतु बाते आसमान से भी ऊंची ऐसे कुंठा जीवी को ये भी नही मालूम कि उनकी स्वयं की औकात कितनी धरातल की गहराई में है । ऐसा ही एक वाक्या हाल में ही देखने को मिला । जैसा कि आज कल समाज में बहुतेरे ऐसे व्यक्ति मिल जायेंगे जो पत्रकारिता से जुड़े है कुछ कार्य कर रहे तो बहुतेरे वसूली । पिछले दिनों हमारे मित्र का सामना ऐसे ही पत्रकार से हुआ । मित्र भी पत्रकार और मित्र को औकात दिखाने की बात करने वाला भी पत्रकार । जोश जोश में औकात की बात करने वाले पत्रकार ने एक सभा में मित्र के उपर ये व्यंग कस दिया कि कुछ पेपर की प्रति छापने वाले की क्या औकात बात बड़ी कह दी हमने मित्र की तरफ देखा सोंचा कि मित्र को सबके सामने नीचा दिखाया जा रहा मित्र कितना दुखी हो गया होगा किंतु मित्र के चेहरे में औकात बताने वाले पत्रकार की बात सुनकर गुस्सा या ग्लानि के बजाए मुस्कुराहट देखा तो मन संशय हुआ कि  सभी के सामने हसने का प्रयास किया जा रहा है शायद हम भी कुछ सोच कर चुप रहे ।
  जब एकांत में समय मिला तो हमने मित्र से संशय भरे शब्दों में पूछा कि एक व्यक्ति ने इतनी कड़वी बात कही फिर भी तुम्हारे चेहरे पर मुस्कुराहट ही रही आखिर बात क्या है कौन है वो फलाना पत्रकार जो ऐसे आरोप लगा रहा था और तुम हंस रहे थे ।
  तब मित्र ने जो बात कही उसे सुनकर हमे भी हंसी आ गई । मित्र ने बताया कि वो तथाकथित पत्रकार से क्या बहस करे सारा शहर जानता है कि जिस थाली में खाता उसी में छेद करता कई बार तो व्यापारियों ने इसकी पुलिस में शिकायत की वहा भी बेशर्म माफी मांग कर आ गया । तीन _चार अखबार का पंजीयन करा चुका पर एक दो अंक छापने के बाद टे बोल गया । फर्जी दस्तावेज के सहारे बड़ा पत्रकार बना फिरता है समाज में अकेला घूमता है शेर कहता है अपने आप को पर है तो शेर भी जानवर ही जिसे समाज रूपी शहर में सर्कस में मनोरंजन के लिए ही उपयोग किया जाता है । जिसकी खुद की औकात एक समाचार को सुचारू रूप से चलाने की नही उसकी औकात वाली बात का जवाब देना भी मूर्खता ही है । और इस तरह मैं और मेरा मित्र हंसते हुए घर को निकल गए ।
लेख - शरद पंसारी , प्रधान संपादक शौर्यपथ समाचार पत्र

छत्तीसगढ़ / शौर्यपथ / पेंशन योजना एक ऐसी योजना है जिसके कारण उन कर्मचारियों का परिवार में महत्तव अंतिम साँस तक बरक़रार रहता है जो औलादे अपने माता पिता को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझती है . आज ऐसा कई जगह देखने को मिलता है जहा जो परिवार के बुजुर्ग जब सेवानिवृत होकर घर में अपना समय गुजरते है और सेवानिवृत की एक मुश्त राशि जब उनके बैंक खातो में आती है तो परिवार के अन्य सदस्य तब तक उनके आगे पीछे मंडराते है जब तक उनके बैंक खातो में लाखो रूपये रहते है एक बार ये रूपये उनके कब्जों में गए नहीं कि फिर असली रंग दिखना शुरू हो जाता है तब उम्र के आखिरी पडाव में ऐसे बुजुर्ग परिवार से तो दूर हो ही जाते है साथ ही एक एक रूपये के लिए भी तरसते रहते है . किन्तु पेंशन राशि के महीने दर महीने आने से परिवार के हर सदस्य का प्यार उन पर हमेशा बना रहता है . ऐसा नहीं कि हर बुजुर्ग के साथ यह होता है किन्तु कुछ के साथ ऐसी घटना अक्सर सामने आती रहती है . भूपेश सरकार की इस पेंशन योजना को पुनह लागू करने से कर्मचारियों में जिस तरह की ख़ुशी दिखाई दी उससे तो यह साफ़ है कि आने वाले समय में हर वो पेंशनधारी  अपनी जिन्दगी की आखिरी साँस तक सर उठा कर परिवार के मुखिया के रूप में अपनी जिन्दगी जीता रहेगा और परिवार में कभी तिरस्कार का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योकि किसी ने भी क्या खूब कहा है पैसा भगवान् तो नहीं किन्तु भगवान् से कम भी नहीं . मेरे निजी नजरिये के के अनुसार भूपेश सरकार का यह फैसला कई परिवार को एक सूत्र में बांधे रखने में एक कारगार कदम है जिसकी जितनी भी सराहना कि जाए बहुत ही कम है जैसे सूर्य को रौशनी दिलाने के सामान . भूपेश सरकार के पेंशन स्कीम की पुनः लागू करने पर साधुवाद .
शरद पंसारी
संपादक - दैनिक शौर्यपथ समाचार पत्र 

शौर्यपथ / प्रदीप भोले एक गरीब परिवार का आदमी था।अपनी पत्नीऔर दो बच्चों के साथ मेहनत मजदूरी करके वह परिवार की जिंदगी की गाड़ी जैसे तैसे खींच रहाथा। बरसात के मौसम में लगातार बारिश की वजह से काम पर नहीं जा पाने के कारण घर में राशन पानी का संकट उठ खड़ा हुआ।आर्थिक तंगी से जूझने की नौबत आ गई थी।ऐसे में परिवार चलाने की जिम्मेदारी को निभाने के लिए भोले को खराब मौसम में भी काम पर जाना ही पड़ा।
    तब भोले की पत्नी घर पर गीली लकड़ी सुलगाते हुए चुल्हे पर रोटी पका रही थी।बच्चे भूख से ब्याकुल थे।वे रोटी पकने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे।तवे परअधपकी रोटी को मां ने चिमटे से पकड़कर चूल्हे कीआग में पलट पलट कर सेंकना शुरू किया।तभीभूख कीआग में जलती पेट कीअंतड़ियों को सहलाते हुए बच्चे ने सवाल किया- मां बहुत खराब मौसम है,फिर भी बाबूजी को काम करने क्यों जाना पड़ा?
   बच्चे के सवाल का जवाब देती हुई मां बोली-देखो बेटा,चूल्हे की धधकतीआग में रोटी को पकाने,उसे जलने से बचाने के लिए उलटने पलटने की जवाबदेही चिमटे की ही होती है।पकी हुई रोटी को निकालने के लिए चिमटे को आग मेंअपना मुंह जलाना ही पड़ता है।तुम्हारे बाबूजी भी चिमटे की तरह ही हैं।वेअपनी जिम्मेदारी निभाने निकले हैं।इतना कहते-कहते मां की आंखें धूंए से भर गई थी।
   इसे देखकर बच्चा उठा और मां कीआंखों से बहते आंसू को पोंछते हुए बोला- मां,तुझेऔर बाबूजी को गरम गरम रोटी खिलाने के लिए,बड़ा होकर मैं भी चिमटा ही बनूंगा।बच्चे की बात सुनते ही मां ने झट से रोटी का एक टुकड़ा बच्चे के मुंह में डालाऔर उसे कलेजे से लिपटा लिया।
 विजय मिश्रा 'अमित'
पूर्व अति.महाप्रबंधक(जन.) छग पावर कम्पनी,

  शौर्यपथ / गांव के सामान्य किसानों में प्रदीप भोले की गिनती होती थी।जमीन कम थी मगर उसका हौसला गज़ब का था। थोड़ी सी खेती में कुछअच्छा उपजा लेने की आस लिए बैंक से लोन लेने शहर के बैंक में भोले पहुंचा था।दो तीन महीने तक वह बैंक के चक्कर काट चुका था,पर फायदा ढेले भर का नहीं हुआ था।आखिर में बैंक के बड़े बाबू ने कुछ ले देकर भोले को लोन दिलाना पक्का कर दिया।
               लोन देने के पहले उसके खेत जमीन का प्रत्यक्ष मुआईना करने बड़े बाबू लोन के कागजात लेकर भोले के गांव पहूंचा।वह रात की पार्टी के बहाने भोले के घर रुका।आधी रात तक मुर्गा शराब खाने पीने के बाद मुंह फाड़ते हुए बाबू सोने के लिए पंलग के करीब पहुंचा।पंलंग में मछरदानी नहीं लगा था।इसे देखकर बौखलाए सांड़ की तरह वह भड़क उठाऔर बोला-बिना मच्छरदानी के मैं सो नहीं पाऊंगा।साले मच्छर तो रात भर में मेरे शरीर का पूरा खून चूस डालेंगे।
         बाबू की बातें सुनकर  भोले सकपकाया हुआ दौड़ते गयाऔरअपने बच्चे की खाट पर लगे मछरदानी को निकाल कर बैंक बाबू के पलंग में लगा दिया।बैंक बाबू अपने रूदबे के असर में डुबा बेखबर शीघ्र ही चैन की नींद सो गया।यह सब देखकर भोले का बच्चा पूछ पड़ा- बाबूजी,बैंक बाबू जैसे मच्छर हमें ना चूस सकें इसके लिए कोई मछरदानी नहीं बनी है क्या ? बच्चे के इस प्रश्न से भोले की सोई आत्मा जाग उठी।उसका स्वाभिमान उसे ललकारते हुए धिक्कारने लगा।
        भोले तमतमा उठाऔर सोते हुए बैंक बाबू के पलंग के करीब जा पहुंचा।उसने पलंग में लगे मछरदानी को झटके से निकाल कर वापस अपने बच्चे की पलंग पर लगा दिया।भोले का ऐसा भयानक रूप देखते ही बैंक बाबू सहम गया।थूक निगलते हुए वह उठाऔर साथ में लाए लोन के कागज पर कांपते हाथों से धड़ल्ले से हस्ताक्षर करता चला गया।
    हस्ताक्षर करने के उपरांत वह गिड़गिड़ाते हुए बोला -भोले ,मुझे अभीआधी रात को घर से मत भगाना।इस वक्त शहर जाना माने अपनी जिंदगी को खतरे में डालना है।दया करना मेरे छोटे छोटे बच्चे हैं।भोले ने हंसते हुए कहा-चिंता मत करो साहेब।हम मच्छर नहीं किसान हैं।अपना पेट भरने के लिए हम दूसरों का खून नहीं चूसते,बल्कि दूसरों का पेट पालने के लिएअपना खून-पसीना बहाते हैं। इसीलिए शोषक नहीं पालनहार पोषक कहलाते हैं। भोले की बातें सुनकर बैंक बाबू की आंखें शर्म से झुकी जा रही थीं।
विजय मिश्रा "अमित"
 पूर्व अति महाप्रबंधक (जन.)
छग पावर कम्पनी,