शौर्य की बाते / मेरा बेटा निक्की उसका जन्म दिन १२ अगस्त को और मेरा जन्मदिन १२ अक्तूबर को किन्तु देखिये कैसा योग है बचपन में जो भूल हुई वही भूल जिन्दगी के कुछ साल इतनी ख़ुशी दे गया कि उस भूल को अपना सौभाग्य समझने लगा और आज वही भूल जिन्दगी भर का दर्द बन गयी जिन्दगी का हर गुजरा कल एक दर्द बनकर उभर जाता है . भूल कुछ यु हो गयी थी कि फ़ार्म में १२ अक्तूबर की जगह १२ अगस्त हो गया और इस तरह १२ अगस्त के दिन जन्मदिन सभी शासकीय दस्तावेज में अंकित हो गए और एक दिन ऐसा आया कि वही १२ अगस्त मेरी खुशियों का सबसे बड़ा दिन हो गया जब मेरा लाल १२ अगस्त २००६ को इस दुनिया में कदम रखा तब से १२ अगस्त और १२ अक्तूबर दो दिन अपने जन्मकी खुशिया मनाने लगा किन्तु आज जब भी इस दिन को याद करता हूँ तो १२ अगस्त याद आ जाता है और मेरा लाल फिर से मेरे सामने खडा हो जाता है एक जिन्दा अहसास की तरह . अब तू ही बता ऐ जिन्दगी मै अपने जन्मदिन की खुशिया कैसे मनाऊ क्या खुदगर्ज बन जाऊ और अपने लाल को भूल जाऊ जिसने मुझे १४ साल खुशिया दी साल में दो बार जन्मदिन मनाने का मौका दिया अब क्या साल में दो बार मौत को गले लगाऊ .
मै तो इतना कमजोर हूँ की वो भी नहीं कर सकता तभी तो मेरा लाल मुझसे दूर हुए २० माह हो गए अब भी जी रहा हूँ खूब मजे कर रहा हूँ दिनभर ऐश करता हूँ पाखंडी हूँ मै जो बेटे के लिए रोता हूँ पर उसके पास जाने से डरता हूँ और इंतज़ार करता हूँ कि कोई ले जाए . चलो आज एक कदम तो आगे बढ़ ही गया हूँ बेटे तक जाने के लिए . कहते है ना सबकी जिन्दगी का समय उपर वाले ने तय किया है और सब को बस तय समय के इंतज़ार में दिन काटना है तो बेटा आज मैंने भी अपनी जिन्दगी के एक साल और काट लिए अब तेरे और करीब आ गया हूँ बस तू कही मत जाना बेटा मेरा इंतज़ार करना मेरे लाल फिर हम एक साथ रहेंगे हमेशा हमेशा के लिए कभी दूर नहीं होंगे मम्मी और मै एक साथ आयेंगे रे . तेरी मम्मी की ख़ुशी तो सिर्फ छलावा है तू तो अच्छे से जानता है ना अब सब तेरे ऊपर है कब हमे अपने पास बुलाता है सिद्धि से तो तू बात करता है बेटा हमसे ही नाराज है जब आयेंगे तो फिर बताना तेरी सारी नाराजगी दूर कर देंगे और एक बार फिर १२ अगस्त और १२ अक्तूबर को खुशियों की बारिश होगी बस अब खुशियों के सावन का इंतज़ार है बेटा वो भी जल्दी ही आ जायेगा बस तू धैर्य रखना . लव यु निक्की ..