नई दिल्ली।
भारत–चीन संबंधों में तनाव के दौर के बीच राजनीतिक संवाद की दिशा में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। 12 जनवरी 2026 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय का दौरा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।
चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सन हैयान ने किया
चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CPC के अंतरराष्ट्रीय विभाग (IDCPC) की उप-मंत्री सन हैयान (Sun Haiyan) ने किया। बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग (Xu Feihong) भी उपस्थित रहे। इस मुलाकात को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आई तल्खी के संदर्भ में।
भाजपा की ओर से अरुण सिंह और विजय चौथाईवाले शामिल
भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ाने (Inter-party Communication) के उपायों पर चर्चा की गई।
भाजपा नेताओं ने इसे औपचारिक, संस्थागत और पारदर्शी संवाद बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के बीच बातचीत अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर समझने में सहायक होती है।
RSS और अन्य दलों से भी मुलाकात
अपने भारत दौरे के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से भी मुलाकात की। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद तथा वामपंथी दलों के नेताओं से भी अलग-अलग बैठकें कीं।
कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया ‘दोगलेपन’ का आरोप
इस मुलाकात को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर “दोगलापन” का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर चीन को लेकर सख्त बयान दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी स्तर पर बैठकें की जा रही हैं। कांग्रेस ने बैठक के एजेंडे और चर्चा के बिंदुओं को सार्वजनिक करने की मांग की है।
भाजपा का जवाब
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बैठक किसी गुप्त एजेंडे के तहत नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के बीच सामान्य कूटनीतिक संवाद का हिस्सा थी। पार्टी का कहना है कि संवाद से पीछे हटना समाधान नहीं है और ऐसे संपर्क वैश्विक राजनीति में सामान्य प्रक्रिया हैं।
राजनीतिक और कूटनीतिक मायने
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत–चीन संबंध अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में यह संवाद भविष्य की कूटनीतिक दिशा, राजनीतिक संदेश और आंतरिक राजनीति—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।