
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
दुर्ग | विशेष रिपोर्ट
दुर्ग नगर पालिका निगम एक बार फिर गंभीर आरोपों और प्रशासनिक भेदभाव के सवालों से घिरता नजर आ रहा है। इस बार कटघरे में हैं नगर निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल, जिन पर आरोप है कि वे संवैधानिक पद पर बैठकर चयनात्मक कार्रवाई की नीति अपना रहे हैं—कुछ कर्मचारियों पर लगातार सख्ती, तो कुछ पर रहस्यमयी मेहरबानी।
मामला जुड़ा है लॉलीपॉप विज्ञापन बोर्डों (मध्य मार्ग डिवाइडर में लगाए गए विज्ञापन) के भौतिक सत्यापन में अनियमितताओं से। जिस समय थान सिंह यादव बाजार अधिकारी का प्रभार संभाल रहे थे, उसी दौरान शहरभर में लगे लॉलीपॉप बोर्डों की संख्या और आकार में गंभीर विसंगतियाँ सामने आईं। शिकायत के बाद जांच भी हुई और यह सिद्ध हुआ कि भौतिक सत्यापन में लापरवाही बढ़ती गई।
ठेकेदार से वसूली, अधिकारी पर चुप्पी क्यों?
निगम प्रशासन ने राजस्व हानि की भरपाई के लिए संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया—यानी निगम को हुए नुकसान की वसूली की प्रक्रिया चल पड़ी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि
जिस अधिकारी की निगरानी में यह अनियमितता पनपी, उस पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं?
शिकायतकर्ता को आज तक जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। यह चुप्पी अपने आप में कई संदेश देती है।
दो मापदंड, दो कानून?
इसी निगम में हाल के महीनों में सहायक ग्रेड-3 के एक कर्मचारी पर दो–तीन महीनों के भीतर दर्जन भर से अधिक नोटिस जारी किए गए। मामला जब हाईकोर्ट पहुँचा, तो आयुक्त की कार्यशैली से जुड़ी कई असहज करने वाली बातें सामने आईं—यहाँ तक कि आरोप लगे कि कर्मचारी से घर के लिए गृहस्थी और निजी उपयोग का सामान मंगवाया गया और भेदभावपूर्ण कार्रवाई की गई।
यही नहीं, थान सिंह यादव का नाम इससे पहले भी पार्किंग घोटाले में सामने आ चुका है। पूर्व निगम आयुक्त बर्मन के कार्यकाल में उन पर ₹80,000 की राजस्व क्षति का मामला बना और रिकवरी नोटिस भी जारी हुआ। इसके बावजूद वर्तमान आयुक्त द्वारा उन पर कार्रवाई न होना, निगम प्रशासन की नियत पर सवाल खड़े करता है।
संवैधानिक शक्ति या निजी पसंद?
प्रश्न सीधा है—
क्या आयुक्त सुमित अग्रवाल संवैधानिक पद की शक्तियों का उपयोग निष्पक्ष प्रशासन के लिए कर रहे हैं, या फिर निजी पसंद–नापसंद के आधार पर?
एक तरफ मामूली मामलों में कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ नोटिस, दूसरी तरफ राजस्व में अनियमितता से जुड़े अधिकारी पर कार्रवाई से परहेज—यह विरोधाभास न सिर्फ निगम प्रशासन, बल्कि प्रदेश सरकार के ‘सुशासन’ के दावे को भी आईना दिखाता है।
शहर की बदहाली और ‘लॉलीपॉप’ सवाल
दुर्ग नगर निगम क्षेत्र की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। सड़कें, डिवाइडर, अव्यवस्थित विज्ञापन—सब कुछ सवाल पूछ रहा है। शहरभर में लगे लॉलीपॉप बोर्डों का स्वतंत्र और पारदर्शी भौतिक सत्यापन अब समय की मांग है।
अब फैसला आयुक्त के हाथ
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि
क्या नगर निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल
लॉलीपॉप बोर्डों में हुई अनियमितताओं के लिए तत्कालीन बाजार अधिकारी थान सिंह यादव पर कार्रवाई करेंगे?
या
फिर यह संदेश जाएगा कि निगम में कानून सबके लिए समान नहीं?
दुर्ग की जनता जवाब चाहती है—और जवाब अब कार्रवाई से ही मिलेगा, बयानबाजी से नहीं।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
