मुंबई / शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन ने अपनी निर्णायक ताकत साबित कर दी है। 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुए 29 नगर निगम (महानगर पालिका) चुनावों के नतीजे 16 और 17 जनवरी को सामने आए और परिणामों ने साफ कर दिया कि शहरी महाराष्ट्र पर अब निर्णायक रूप से भगवा छाया हुआ है।
इन चुनावों में महायुति (BJP + एकनाथ शिंदे की शिवसेना + अजित पवार की NCP) ने राज्य के 29 में से 25 नगर निगमों में जीत का दावा करते हुए विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) को करारी शिकस्त दी है।
मुंबई: 30 साल बाद ठाकरे युग का अंत
देश के सबसे बड़े नगर निगम बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में यह चुनाव ऐतिहासिक साबित हुआ।
227 सीटों वाले BMC में
भाजपा–शिंदे शिवसेना गठबंधन: 118 सीटें
भाजपा: 89
शिवसेना (शिंदे): 29
शिवसेना (उद्धव ठाकरे – UBT): 65 सीटें
कांग्रेस: 24 सीटें
इस परिणाम के साथ ही ठाकरे परिवार का करीब तीन दशक पुराना वर्चस्व समाप्त हो गया, जिसे राजनीतिक गलियारों में शहरी महाराष्ट्र की सबसे बड़ी सत्ता परिवर्तन की घटना माना जा रहा है।
पुणे–ठाणे–नागपुर: भाजपा और शिंदे का दबदबा
पुणे महानगर पालिका (PMC):
165 में से 123 सीटें जीतकर भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
ठाणे महानगर पालिका (TMC):
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ में महायुति ने 103 सीटें जीतीं, जिनमें से 75 सीटें अकेले शिवसेना (शिंदे) ने हासिल कीं।
नागपुर महानगर पालिका (NMC):
भाजपा ने 151 में से 97 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी।
अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी महायुति की बढ़त
नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, पनवेल जैसे महत्वपूर्ण शहरी निकायों में भी महायुति ने विपक्ष को पीछे छोड़ते हुए मजबूत बढ़त दर्ज की।
पार्टी-वार कुल सीटें (29 नगर निगम)
भारतीय जनता पार्टी (BJP): ~1,370–1,400 सीटें
शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 397 सीटें
कांग्रेस: 324 सीटें
NCP (अजित पवार): 160 सीटें
शिवसेना (UBT): 153 सीटें
AIMIM (असदुद्दीन ओवैसी): 126 सीटें (विशेषकर छत्रपति संभाजीनगर में प्रभावी प्रदर्शन)
राजनीतिक संदेश साफ
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये नतीजे केवल नगर निगम चुनाव नहीं हैं, बल्कि
BJP की शहरी राजनीति पर मजबूत पकड़,
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की वैधता,
और अजित पवार के साथ बने नए सत्ता समीकरण पर जनता की मुहर माने जा रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे (SS-UBT) और शरद पवार गुट (NCP-SP) के लिए ये नतीजे गंभीर आत्ममंथन का संकेत हैं।
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि
“शहरी महाराष्ट्र में सत्ता का केंद्र अब पूरी तरह महायुति के हाथों में है।”
ये परिणाम न केवल राज्य की नगर सरकारों की दिशा तय करेंगे, बल्कि 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राजनीतिक पटकथा भी यहीं से लिखी जाती दिख रही है।