देहरादून । उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' महा-संवाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली गंभीर संकट से गुजर रही है और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में अब तक करीब 152 पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े मामलों के बावजूद अब तक किसी भी प्रमुख दोषी को सजा क्यों नहीं मिली। उनके अनुसार, इससे युवाओं का परीक्षा प्रणाली और सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है।
'शिक्षा नहीं, वसूली का तंत्र बन गई है व्यवस्था'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय परीक्षा शुल्क के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर छात्रों से इतनी फीस वसूली जा रही है कि उसका आंकड़ा शिक्षा बजट के बराबर पहुंच जाता है। राहुल गांधी ने इसे "एक्सटॉर्शन मॉडल" बताते हुए सरकार पर शिक्षा के व्यावसायीकरण का आरोप लगाया।
'1 प्रतिशत को फायदा, 99 प्रतिशत छात्र परेशान'
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था का लाभ केवल 1 प्रतिशत ऐसे लोगों को मिलता है जो भ्रष्टाचार और पेपर लीक के नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 99 प्रतिशत ईमानदार और मेहनती छात्र इसकी कीमत चुकाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत एक पेपर लीक से बर्बाद हो जाती है, जो युवाओं के साथ बड़ा अन्याय है।
NEET अभ्यर्थियों को दिया भरोसा
नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 24 लाख से अधिक छात्रों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र खुद को अकेला न समझें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष छात्रों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ता रहेगा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाता रहेगा।
'यह राजनीतिक सभा नहीं, छात्रों की आवाज है'
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि 'छात्रों की गूंज' कोई चुनावी या पारंपरिक राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि युवाओं की समस्याओं, संघर्षों और भविष्य पर केंद्रित संवाद है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों की चिंताओं को सुनना और उनके मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना लोकतंत्र की जिम्मेदारी है।
सियासी संदेश भी स्पष्ट
राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर कांग्रेस युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष के हमले आगामी राजनीतिक विमर्श में भी प्रमुख मुद्दा बने रहने की संभावना है।