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नई दिल्ली । देशभर में बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) की 12वीं बैठक नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुई। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, बांध सुरक्षा विशेषज्ञों तथा राज्य बांध सुरक्षा संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया।
बैठक में बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए नियमों की अधिसूचना, तकनीकी दिशानिर्देशों के प्रकाशन और बांध सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तैयारी में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। साथ ही आपातकालीन कार्य योजनाओं (ईएपी), व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन, संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) मैनुअल तथा जोखिम आकलन अध्ययनों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
नए खतरों से निपटने के लिए बनेंगे विशेष नियम
समिति ने जल संरचनाओं के सामने उभर रहे नए खतरों को देखते हुए महत्वपूर्ण बांधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए नए नियम तैयार करने, सुरक्षा जांच चेकलिस्ट में संशोधन करने तथा बांध निर्माण और संशोधन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में बांध सुरक्षा अध्याय को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया।
इसके अलावा जांच, डिजाइन, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों के मान्यता मानकों को तय करने, बांध विफलता रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित करने और विशेषज्ञों के पैनल के गठन पर भी सहमति बनी। समिति ने जोखिम वर्गीकरण, खतरा मूल्यांकन, उपकरण स्थापना, आपातकालीन कार्य योजना और जलाशय संचालन के लिए तकनीकी दिशानिर्देश तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।
आईआईटी और एनआईटी संस्थानों के सहयोग से बढ़ेगी विशेषज्ञता
बैठक में बांध सुरक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन विकसित करने के लिए आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु द्वारा संचालित पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रमों में इंजीनियरों की नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही एनआईटी सूरत, एनआईटी कालीकट, एनआईटी नागपुर, एनआईटी गुवाहाटी और एनआईटी शिलांग को भी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
गाद जमाव और बांध विफलताओं पर विशेष चर्चा
समिति ने जलाशयों में बढ़ती गाद (सिल्टेशन) की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके समाधान के लिए नए नियामकीय प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार किया। बैठक में हाल के वर्षों में हुई कुछ प्रमुख बांध विफलताओं और तकनीकी चुनौतियों पर भी विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिए गए।
इनमें छत्तीसगढ़ के लुटी टैंक और राजाडेरा बांध, सिक्किम के तीस्ता स्टेज-III बांध, पंजाब के माधोपुर बैराज तथा राजस्थान के बीसलपुर बांध में चल रही ड्रेजिंग गतिविधियों से जुड़े तकनीकी अनुभव साझा किए गए।
दिसंबर 2026 तक सुरक्षा ऑडिट और जोखिम मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य
बैठक के समापन पर अध्यक्ष ने सभी राज्यों से आह्वान किया कि वे दिसंबर 2026 तक निर्धारित बांधों की व्यापक सुरक्षा जांच, आपातकालीन कार्य योजनाओं की तैयारी और जोखिम मूल्यांकन अध्ययन जैसे सभी अनिवार्य कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें, ताकि देश के बांधों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके।
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Feb 09, 2021 Rate: 4.00
