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सरकारी अग्रेंजी स्कूल में पढ़ाने का सपना टूट गया

  • devendra yadav birth day

राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ सरकार की उत्कृष्ट अग्रेंजी माध्यम शाला योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले में अब कम से कम एक अग्रेंजी माध्यम स्कूल इस शिक्षा सत्र से आरंभ हो जाएंगा जिसके लिए 40 स्कूलो का नयन किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत अग्रेंजी माध्यम स्कूलों में स्कूल के एक किलोमीटर के परिधी में रहने वाले बच्चों को प्रवेश में प्रथामिकता दिया जाएगा। पहली से लेकर पांचवी तक हिन्दी माध्यम के बच्चे भी प्रवेश ले सकते है जिनका चयन लाॅटरी पद्धती से किया जाएगा और कक्षा छटवी से बारहवी तक के बच्चों का चयन अंको के आधार या परीक्षा परिणाम के आधार में मेरिट सूचि बनाकर प्रवेश दिया जायेगा।
सरकार इस योजना को 1 जुलाई से वर्चुवल कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई प्रारंभ करने जा रही है जिसमें कक्षा प्रथामिक और मिडिल स्कूल के बच्चों को अपने अभिभावको के साथ मिलकर शैक्षणिक गतिविधियां करना अनिवार्य है जो कम से कम एक -दो घंटे का होगा।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पाॅल का कहना है कि सरकारी योजनों का लाभ सभी को मिलना चाहिए लेकिन सरकार में बैठे कुछ जिम्मेदार लोगों के द्वारा योजनों में पानी फेरने का कोई कसर नही छोड़ते है जिसके कारण सरकारी योजनाए कागजों में ही अच्छा लगता है। स्कूल के एक किलोमीटर की परिधी में रहने वाले बच्चों को प्रवेश में प्रथामिकता देने की योजना न्यायसंगत नही है। सरकारी योजना का लाभ सभी बच्चों को मिलना चाहिए पालक अपने बच्चों के लिए परिवहन की सुविधा उपलब्ध करा सकते है और अंको के आधार पर चयन करना घोर अपत्तिजनक है। सभी बच्चों का चयन लाॅटरी पद्धती से किया जाना चाहिए। जिसको लेकर अब एसोसियेशन ने शिक्षा सचिव आलोक शुक्ला को पत्र लिखा कर चयन लाॅटरी पद्धती के माध्यम से करने और एक किलोमीटर की बाध्यता को समाप्त कर सभी बच्चों को प्रवेश देने की मांग किया गया है क्यांकि कई पालक जो अपने बच्चों को अग्रेंजी माध्यम स्कूलों में पढ़ाना चाहते थे लेकिन निजी स्कूलों में अत्याधिक फीस होने के कारण उनका यह सपना पूरा नही हो पा रहा था लेकिन अब सरकार की इस योजना में भी कई पेंच आ जाने के कारण कई बच्चे सरकार की योजना से वंचित रह जाएंगे।

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शौर्यपथ

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