अतुल बरगाह की रिपोर्ट
शौर्यपथ/पंडरिया / पंडरिया शहर का रिश्ता अवैध कारोबार से वर्षो पुराना रहा है किंतु वर्तमान में नगर में जो स्थिति निर्मित हो रही है उसमे पंडरिया पुलिस की संलिप्तता होने की बु पूरे शहर के आबो हवा में फैल चुकी है। पंडरिया शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्र भी अब इस अवैध कारोबार के गिरफ्त में आ चुके है,छोटे बड़े गांवो के साथ शहर में खुले आम अवैध शराब, गांजा, जुआ, सट्टा जैसे अवैध कारोबार आसानी से फल फूल रहा है इन बढ़ते अवैध कारोबार पर नकेल कसने में पंडरिया पुलिस बोनी साबित हो रही है, वहीं छोटे मोटे कार्यवाही करने के बाद अपनी पीठ थपथपाने में कोई कसर नही छोड़ती अगर बात बड़ी कार्यवाही की अजाए तो तौबा करने से भी बाज नही आती शहर में अभी तक जितनी भी बडी कार्यवाही हुई है उसमे हमेशा बाहर की ही पुलिस टीम ही कार्यवाही को अंजाम दी है,वहीं अगर बात करें कबीरधाम जिले में नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक की तो उनका भी डर सिर्फ सोसल मीडिया तक ही सीमित रहा गया है ,जमीनी हकीकत से कोसो दूर हैं पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने जब जिले का पदभार ग्रहण किया था तो अपराधिक गतिविधि के साथ अवैध कारोबार व मादक पदार्थ की खरीदी बिक्री में संलिप्त लोगों में दहशत का माहौल था।साथ ही साथ आम जनता के बीच एक उम्मीद की किरण जागी थी की अब पूरे जिले की कानून व्यवस्था पटरी में आ जाएगी लेकिन अब यह डर सिर्फ सोसल मीडिया पर ही नजर आ रही है,जबकि जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। गांव गांव में अवैध शराब व मादक पदार्थ के साथ जुआ ,सट्टा जैसे अवैध कारोबार के चलते ग्रामीण अंचल के युवा भी इस अवैध कारोबार के मकड़ जाल में फसते जा रहें है।
ऐसा नहीं है की इन अवैध कारोबार की जानकारी पुलिस को नही है सभी अवैध कारोबार की नियत स्थान की पूरी जानकारी के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं करना अपने आप में पुलिस विभाग के ऊपर एक सवालिया निशान लगाता है, कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है की सब जानकारी होने के बाद भी पुलिस विभाग मूक दर्शक बनकर इन अवैध कारोबार को संरक्षण दे रहा है, वहीं नगर व आसपास के व्यापारियों ,ग्रामीणों के साथ रोज मारपीट , वाद विवाद जैसी स्थिति निर्मित हो रही है आखिर इन सब का जिम्मेदार कोन है,यहां प्रश्न यह भी उठता है की क्या पंडरिया पुलिस किसी बड़े घटना का इंतजार कर रही है,अगर ऐसा नही है तो क्यों नगर में अशांति का माहौल पैदा हो रहा है, क्यों यहां रहने वाला चाहे वो आम नागरिक हो या छोटा बड़ा व्यापारी क्यों दहशत की जिंदगी जीने मजबूर है, क्या अब पंडरिया शहर के आम नागरिक ,छोटे बड़े व्यापारी अपनी हस्ती खिलखिलाती जिंदगी नहीं जी सकते क्या उन्हें अब आजीवन डर कर ही अपना व्यापार व्यवसाय चलाना होगा अगर इस हालत को जल्द ही नहीं सुधारा गया तो क्या होगा, शहर में ये हालत पैदा करने का जिम्मेदार कोन होगा।