Google Analytics —— Meta Pixel
March 19, 2026
Hindi Hindi

“मगरमच्छ के आँसू नहीं, अब फैसला चाहिए” — कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट की मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार

  • devendra yadav birth day
नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार को सख्त शब्दों में कटघरे में खड़ा कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कर दिया कि कानून चुप्पी की इजाजत नहीं देता—अब सरकार को फैसला लेना ही होगा।
दो सप्ताह का अल्टीमेटम
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर यह तय करने का निर्देश दिया है कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (मुकदमा चलाने) की मंजूरी दी जाएगी या नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह कोई वैकल्पिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व है।
“पांच महीने से चुप्पी क्यों?”
कोर्ट ने सरकार की देरी पर तीखी नाराजगी जताते हुए याद दिलाया कि विशेष जांच टीम (SIT) ने 19 अगस्त 2025 को ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बावजूद सरकार द्वारा अब तक कोई निर्णय न लेना न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। पीठ की टिप्पणी थी—
“कानून आप पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी डालता है, और आपको फैसला लेना ही होगा।”
माफी पर सख्त रुख
मंत्री विजय शाह द्वारा दी गई माफी को सुप्रीम कोर्ट ने “मगरमच्छ के आँसू” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब माफी मांगने का समय निकल चुका है, और ऐसी टिप्पणियों को केवल औपचारिक खेद से ढका नहीं जा सकता।
जांच का दायरा बढ़ा
सुप्रीम कोर्ट ने SIT को यह भी निर्देश दिया कि जांच के दौरान सामने आई अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियों की अलग से जांच कर रिपोर्ट दाखिल की जाए। यानी मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहेगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद वर्ष 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सामने आया, जब एक सार्वजनिक सभा में मंत्री कुंवर विजय शाह ने सेना की ओर से मीडिया ब्रीफिंग कर रहीं कर्नल सोफिया कुरैशी के लिए “आतंकवादियों की बहन” जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया।
इस पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
व्यापक संदेश
इस पूरे घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट का रुख बेहद स्पष्ट है—
सेना की गरिमा, महिला अधिकारियों का सम्मान और संवैधानिक मर्यादा किसी भी सूरत में राजनीतिक बयानबाज़ी की भेंट नहीं चढ़ाई जा सकती।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि मध्य प्रदेश सरकार दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुरूप साहसिक फैसला लेती है या फिर न्यायपालिका को एक बार फिर हस्तक्षेप करना पड़ता है।

 

Rate this item
(0 votes)

Latest from शौर्यपथ

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)