नरेश देवांगन
जगदलपुर/ शौर्यपथ/ शौर्यपथ ने 13 नवम्बर को समाचार प्रकशित किया कि सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक के शासकीय प्री मेट्रिक बालक छात्रावास भेजी में बच्चों को न तो ठीक से भोजन मिल रहा है और न ही उनकी आवासीय व्यवस्था ठीक ठाक है। बच्चों को मेनू चार्ट के हिसाब से भोजन नहीं दिया जाता है। वही अधीक्षक के द्वारा बच्चों को बाहर से लकड़ी लाने पर रविवार को अंडा कि सब्जी खिलाने कि बात भी कही जाती है। अधीक्षक महीने में दो-तीन दिन ही रहते है। शौर्यपथ अख़बार ने प्रमुखता से खबर को प्रकाशित किया था जिसे जिले के कलेक्टर ने संज्ञान में लेकर तत्काल इसकी जाँच कर कार्यवाही के निर्देश आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को दी है जिस पर विभाग के सहायक आयुक्त ने प्री मैट्रिक बालक छात्रावास के अधीक्षक को कारण बताओं सूचना पत्र जारी किया है। सुचना पत्र में अधीक्षक से संस्था में नियमित रूप से उपस्थित न रहने का, बच्चों के बीमार होने पर उन्हें स्वयं अस्पताल भेजने के बजाय बच्चों द्वारा ही सीआरपीएफ अस्पताल भेजने का कारण, छात्रावास में मीनू का पालन न करने का कारण,रविवार को मांसाहार न खिलाने का कारण, बच्चों को लकड़ी काटने के लिए जंगल भेजने का कारण, 95 स्वीकृत सीटों के विरुद्ध केवल 67 बच्चों की उपस्थिति का कारण, बोरवेल के खराब होने पर इसे ठीक न कराने का कारण 3 कार्यदिवस के भीतर अधीक्षक से जवाब माँगा गया है, सात यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्थारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो अनुशासनात्मक कार्यवाई की जाएगी। अब देखने वाली बात है कि अधीक्षक इस मामले पे जवाब क्या और कब तक देते है?