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किकिरदा में 6 महीने से नक्शा ऑनलाइन नहीं, पटवारी पर किसानों से अवैध वसूली का आरोप, कलेक्टर से की गई शिकायत Featured

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हसौद/रायपुर, 29 जुलाई 2025 | विशेष संवाददाता

छत्तीसगढ़ सरकार भले ही सुशासन और पारदर्शिता की बात कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कुछ और ही है। हसौद तहसील के ग्राम किकिरदा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गरीब किसान बीते छह महीनों से अपनी जमीन का नक्शा ऑनलाइन चढ़वाने के लिए पटवारी के दरवाज़े खटखटा रहा है, पर हर बार उसे टाल दिया गया। किसान का आरोप है कि पटवारी द्वारा जानबूझकर उसे परेशान किया जा रहा है क्योंकि वह ‘चढ़ावा’ नहीं दे पाया।

पटवारी के निजी सहायक के ज़रिए खुलेआम रिश्वत की मांग

किकिरदा निवासी लक्ष्मण केवट ने कलेक्टर को सौंपे अपने शिकायती पत्र में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि उनके खाता क्रमांक 1377 के अंतर्गत खसरा नंबर 309/6 (0.08 डिसमिल) जमीन का नक्शा आज तक ऑनलाइन नहीं चढ़ पाया है। किसान के अनुसार पटवारी छत्रपाल सूर्यवंशी जनवरी 2025 से अब तक केवल टालमटोल करता रहा है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पटवारी ने अपने साथ एक निजी सहायक (मल्दा निवासी) को गैरकानूनी रूप से रखा है, जो खुलेआम किसानों से पैसे मांगता है। किसान का कहना है, "निज सहायक कहता है, पैसा दोगे तो काम होगा, नहीं दोगे तो जहां जाना है चले जाओ।"

गर्मी और बारिश में खेत पर करता रहा इंतजार, लेकिन नहीं हुआ काम

लक्ष्मण ने शिकायत में लिखा है कि वह मजदूरी छोड़कर कई बार पटवारी के बताए दिन खेत पर पहुंचा, लेकिन हर बार उसे सिर्फ यह कहकर लौटा दिया गया कि “अगले हफ्ते नाप कर नक्शा चढ़ा देंगे।” बरसात से पहले बार-बार मिन्नतें की गईं, लेकिन पटवारी पर कोई असर नहीं पड़ा। अंततः 6 महीने बाद भी नक्शा चढ़ाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

क्या सरकार ने पटवारियों को ‘निज सहायक’ रखने की अनुमति दी है?

इस पूरे प्रकरण ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या शासन ने पटवारियों को निजी सहायक रखने और उनके माध्यम से किसानों से पैसा वसूलने की अनुमति दे रखी है? शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पटवारी द्वारा रखा गया व्यक्ति किसी भी कार्य – चाहे वह नामांतरण हो, फौती, बंटवारा, या विक्रय प्रतिवेदन – हर काम के लिए खुलेआम पैसे की मांग करता है। जिन किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, उनका काम महीनों तक लंबित रखा जाता है।

कांग्रेस ने उठाया सवाल, कहा – “भ्रष्टाचार की जड़ पंचायत से शुरू होती है”

इस मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने एक बार फिर राज्य सरकार के “भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन” के दावे को झूठा बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “जब पटवारी स्तर पर ही वसूली हो रही है और गरीब किसान अपनी जमीन का नक्शा चढ़वाने के लिए महीनों भटक रहा है, तो शासन किस मुंह से सुशासन की बात करता है?”

इस मुद्दे को कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर भी उठाना शुरू कर दिया है। ट्विटर और फेसबुक पर हैशटैग #किसान_के_साथ_न्याय ट्रेंड करने लगा है।

प्रशासन से न्याय की गुहार, कलेक्टर से की शिकायत

किसान लक्ष्मण केवट ने अब कलेक्टर से सीधी शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि दोषी पटवारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और निजी सहायक के माध्यम से की जा रही अवैध वसूली पर रोक लगाई जाए। किसान ने लिखा, “मैं गरीब मजदूर हूं, मेरे पास पटवारी को देने के लिए हजारों रुपये नहीं हैं। मुझे न्याय दिलाया जाए।”

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में जब गरीब किसान छह-छह महीने अपनी जमीन के नक्शे के लिए भटकने को मजबूर हो और व्यवस्था में बैठे लोग खुलेआम वसूली करें, तो यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय भी है। यदि ऐसे मामलों में शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो यह लोगों का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठाने के लिए काफी होगा।


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