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"राख में तब्दील हुआ घर, उम्मीद बनकर पहुंचे संत रामपाल महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम"

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0 तीन बच्चों के साथ बेघर हुई मां, संत रामपाल महाराज के अनुयायियों ने बढ़ाया मदद का हाथ

राजनांदगांव /शौर्यपथ / ग्राम–दपका जिला व तहसील–(खैरागढ़-छुईखदान गंदई, छत्तीसगढ़)। ग्राम दपका में रविवार की शाम दर्दनाक हादसा हुआ। स्व. महेश निषाद की पत्नी आशा निषाद का झोपड़ीनुमा घर अचानक आग की चपेट में आ गया। तेज लपटों ने देखते ही देखते पूरे आशियाने को निगल लिया और कुछ ही देर में घर का सारा सामान राख में तब्दील हो गया। घटना के वक्त आशा निषाद अपने मामा के घर गई थी। दोनों बच्चे गांव में ही अपने बड़े पापा के घर में रह रहे थे और लड़के आसपास पड़ोसी के घर में खेलने के लिए गए थे। इस परिवार के मुखिया स्व. महेश निषाद जो कि दो वर्ष पहले भयंकर कैंसर से पीड़ित रहे और आर्थिक तंगी के चलते समय पर इलाज की व्यवस्था न हो पाने की वजह से महेश निषाद का निधन हो गया। परिवार में बच्चों के लालन पालन, देख रेख, पढ़ाई और खानपान की पूरी जिम्मेदारी आशा निषाद के ऊपर आ गई। गरीबी और लाचार स्थिति से जूझ रहे इस परिवार पर विपत्ति की दोहरी मार तब पड़ी जब इनके अरमानों का आशियाना आग की लपेट में आकर राख में बदल गया। अचानक लगी आग से परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घर में रखे कपड़े, बर्तन, अनाज, चावल और अन्य आवश्यक सामान जलकर खाक हो गया। इस घटना में आशा निषाद की बड़ी बेटी भारती (16), बेटा आकाश (12) और छोटी बेटी पायल (10) के साथ पूरा परिवार बेघर हो गया। मजबूरी में यह परिवार अब रिश्तेदारों के घर शरण लिए हुए है। संत रामपाल महाराज बने बेघर का सहारा इस दर्दनाक घटना की सूचना जब संत रामपाल महाराज के अनुयायियों को समाचार माध्यमों से मिली तो वे तुरंत अपने गुरु संत रामपाल महाराज के आदेशों से 10 सितंबर को दपका गांव पहुंचे और सबसे पहले सरपंच एवं पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरी स्थिति का जायजा लिया। अगले ही दिन यानी 11 सितंबर को अनुयायियों ने “अन्नपूर्णा मुहिम” के अंतर्गत राहत सामग्री पीड़ित परिवार तक पहुंचाई। राहत सामग्री में शामिल था— भोजन एवं राशन सामग्री बर्तन (सभी रसोई उपयोग की सामग्री) 2 खाट व गद्दा कपड़े (परिवार के सभी सदस्यों के लिए 2 जोड़ी) बच्चों के लिए जूते शिक्षा सामग्री गैस सिलेंडर व चूल्हा पंखा गांव दपका में आशा निषाद के परिवार की अंधियाली भरी जीवन को नई उम्मीद की किरण संत रामपाल महाराज ने प्रदान की। अनुयायियों द्वारा पहुंचाई गई मदद से आशा निषाद और उनके बच्चों को बड़ी राहत मिली। ग्राम दपका की सरपंच केशरी कमल नेताम ने बताया कि – “इस अन्नपूर्णा मुहिम के द्वारा रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान जैसे जीवन जीने की मूलभूत सुविधा मुहैया कराई जा रही है। यह पहल बहुत सराहनीय है, हमारे समाज को ऐसे संतों की आवश्यकता है, बहुत अच्छी मुहिम संत रामपाल महाराज द्वारा चलाई जा रही है।” राजेन्द्र टंडन उपसरपंच ने अन्नपूर्णा मुहिम और संत रामपाल महाराज की खूब सराहना करते हुए कहा कि इस मुहिम के माध्यम से इन्हें बहुत राहत मिली है। भूतपूर्व सरपंच पति ज्ञानचंद साहू ने बताया कि— “अन्नपूर्णा मुहिम के तहत मेरी सोच से ज्यादा सामग्री दी गई। इस परिवार का घर पूरा जल गया था, कुछ भी नहीं बचा था। ऐसे में यह मुहिम इनके लिए वरदान बनकर आया है।” साथ ही ग्रामीणों और शिक्षकों द्वारा भी मदद दी गई। आज संत रामपाल महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम इस परिवार के लिए भगवान बनकर आई है। संत ने बेटी–बेटों के लिए शिक्षा सामग्री भी दी। गांव और पंचायत की तरफ से संत महाराज को बहुत-बहुत धन्यवाद और आभार। ---

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Mrinendra choubey

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