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मछली पालन में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग: दो वर्षों में उत्पादन 34% बढ़ा, राज्य देश में छठे स्थान पर Featured

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  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य में मत्स्य पालन की अपार संभावनाओं को साकार करने की दिशा में मछली पालन विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की गई हैं। कम लागत, कम समय और अधिक आय देने वाला यह व्यवसाय ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है, जिससे न केवल रोजगार सृजन हो रहा है बल्कि कुपोषण दूर करने में भी सहायता मिल रही है।

पिछले दो वर्षों में मत्स्य पालन हेतु उपलब्ध जलक्षेत्र में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में 2.027 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र की तुलना में यह बढ़कर 2.039 लाख हेक्टेयर हो गया है। उपलब्ध जलक्षेत्र में से वर्ष 2025 तक 97.25 प्रतिशत क्षेत्र को मत्स्य पालन के अंतर्गत लाया जा चुका है, जो जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को दर्शाता है।

राज्य में मछली बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। इन दो वर्षों में 20 नई मत्स्य बीज हैचरी का निर्माण किया गया है। परिणामस्वरूप राज्य में वर्तमान में 583 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राई का उत्पादन हो रहा है, जो वर्ष 2023 की तुलना में 69.4 प्रतिशत अधिक है। मछली बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में छठे स्थान पर पहुँच गया है।

पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ-साथ केज कल्चर, बायोफ्लॉक, आरएएस, एनीकट में संचयन तथा तीव्र बढ़वार वाली प्रजातियों के पालन को बढ़ावा दिया गया है। इन प्रयासों के चलते राज्य का कुल मत्स्य उत्पादन दो वर्षों में 34.10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8.73 लाख टन तक पहुँच गया है। मत्स्य उत्पादन में भी छत्तीसगढ़ देश के शीर्ष छह राज्यों में शामिल हो गया है।

मत्स्य कृषकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। 10 और 3 दिवसीय प्रशिक्षण तथा अन्य राज्यों में अध्ययन भ्रमण के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 17,900 हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं मत्स्य सहकारी समितियों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने हेतु प्रति समिति तीन लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है, जिससे प्रतिवर्ष 226 समितियाँ लाभान्वित हो रही हैं।

मछुआरों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दुर्घटना बीमा योजना का विस्तार किया गया है। वर्ष 2025 में राज्य में 2,20,525 मछुआरों का निःशुल्क दुर्घटना बीमा किया गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसके साथ ही बंद ऋतु के दौरान मछुआरों को बचत सह राहत योजना के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से जलाशयों एवं बंद पड़ी गहरी खदानों में केज कल्चर को प्रोत्साहित किया गया है। इन दो वर्षों में राज्य में 2,577 केज स्थापित किए गए हैं। स्वयं की भूमि में तालाब निर्माण योजना के तहत 946.05 हेक्टेयर नवीन जलक्षेत्र विकसित किया गया है, वहीं 142.84 हेक्टेयर क्षेत्र में संवर्धन पोखरों का निर्माण किया गया है।

स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त और सस्ता मत्स्य आहार उपलब्ध कराने के लिए पाँच फीड मील की स्थापना की गई है। मत्स्य विपणन को सुदृढ़ बनाने हेतु प्रशीतित वाहन, आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिल, थ्री व्हीलर तथा सजीव मछली वेंडिंग के लिए फोर व्हीलर वाहनों का वितरण किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं तक ताजी मछली की पहुँच सुनिश्चित हो रही है।

नवीन तकनीक को अपनाते हुए बायोफ्लॉक पोंड लाइनर, बायोफ्लॉक टैंक तथा रिसरकुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम की स्थापना की गई है। इन दो वर्षों में 497 बायोफ्लॉक पोंड लाइनर, 234 बायोफ्लॉक टैंक और 5 आरएएस यूनिट स्थापित की गई हैं, जिससे कम पानी और कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है।

राज्य की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2024 में कांकेर जिले को “बेस्ट इनलैंड डिस्ट्रिक्ट” का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं वर्ष 2025 में रायपुर के श्री सुखदेव दास और महासमुंद के श्री अब्दुल जमील को बेस्ट फिश फार्मर प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त श्री सुखदेव दास को वर्ष 2025-26 के लिए “श्रीमती बिलासा देवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया है।

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