रायपुर: छत्तीसगढ़ में पारंपरिक भोजन 'बोरे बासी' पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए मजबूरी में खाया जाने वाला भोजन बताया है. उनके इस बयान के बाद, प्रदेश भर में उनकी कड़ी आलोचना हो रही है.
'बोरे बासी' रात के बचे चावल को पानी में भिगोकर बनाया जाने वाला एक पारंपरिक, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन है, जो भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक और पोषण प्रदान करता है. यह नेचुरल प्रोबायोटिक का एक बेहतरीन स्रोत है, जो लू से बचाने, पाचन सुधारने, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है. इसमें विटामिन B12, कैल्शियम, पोटेशियम और आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को आवश्यक ऊर्जा और पोषण देते हैं. यह शरीर में पानी की कमी को भी दूर करता है. इसे सुबह-सुबह दही, अचार, चटनी, हरी मिर्च, प्याज या भाजी के साथ खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.
पूर्वजों ने गर्मी में कई तरह की बीमारियों से बचने के लिए 'बोरे बासी' का सेवन किया जाता था. ऐसे में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा इसे मजबूरी का भोजन कहना, छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पौष्टिक भोजन का अपमान माना जा रहा है. उनके इस बयान की सोशल मीडिया सहित समाज में कड़ी आलोचना हो रही है.
मंत्री गजेंद्र यादव का इस तरह का बयान उनकी अपनी परंपरा और संस्कृति के प्रति उनकी समझ और सम्मान पर सवाल खड़े करता है. 'बोरे बासी' छत्तीसगढ़ की पहचान का एक हिस्सा है और इसे इस तरह से अपमानित करना प्रदेश के लोगों के लिए अस्वीकार्य है. मंत्री यादव को छत्तीसगढ़ की परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए ना कि इसे मजबूरी का भोजन बताना चाहिए