रायपुर / शौर्यपथ / कोविड-19 महामारी के कारण 11 माह से स्कूल बंद है और अचानक 13 फरवरी को राज्य सरकार कैबिनेट की बैठक में 15 फरवरी से कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं आरंभ करने का आदेश जारी कर दिया। शनिवार को निर्णय लिया और सोमवार से स्कूल आरंभ यानि स्कूलों को साफ सफाई और सैनेटाईजेशन करने और अन्य तैयारी करने का कोई अवसर तक नहीं दिया गया।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि सरकार बच्चों के जीवन व भविष्य के प्रति की कितनी चिंतित है यह स्कूल खोलने के आनन-फानन में लिये गये निर्णय से समझा जा सकता है।
अध्यक्ष पॉल का कहना है कि केन्द्र सरकार ने स्कूल पुनः आरंभ करने के लिये दिशा-निर्देश जारी किया है उसका कड़ाई से पालन कैसे होगा, इसका जवाब भी सरकार को देना चाहिए। सरकार के इस निर्णय से सभी वर्ग के लोग विरोध कर रहे है, क्योंकि पहले स्कूलों को साफ सफाई करने और सैनेटाईज करने का पूरा समय दिया जाना था और केन्द्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश का पालन कराने की जिम्मेदारी सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को दिया जाना था और डीईओ से प्राप्त जानकारी के पश्चात् ही स्कूल में पढ़ाई आरंभ किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार प्रायवेट स्कूलों के संचालको के दबाव में आकर यह निर्णय लिया है जो अब सरकार के गले की फांस बनते नजर आ रही है।