रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने ‘सुराजी गांव योजना’ के तहत ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ के संरक्षण और विकास की दिशा में जो कदम बढ़ाए थे, उनसे प्रदेश में ग्रामीण अधोसंरचना तथा आर्थिक, सामाजिक विकास का एक नया आंदोलन खड़ा हो गया है। सूरजपुर तथा बिलासपुर जिले में नरवा विकास के तहत जल संरक्षण और संवर्धन के लिए किए गए कार्यों को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से देश में प्रथम पुरस्कार दिया गया है।
सुश्री उइके ने कहा कि गांव-गांव में गौठानों के विकास और नवाचारी गतिविधियों का व्यापक असर जन-जीवन में हुआ है। ‘गोधन न्याय योजना’ अपने आप में एक अद्वितीय मिसाल बनी है, जिससे 1 लाख 45 हजार से अधिक लोगों को आय का नया जरिया मिला और उनमें भी 41 प्रतिशत भूमिहीन लोग हैं। नगरीय निकायों में भी ‘गोधन न्याय-सह गोबर खरीदी केन्द्रों’ का विकास किया जा रहा है। घुरवा के प्रसंस्करण से खाद निर्माण तथा आय के अन्य साधन विकसित हुए हैं, वहीं बारी से गांवों में न सिर्फ साग-सब्जी का उत्पादन बढ़ा है बल्कि ग्रामीण जनता को कुपोषण से लड़ने का हथियार भी मिला है।
उन्होंने कहा कि मेरी सरकार ने कोरोना काल में लॉकडाउन से प्रभावित बस संचालकों को विभिन्न शुल्कों में राहत दी है। प्रदेश में ‘ड्रायविंग टेªनिंग एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की स्थापना की जा रही है, ताकि प्रदेश में कुशल वाहन चालक उपलब्ध हों तथा सड़क दुर्घटनाओं में अंकुश लगेगा।
राज्यपाल ने कहा कि मेरी सरकार ने ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए सुधार और उपलब्धियों को आम जनता को समर्पित करने की रणनीति अपनाई है, जिससे उत्पादन, पारेषण तथा वितरण के क्षेत्र में कुशल प्रबंधन से विकास भी हुआ और उसका लाभ जनता को प्रत्यक्ष रूप में मिला। ‘हाफ बिजली बिल योजना’ का लाभ 38 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को मिला, सिंचाई पम्पों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय का लाभ साढ़े पांच लाख किसानों तथा निःशुल्क बिजली प्रदाय योजना के तहत 20 लाख गरीब परिवारों को मिला। इस्पात उद्योगों को मंदी से उबारने के लिए ऊर्जा प्रभार ने राहत का लाभ प्रदेश में उत्पादन एवं रोजगार के रूप में मिला। ‘मोर बिजली एप्प’ के माध्यम से उपभोक्ता सेवा को गति मिली। बस्तर में बिजली आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्थाओं के लिए नेटवर्क का विस्तार किया गया है, जिससे अब पूरे प्रदेश में बिजली प्रदाय में आने वाली आकस्मिक बाधा से निपटने का एक मजबूत तंत्र तैयार हो गया है।
उन्होंने कहा कि मेरी सरकार की नई औद्योगिक नीति में पिछड़े क्षेत्रों तथा नए अवसरों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसके तहत सरगुजा तथा बस्तर संभाग ने न्यूनतम भूमि की आवश्यकता में राहत, वनांचल उद्योग पैकेज के तहत स्थायी पूंजी निवेश में अधिक अनुदान, बी-स्पोक पॉलिसी, अनुसूचित जनजाति तथा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज आदि आकर्षक प्रावधान हैं, जिसके कारण दो वर्षों में 1 हजार 207 नए उद्योगों की स्थापना, लगभग 17 हजार करोड़ रुपए का पूंजी निवेश तथा 22 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
सुश्री उइके ने कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति, परंपरा तथा लोक आस्था के स्थलों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में ‘राम वन गमन पर्यटन परिपथ’ के तहत 75 स्थानों में अधोसंरचना विकास, देवगुड़ी विकास, सिरपुर को बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में वैश्विक मान्यता दिलाने जैसे बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। सतरेंगा, सरोधा दादर आदि स्थानों का विकास विशिष्ट पर्यटन केन्द्रों के रूप में किया जा रहा है, जिससे स्थानीय विकास तथा रोजगार के नए-नए अवसर बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मेरी सरकार ने छत्तीसगढ़ के विकास के लिए समग्रता की सोच रखी है, जिससे कोई अंचल तथा कोई व्यक्ति प्रगति के नए सफर में हमराही बनने से छूट न पाए। पिछड़े अंचलों तथा समुदायों के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि उन्हें जल्दी से जल्दी बराबरी पर लाया जा सके।