Print this page

जीवन में बुराई को त्याग कर सच्चाई की तरफ बढ़ने की ले प्रेरणा : ओमप्रकाश ठाकुर

  • doing of business

नवागढ़ / शौर्यपथ / ग्राम पंचायत खेड़ा सम्बलपुर में 18 से 27 फरवरी तक श्रीराम चरित मानस परायण महायज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें मंगलवार को प्रवचनकर्ता ओमप्रकाश ठाकुर झिलियापुर वाले ने लंका दहन, लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ वध और रावण वध की लीला सुनाई। कथावाचक श्री ठाकुर ने राम भक्त हनुमान के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान से भक्त बड़ा होता है। हनुमानजी महान योद्धा के साथ-साथ ज्ञानी भी थे और अपनी चतुराई के साथ रावण की लंका दहन कर यह अवगत करा दिया था कि जिनका वक्त इतना बलशाली है तो उनसे आप किसी तरीके से पार नहीं पा सकते हैं और आप सीता माता को वापस कर अपनी गलती की माफी मांग लें, लेकिन अपनी राक्षसी प्रवृत्ति के कारण उसने माफी मांगने से इनकार कर दिया।
भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम ने समुद्र पर पुल बांधकर लंका में प्रवेश किया। उधर रावण के भाई विभीषण ने भी समझाने का प्रयास किया तो लात मारकर घर से निकाल दिया और विभीषण राम की शरण में पहुंच जाता है। राम विभीषण का राजतिलक कर लंका का राजा बना देते हैं। यह बात जब रावण को पता चलती है तो वह बहुत क्रोधित होता है और बदला लेने को ठान लेता है। रावण, शंकरजी का अपार भक्त था उसने अपने शीश काट कर शंकर जी पर चढ़ाए और प्रसन्न कर वरदान प्राप्त किया था। रावण राम के युद्ध वर्णन बहुत ही मार्मिक ढंग से सुना कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि अत्याचारी का अंत बुरा होता है। रावण के एकलाख पुत्र और सवा लाख नाती थे, उनका भी अंत अत्याचारी की वजह से हुआ। इसलिए संकल्प लें और घर में रामचरितमानस की कम से कम पांच चौपाई जरूर पढ़े। जीवन में बुराई को त्याग कर सच्चाई की तरफ बढ़ने की प्रेरणा लें। साथ ही उन्होंने ने गायत्री परिवार द्वारा संचालित हर हर गंगे,घर घर गंगे कार्यक्रम से भी लोगो को जुड़ने का आह्वान किया। ततपश्चात पं आलोक मिश्रा कानपुर उत्तरप्रदेश ने भी प्रवचन दिया।
पंडाल में पं नारायण तिवारी, सुरेश शास्त्री, गुलाबधर तिवारी,कौशलेंद्र तिवारी,बीके वर्मा, मिलाप राम साहू, ओमप्रकाश वर्मा, नागेंद्र शर्मा, कंवल प्रसाद वर्मा, प्रह्लाद राजपूत, जोहितराम साहू, सरपंच सन्तोषी भूषण वर्मा, भिनेश्वरी देवेंद्र वर्मा, मधुबन सिंह वर्मा, सुरेंद्र सिंह राजपूत, सालिकराम सहित भक्तजन उपस्थित रहे।

Rate this item
(0 votes)
शौर्यपथ

Latest from शौर्यपथ