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नवरात्र पर घर ही करनी होगी आराधना, सुने रहेंगे मंदिर के द्वार

  • rounak group

नवागढ़ / शौर्यपथ / चैत्र नवरात्र की शुरुआत आज से होगी। पिछली बार की तरह इस बार भी कोरोना के साये में इसका आयोजन होगा। पिछली बार लॉकडाउन के चलते मंदिर पूरी तरह से बंद थे। लोगों ने घरों में पूजा की थी। इस बार प्रसाशन ने बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मंदिरों को बंद रखने का आदेश दिया है। इस कारण इस बार भी लोगों को घर में ही पूजा करनी होगी। नवागढ़ के मन्दिरों में भी इस बार सादगी तरीके से पूजा का आयोजन कर रहे हैं। पहले की तरह ना तो लाइटिग और ना ही पंडाल लगाए जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मन्दिर के पुजारी सभी जरूरी पूजा काम को निपटा रहे हैं।
नवागढ़ प्राचीन काल से ही राजवंश के जमाने से देवी मन्दिरों का केंद्र रहा है. यहाँ की माँ महामाया, शारदा, शक्ति माता आदि का मन्दिर अपनी मान्यताओ को लेकर पुरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है. इस बार भक्त तो मन्दिर नही जा सकेंगे लेकिन हम आपतक नवागढ़ के देवी मन्दिरों का इतिहास पहुचाने की कोशिश कर रहे है.
1. माँ महामाया मन्दिर – राजा नरवरसाय शक्ति के उपासक थे, उन्होंने अपने किले के भीतर मां महामार्इ की मूर्ति स्थापित कर एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराया था, जो आज उनके धार्मिक आस्था के रूप में नवागढ़ का मुख्य शक्ति आराधना केन्द्र है । कहा जाता है कि कलचूरी राजाओं की कुलदेवी मां महामाया देवी थी, अत: तांत्रिक विद्या के लिए इन्हें सर्वप्रथम प्रतिस्थित किया गया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार अब तक 25 बार हो चुका है। 25वां जीर्णोद्धार का कार्य सोनराज जैन द्वारा सन 1964 में कराया गया ।मुख्य मंदिर के निकट गायत्री माता, शीतला माता, दुर्गा माता सहित अन्य देवी देवताओं की मंदिर स्थापित है। मां महामाया देवी का उल्लेख दुर्गा सप्तसती नामक पुराण में मिलता है वर्तमान में यहाँ शासन द्वारा पर्यटन स्थल बनाने हेतु निर्माण कार्य चल रहा है। इसका संरक्षण श्री शमी गणेश महामाया शारदा पर्यटन समिति कर रही है.
2. माँ शारदा मंदिर - सऩ 1973-74 में शारदीय नवरात्रि के समय एक भक्त विष्णु प्रसाद मिश्रा के अंदर मां शारदा की शक्ति आई, तब वे मन्दिर की जगह पर उपासना के लिए बैठ गए। तब ग्रामवासी सलाह व चंदा वसूली कर मंदिर का निर्माण किये। माँ शारदा की मूर्ति जयपुर से खरीद कर लाया गया. आज मां शारदा का मंदिर आस्था और उपासना का केन्द्र है । जिस स्थान पर मां शारदा का मंदिर बना है, मूर्ति विराजमान है वहां लगभग समान्य धरातल से 200 फीट का उंचा टीला था, जहां राजा के विशेष सैनिक बैठ कर पहरा देते हुए रक्षा करते थें.
3.माँ शक्ति मंदिर - मंदिर के पुजारी के अनुसार जयंत व दिलीप आचार्य जो महाराष्ट्र निवासी थे, मन्दिर के स्थान पर पति के वियोग में उनके परिवार की स्त्रियां सती हुई थी। उसी के यादगार में यहाँ मूर्ति की स्थापना की गयी थी. कालांतर में इसका नाम सती मंदिर से शक्ति मंदिर पड़ गया। सन 1989 में मात्र एक ज्योति प्रज्वलित होकर अब सैकड़ो ज्योति नवरात्री पर्व में प्रज्वलित होते है।
4. माँ महालक्ष्मी मंदिर - मंदिर के निकट अभी जहाँ कुआँ है, वही से महालक्ष्मी की मूर्ति को 200 वर्ष पूर्व जमीन से खोदकर निकाला गया था। मान्यता अनुसार नवागढ़ के एक ब्राह्मण ने 9 दिनों तक देवी की आराधना की। 9वे दिन माँ ने स्वप्न दिया कि मेरी छोटी बहन तुम्हारे नवागढ़ में जमीन के नीचे मूर्ति दबी है, मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाओ, तो तुम्हारे घर मे 5 संताने होंगी। ब्राह्मण ने गस्ती पेड़ के नीचे जमीन की खुदाई की, वहाँ मूर्ति प्राप्त हुई जिसकी विधिवत स्थापना की गयी.

“ देवी मंदिर में दर्शन एवं नवरात्र में पूजा से वंचित रहे लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। देवी दर्शन नहीं करने वाले भक्त आगामी नवरात्र में भी अपनी मनोकामना के साथ देवी की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। चैत्र नवरात्र लोगों को अपने घरों से ही मनाना चाहिए और देश को महामारी से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग करना चाहिए।’’
विकास धर दीवान (अध्यक्ष, श्री शमी गणेश महामाया शारदा पर्यटन समिति नवागढ़.)

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