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विभाग नहीं कर रहा काम, शायद इसलिए बिक रहा बिना एक्सपायर बिना कंपनी लिखा सामान?

  • devendra yadav birth day

नरेश देवांगन कि खास रिपोर्ट 

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले के शहरी क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अमानक और मिस ब्रांडेड खाद्य सामाग्री बेची जा रही है। पैक बंद कई ऐसे उत्पाद हैं जिस पर न तो कंपनी का नाम है और न ही एक्सपायरी डेट लिखी हुई है। बिना नियम कानून के गली गूंचों से लेकर हाइवे तक पर बेची जा रही खाद्य सामाग्री जो की जानलेवा साबित हो सकती है। जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मैदानी अमले द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से यह सामग्री धड़ल्ले से बिक रही है। ताज़ा मामला ग्राम आड़ावाल का है जहा होटलों सहित किराना स्टोर मे विभाग की लापरवाही से दही पनीर लस्सी पर बिना उत्पाद थिति बिना एक्सपायरी के सामान बिक रही है, विभाग की लापरवाही की वजह से संचालक बिना किसी डर के खाने पिने का सामान धड़ल्ले बेच रहे है। जो कि जानलेवा साबित हो सकते हैं। वही आस पास के दुकानों मे बिना बैच नंबर का सामान कम लागत में मुनाफे का धंधा दुकानों पर बिक रहा बिना बैच नंबर और एक्सपायरी का सामान कम लागत में मुनाफे का धंधा है। इस कारण दुकानदार नमकीन के पैकेट कंपनी या फेरी वालों से खरीददे है जिससे दुकानदार को कम लागत में ही दोगुना मुनाफा हो जाता है। मुनाफा की लालच मे लोगों की सेहत से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। जबकि विभाग के जानकारों का कहना है की खाद्य एवं औषधि विभाग के मानक के अनुरूप इन पर बैच नंबर, मैन्युफेक्चिरिंग डेट और एक्सपायरी के साथ प्राइस लिखना आवश्यक होता है। लेकिन प्रशासन द्वारा भी इन कारोबारियों की सुध नहीं ली जा रही जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।

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Naresh Dewangan

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