By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ । न्यू बस स्टैंड पर महापौर की तस्वीर को लेकर "शौर्यपथ" में प्रमुखता से प्रकाशित खबर का असर तुरंत देखने को मिला। खबर सामने आने के बाद निगम स्तर पर संज्ञान लिया गया और बस स्टैंड परिसर में लगे पोस्टर से पूर्व महापौर का फोटो हटा दिया गया।
अख़बार के माध्यम से उठे सवाल ने उस स्थिति की ओर ध्यान खींचा, जहां अन्य नेताओं की तस्वीरें तो समय के साथ बदली जा चुकी थीं, लेकिन महापौर की तस्वीर अपडेट होना जैसे यादों के भरोसे छोड़ दिया गया था। सवाल सामने आते ही तस्वीर हटाई गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सुधार की ज़रूरत पहले से थी, बस उसे रेखांकित किया जाना बाकी था।
यह संयोग ही कहा जाएगा कि जो बात लंबे समय तक नजरअंदाज होती रही, वह खबर प्रकाशित होते ही स्मरण में आ गई। कार्रवाई की गति ने यह भी दिखा दिया कि जब मुद्दा प्रमुखता से सामने आता है, तो समाधान में देर नहीं लगती।
फिलहाल, इस त्वरित सुधार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक स्थलों पर लगी तस्वीरें केवल सजावट नहीं होतीं, बल्कि वे व्यवस्था की सजगता और सतर्कता का भी संकेत देती हैं। जनहित से जुड़े विषयों को जब जिम्मेदारी से उजागर किया जाता है, तो व्यवस्था भी उसी जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया देती है।