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विभाग की मंत्री महिला सचिव महिला किंतु यहां शोषण भी महिलाओं का

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बिलासपुर / शौर्यपथ / राज्य सरकार के जिस विभाग के पास आधा समाज और पूरे शिशुओं के कल्याण की जिम्मेदारी है उस विभाग की कैबिनेट मंत्री और संसदीय सचिव दोनों महिलाएं हैं इसके बावजूद बिलासपुर महिला एवं बाल विकास विभाग में संविधान के प्रावधानों का, एक्ट का खुला उल्लंघन होता है। ऐसे में जनता तो यही मानती है की भ्रष्ट अधिकारियों को मंत्री और संसदीय सचिव से संरक्षण प्राप्त है। बिलासपुर महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी काफी वर्षों से पदस्थ हैं पहले फूल की आराधना और अब पंजे का साथ इनकी माया निराली है।
जब बिलासपुर और मुंगेली एक साथ थे तब भी इनके कार्यकलाप सुदूर तक सुनाई देते थे। अभी भी यह अधिकारी 71 रेडी टू ईट का मालिक है। कहने वाले यहां तक दावा करते हैं कि कलेक्टर और कमिश्नर को यह अधिकारी अपनी जेब में रखता है यहां से न केवल कमीशन की नदियां बहती हैं बल्कि कुछ ऐसी सुविधाएं भी निकलने की खबर है जो किसी भी समाज के लिए शर्मनाक है। वर्ष 2020 में जब सरकंडा क्षेत्र स्थित उज्वला होम का कांड उजागर हुआ तब भी दबी जुबान से महिला आयोग की पत्रकार वार्ता में कई आरोप लगे उस समय तो एक आरोप यह भी था कि उज्जवला होम के कांड को पुलिस के ही कुछ अधिकारी कर्मचारी दबाने में लगे हैं तब भी महिला आयोग की अध्यक्ष बार-बार प्रश्नों के जवाब में यही उत्तर देती थी कौन अधिकारी उत्तरदाई है खुलकर नाम बताएं किंतु अधिकारियों की दहशत कुछ इस कदर है कि सब कोई नाम जानने के बावजूद नाम लेना नहीं चाहता है।
तब से लगभग 1 वर्ष बीत चुका इस विभाग की बिलासपुर जिले में समीक्षा बैठक नहीं होती, कोरोना तो बहाना है इसके पूर्व भी ढाई वर्षो में जब कभी भी महिला बाल विकास मंत्री बिलासपुर आई तो उनका कार्यक्रम विभागीय योजनाओं की समीक्षा से हटकर उद्घाटन और सम्मान समारोह रहता है। ऐसे में पीड़ित कर्मचारी और योजना के हितग्राही अपनी बात कहां रखें जनदर्शन पूर्व में एक ऐसा मंच था जहां पर आम फरियादी अपने आवेदन पत्र लेकर उपस्थित हो जाते थे किंतु कोरोना ने आम नागरिकों का वह लॉलीपॉप भी छीन लिया।

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