
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
करोड़ों के कामों में बार-बार एक ही समूह की हिस्सेदारी पर उठे सवाल, दूसरे ठेकेदारों की कड़ी जांच तो आरबीएस के कामों पर निगम की खामोशी क्यों?
दुर्ग। नगर निगम में निर्माण कार्यों को लेकर महापौर अलका बाघमार लगातार सक्रिय नजर आ रही हैं। कहीं सड़क और पेवर ब्लॉक के निर्माण में बेस की जांच हो रही है तो कहीं निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को डांट-फटकार लगाई जा रही है। लेकिन इसी बीच निगम में काम पाने वाले आरबीएस ग्रुप को लेकर ठेकेदारों और निगम से जुड़े लोगों के बीच कई सवाल चर्चा में हैं।
चर्चा का मुख्य विषय यह है कि महापौर अलका बाघमार के कार्यकाल में आरबीएस ग्रुप को नगर निगम के निर्माण कार्यों में लगातार काम मिलने की स्थिति क्यों बनी? निगम की निविदा प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद यदि अन्य ठेकेदार दस्तावेजी जांच में अपात्र होते हैं और किसी विशेष समूह को लगातार काम मिलता है, तो इसकी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक जांच के दायरे में क्यों नहीं लाई जानी चाहिए?
तीन-चार करोड़ के काम में आधे काम का दावा—क्या है वास्तविकता?
निगम से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह चर्चा सामने आ रही है कि यदि किसी अवधि में लगभग तीन से चार करोड़ रुपये के निर्माण कार्य निकलते हैं तो उनमें बड़ी हिस्सेदारी आरबीएस ग्रुप को मिल रही है। हालांकि इस दावे की वास्तविकता निगम के टेंडर रिकॉर्ड, वर्क ऑर्डर और भुगतान विवरण से ही स्पष्ट हो सकती है।
यदि आंकड़े इस दावे की पुष्टि करते हैं तो सवाल केवल आरबीएस ग्रुप को काम मिलने का नहीं, बल्कि यह भी होगा कि अन्य वर्षों से निगम में काम कर रहे अनुभवी ठेकेदारों को समान अवसर मिल रहा है या नहीं।
पोस्टरबाजी और ठेकेदारी का संयोग बना चर्चा का विषय
महापौर अलका बाघमार के जन्मदिन के दौरान शहर में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए बधाई पोस्टरों ने भी निगम की ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर चर्चाओं को जन्म दिया। जनप्रतिनिधि को जन्मदिन की शुभकामना देना अपने आप में कोई गलत बात नहीं है, लेकिन यदि उसी अवधि में संबंधित ठेकेदारों को बड़ी संख्या में निगम के काम मिलते हैं तो क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है?
इसका जवाब आरोपों या चर्चाओं से नहीं, बल्कि निगम के निविदा रिकॉर्ड और ठेकेदारवार कार्य आवंटन के आंकड़ों से मिल सकता है।
वार्ड 17-18 की नाली ने खड़ा किया गुणवत्ता का बड़ा सवाल
सबसे गंभीर सवाल वार्ड क्रमांक 17-18 में हुए नाली निर्माण को लेकर सामने आ रहा है। आरोप है कि निर्माण में सरिया निर्धारित मानक के अनुरूप लगभग 8 इंच की दूरी पर लगाए जाने के बजाय करीब एक फीट की दूरी पर लगाया गया।
यदि निर्माण स्वीकृत तकनीकी मापदंडों के विपरीत हुआ है तो इसकी तकनीकी जांच होना आवश्यक है। खासकर तब, जब महापौर स्वयं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच को लेकर सक्रिय दिखाई देती हैं।
अब सवाल यह है कि क्या इस नाली के निर्माण की तकनीकी जांच, माप पुस्तिका (MB), स्वीकृत ड्राइंग, एस्टीमेट और भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी? क्या आवश्यकता पड़ने पर निर्माण को खोलकर वास्तविक स्थिति की जांच होगी?
दूसरों के काम में सख्ती, आरबीएस के काम में भी वही पैमाना लागू होगा?
महापौर द्वारा पेवर ब्लॉक के नीचे बेस की जांच करना और निर्माण गुणवत्ता को लेकर ठेकेदारों को जवाबदेह बनाना स्वागत योग्य प्रशासनिक कदम हो सकता है। लेकिन इसी कसौटी को निगम के प्रत्येक ठेकेदार और प्रत्येक निर्माण पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
यही वह बिंदु है जहां आरबीएस ग्रुप से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर सवाल खड़ा होता है—क्या निगम प्रशासन आरबीएस के कार्यों की भी उसी कठोरता से जांच करेगा, जिस तरह अन्य ठेकेदारों के कार्यों की जांच की जा रही है?
कसारीडीह नाला और सुराना कॉलेज का पाथवे भी सवालों में
दुर्ग शहर में निर्माण कार्यों की संख्या भले ही बढ़ती दिखाई दे रही हो, लेकिन कई पुराने काम अब भी अधूरे हैं। कसारीडीह का नाला लंबे समय से पूर्णता की प्रतीक्षा में है। वहीं वर्ष 2024 में सुराना कॉलेज के सामने पाथवे पार्क का निर्माण जोर-शोर से शुरू हुआ था, लेकिन उसके पूर्ण होने को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
दूसरी ओर शहर की कई सड़कों पर गड्ढे अब भी नागरिकों के लिए परेशानी का कारण हैं। ऐसे में केवल नए निर्माणों की संख्या नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और पूर्णता भी निगम की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण पैमाना होना चाहिए।
अब सवाल महापौर से नहीं, व्यवस्था की पारदर्शिता से है
नगर निगम में ठेकेदारी व्यवस्था पारदर्शी है तो फिर ठेकेदारवार कितने काम मिले, कितनी राशि के मिले, कितने काम पूरे हुए और कितने कार्यों में गुणवत्ता संबंधी शिकायतें आईं—इनका पूरा विवरण सार्वजनिक करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
यदि आरबीएस ग्रुप को लगातार काम मिलना पूरी तरह निविदा नियमों और तकनीकी पात्रता के आधार पर हुआ है तो दस्तावेज स्वयं सारी चर्चाओं का जवाब दे सकते हैं।
और यदि किसी निर्माण में वास्तव में तकनीकी मानकों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारी, इंजीनियर और ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होना चाहिए।
जनता का सवाल सीधा है—निगम की जांच व्यवस्था क्या सभी ठेकेदारों के लिए समान है?
क्या पोस्टर लगाने वाला ठेकेदार हो या पोस्टर से दूरी रखने वाला—दोनों के निर्माण कार्यों की जांच एक ही पैमाने से होगी?
अब वार्ड 17-18 की नाली से लेकर आरबीएस ग्रुप को मिले कार्यों तक, निष्पक्ष तकनीकी जांच ही तय करेगी कि चर्चाओं में कितना तथ्य है और कितना भ्रम।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
