बिलासपुर / शौर्यपथ / 2020 माह अक्टुबर में जिस तरह से मरवाही उपचुनाव में नामांकन स्क्रुटनी के बाद जिस तरह से उपचुनाव में प्रत्याशी अमित जोगी, ऋचा जोगी के नामाकंन पत्र को अमान्य हुए उससे यह सवाल उठता है कि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जिसे सामान्य शब्दों में जेसीसीजे कहा जाता है के कार्यकर्ता और समर्थकों की का पुरा दल लूट लिया गया। उसका नेतृत्व करा क्या रहा था। पार्टी के इस तरह से बिखर जाने के लिए उत्तरदायी कौन है। नामाकंन पत्र निरस्त हो जाने के बाद भी पार्टी की ओर से अधिकृत ब्यान ना आना किस ओर संकेत करता है।
कांग्रेस के कुछ नेता जिस तरह से जोगी और भाजपा के बीच मित्रता की कहानी बताते है वैसे ही कुछ दुर्भीसंधी के संकेत तो कांग्रेस और जोगी के बीच भी दिखाई देती। किन्तु इन संकेतो को ना तो कोई देख रहा है और यदि कोई देख भी रहा है तो लिख नही रहा है। नामांकन निरस्त होंगे इसकी पठकथा पूर्व में ही लिखि जा चुकी थी। ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र जो अब निलंबित है उसका आवेदन आॅनलाईन भरा गया और प्रमाण पत्र भी आॅनलाईन ही डाउनलोड हुआ है। जो लोग दो दिन प्रमाणपत्र कैसे बन गया प्रश्न करते है, उन्हें यह पता होना चाहिए की जाति प्रमाणपत्र 12 घंटे में भी बन जाता है। जेसीसीजे के नेतृत्व को प्रशासनिक गतिविधिया और उनके द्वारा लिए जाने वाले निणर्य का पूर्व आभास था। तभी तो वे न्यायालय की शरण में जाने की बात करते थे, किन्तु जाते नही थे। मरवाही के निर्वाचन अधिकारी के कक्ष में जेसीसीजे प्रत्याशी की ओर से जो विधि विशेषज्ञ खड़े होते थे।
याद करें जब मरवाही का नामाकंन बिलासपुर जिले के निर्वाचन अधिकारी के कक्ष में जमा होता था, तब विधि विशेषज्ञ कौन होते थे। जोगी-जोगी एंड जोगी के नामाकंन पत्रों पर जो लोग वर्ष 2020 में आपत्ती कर रहे थे वे ही लोग पिछले दो आम सभा चुनाव में आपत्ती करते थे, और प्रत्याशी के और से जवाब देने का काम कौन करता था? वे चेहरे याद होंगे। राज्य की जिस राजनैतिक परिस्थिति में जेसीसीजे का निर्माण हुआ और जिस तरह से कार्यकर्ता तथा नेता जुड़े उनमे से कुछ ने तो अपनी वापसी विधानसभा चुनाव की आहट शुरू होते ही कर दी थी। ऐसे लोग वापसी कारण व्यक्तिवादी राजनीति बताते है। चुनाव के परिणामों में जेसीसीजे को पांच विधायक का आकड़ा प्राप्त था। यहां तक की जोगी जी के कुशन नेतृत्व के कारण कांग्रेस को कोटा जैसी परंपरागत सीट पर भी मात मिली। किन्तु कभी भी ऐसा नही हुआ की सार्वजनिक रूप से पांचो विधायक मरवाही में एक साथ आए है।
जबकि मरवाही से ही जेसीसीजे का जन्म हुआ। अजीत जोगी के गुजर जाने के बाद जिस तरह से जेसीसीजे का कारवां लुटा है, उससे पार्टी के नेतृत्व की क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है आखिरकार एक मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल का ऐसा बिखराव इस तरह हो जाए और उस चुनाव चिन्ह पर जीते हुउ विधायक खामोशी रहे। इससे दुर्भीसंधी का संकेत तो जाता ही है।