बिलासपुर / शौर्यपथ / पुरातत्व अधिकारी भर्ती में मेरिट सूची में पहला स्थान हासिल करने के बावजूद करीब तीन साल तक नियुक्ति नहीं मिलने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। कांकेर जिले के गोविंदपुर निवासी हैग्रिव परिहार की याचिका पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि जब अभ्यर्थी के दस्तावेज सही पाए गए हों और उसके खिलाफ कोई शिकायत न हो, तो अन्य उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच के कारण उसकी नियुक्ति अनिश्चितकाल तक नहीं रोकी जा सकती।
मेरिट में पहला स्थान, फिर भी नियुक्ति का इंतजार
पुरातत्व अधिकारी पद के लिए 31 मई 2023 को जारी विज्ञापन के आधार पर हैग्रिव परिहार ने आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया के बाद 17 अगस्त 2023 को जारी मेरिट सूची में उन्होंने पहला स्थान हासिल किया। दस्तावेज सत्यापन के बाद पुरातत्व एवं संग्रहालय संचालनालय ने 9 अक्टूबर 2023 को उनकी नियुक्ति का आदेश जारी करने की अनुशंसा भी कर दी। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
दूसरे अभ्यर्थियों की जांच में अटकी प्रक्रिया
भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। राज्य सरकार ने इन शिकायतों की जांच कराई, जो 4 जून 2024 को पूरी हुई। इस दौरान नियुक्तियां नहीं हो सकीं। सरकार ने मेरिट सूची की वैधता बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से अनुरोध किया, लेकिन वर्ष 2014 के प्रक्रिया नियमों के तहत सूची की एक वर्ष की वैधता बढ़ाने की अनुमति नहीं मिली। परिणामस्वरूप मेरिट सूची की अवधि समाप्त हो गई।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: अभ्यर्थी को क्यों मिले देरी के परिणाम?
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उनके दस्तावेजों में कोई कमी नहीं थी और न ही उनके खिलाफ कोई शिकायत थी। इसके बावजूद दूसरे अभ्यर्थियों की जांच के कारण उनकी नियुक्ति रोक दी गई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने माना कि नियुक्ति में हुई देरी के लिए याचिकाकर्ता जिम्मेदार नहीं थे। दूसरे उम्मीदवारों की जांच और मेरिट सूची की वैधता समाप्त होने का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना चाहिए।
चार सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इस आदेश से लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैग्रिव परिहार को राहत मिलने की उम्मीद है। अब सरकार को निर्धारित समयसीमा में अदालत के निर्देश के अनुरूप कार्रवाई करनी होगी।