दुर्ग / शौर्यपथ / हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के शोधार्थी आदित्य नारंग को “दुर्ग संभाग के नगर निगम क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास में बैंकिंग एवं नॉन-बैंकिंग साख की भूमिका का अध्ययन” विषय पर 2 मार्च 2026 को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
यह शोध कार्य डॉ. विजय कुमार वासनिक, सहायक प्राध्यापक, शासकीय कन्या महाविद्यालय दुर्ग के मार्गदर्शन तथा डॉ. एस.एन. झा, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (वाणिज्य), शासकीय विश्वनाथ यादव तमस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय दुर्ग के सह-निर्देशन में संपन्न हुआ।
आदित्य नारंग के पिता श्री आलोक कुमार नारंग दुर्ग जिला कलेक्ट्रेट में लंबे समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे हैं। वे कलेक्टर रीडर तथा जिला नाजिर जैसे पदों से सेवानिवृत्त हुए हैं और वर्तमान में दुर्ग में ही निवासरत हैं।
अपने शोध में आदित्य नारंग ने दुर्ग संभाग के नगरीय क्षेत्रों में कार्यरत महिला स्वयं सहायता समूहों के विकास में एनबीएफसी (नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों) द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साख की भूमिका का अध्ययन किया है। शोध में यह बताया गया है कि महिला स्वयं सहायता समूहों को एनबीएफसी के माध्यम से अपेक्षाकृत सुलभ ऋण सुविधा प्राप्त होती है, जिसका उनके व्यवसाय और आर्थिक सशक्तिकरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अध्ययन में परंपरागत बैंकिंग प्रणाली और एनबीएफसी द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली साख व्यवस्था के बीच के अंतर, उससे जुड़ी समस्याओं तथा उनके संभावित समाधानों पर भी प्रकाश डाला गया है। शोध में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन व्यवस्थाओं का नगर निगम क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों के व्यवसायिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह अध्ययन शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
शोधार्थी की मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोसे) हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के टैगोर हॉल में आयोजित की गई। इस अवसर पर बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो. उमेश होलानी, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर (मध्यप्रदेश) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आंतरिक परीक्षक डॉ. विजय कुमार वासनिक, डॉ. एस.एन. झा, विश्वविद्यालय पीएचडी प्रभारी डॉ. सुनीता मिश्रा, प्राचार्य डॉ. रंजना श्रीवास्तव सहित डॉ. अनिल जैन, डॉ. के.एल. राठी, डॉ. शकील हुसैन, डॉ. एच.पी. सिंह सलूजा, डॉ. आर.पी. अग्रवाल, डॉ. सुमित अग्रवाल, डॉ. प्रदीप कुमार जांगड़े, डॉ. लाली शर्मा, डॉ. प्रीति तन्ना टांक, डॉ. हरीश कश्यप सहित अनेक प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
पीएचडी की उपाधि प्राप्त होने पर आदित्य नारंग ने अपने मार्गदर्शकों, विश्वविद्यालय परिवार, सहयोगियों, शुभचिंतकों और परिवारजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के सहयोग और विश्वास का परिणाम है, जिनसे उन्हें समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा मिली।