रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने राज्य के 5 जिलों में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (Rural Self Employment Training Institutes–RSETIs) की स्थापना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे ग्रामीण युवाओं को कौशल-आधारित, रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्राप्त होगा और वे स्वरोजगार के माध्यम से विकास की मुख्यधारा से प्रभावी रूप से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण एवं शासकीय प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत ऋण प्रवाह बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर एवं पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
मुख्य सचिव नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (State-Level Bankers’ Committee–SLBC) की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में राज्य में बैंकों के कार्य निष्पादन की विस्तृत समीक्षा की गई तथा वित्तीय समावेशन को मजबूत करने, ऋण वितरण प्रणाली में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच बढ़ाने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई।
बैठक में श्री मनोज कुमार (महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक), श्रीमती निहारिका बारीक सिंह (प्रमुख सचिव), श्रीमती रीनी अजीथ (क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक), श्री शीतांशु शेखर (महाप्रबंधक, नाबार्ड), श्री अंकित आनंद (सचिव), श्री रजत कुमार (सचिव), श्री प्रभात मल्लिक (सचिव), श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा (निदेशक, संस्थागत वित्त), श्री चंदन कुमार (विशेष सचिव), श्री राकेश कुमार सिन्हा (उपमहाप्रबंधक, एसबीआई) सहित छत्तीसगढ़ शासन के अन्य वरिष्ठ सचिव, विभागाध्यक्ष, विभिन्न बैंकों के शीर्ष अधिकारी तथा राज्य के 33 जिलों के अग्रणी बैंक प्रबंधक उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव ने कहा कि बैंक देश के आर्थिक विकास की रीढ़ हैं और भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। ऐसे में बैंकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे समग्र वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से सुदूर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग पहुंच, ऋण वितरण और वित्तीय अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शासन की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, भारतीय स्टेट बैंक एवं अन्य बैंकों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शासकीय प्रायोजित ऋण योजनाओं का परिणामोन्मुख और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुँचे।
बैठक का समापन निदेशक (संस्थागत वित्त) श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य सचिव सहित सभी उपस्थित अधिकारियों, बैंकों के प्रतिनिधियों तथा बैठक के सफल आयोजन के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एवं इसके संयोजक भारतीय स्टेट बैंक के प्रति आभार व्यक्त किया।