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रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक के बड़े भाई स्वर्गीय श्री भुलऊ प्रसाद कौशिक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बिलासपुर के परसदा स्थित विधायक निवास में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पहुंचकर स्व. श्री भुलऊ प्रसाद कौशिक के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि स्वर्गीय श्री भुलऊ प्रसाद कौशिक का स्नेह, संस्कार और त्याग परिवार की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि उनका सरल, स्नेहमयी और विनम्र व्यक्तित्व सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल दें।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, मरवाही विधायक श्री प्रणव कुमार मरपच्ची सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा प्रवास के दौरान अंबिकापुर के आकाशवाणी चौक पर माँ भारती के वीर सपूत, अमर क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को नमन किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद का जीवन हर भारतीय के लिए राष्ट्रभक्ति, साहस और अदम्य वीरता की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद जी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा का अमूल्य संदेश दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज़ाद जी के आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए ही हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को सिद्ध कर सकते हैं। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं में देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि नई पीढ़ी महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।
इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर, /छत्तीसगढ़ में आयोजित श्रमिक महासम्मेलन में व्यय पूर्णतः टेंडर के अनुसार अनुबंधित दर पर तथा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के पश्चात किया गया है। इस कार्यक्रम में मनमाना व्यय व वित्तीय अनियमितता का आरोप निराधार है। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव ने बताया कि बिना निविदा प्रक्रिया के कुर्सी और नाश्ते पर मनमाने खर्च का आरोप पूर्णतः निराधार और भ्रामक है।
छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव श्री गिरीश रामटेके ने बताया कि विभागीय जानकारी के अनुसार, 17 सितंबर 2024 को विश्वकर्मा जयंती और छत्तीसगढ़ श्रम दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में बड़े स्तर पर श्रमिक महासम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 8,000 लोग शामिल हुए थे।
श्रम विभाग ने बताया कि कार्यक्रम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ जैसे मंच, बैठक व्यवस्था, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य शिविर रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतर्गत पूर्व से अनुबंधित संस्था के माध्यम से स्वीकृत दरों पर कराई गईं। विभाग के अनुसार कार्यक्रम स्थल में अंतिम समय में बदलाव और समयाभाव के कारण निविदा प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं था, ऐसे में पूर्व अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से कार्य कराना प्रशासनिक दृष्टि से उचित निर्णय था। आयोजन के बाद सभी व्ययों का परीक्षण एवं सत्यापन कर का भुगतान अनुबंधित एजेंसी को नियमों के तहत किया गया।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिला प्रवास के दौरान अम्बिकापुर में पीडब्ल्यूडी ऑफिस के पास पंडित रविशंकर त्रिपाठी चौक में भटगांव विधानसभा के पूर्व विधायक पंडित रविशंकर त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि पंडित रविशंकर त्रिपाठी जी का जीवन जनसेवा, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि उनके विचारों और कर्मठता की जीवंत प्रेरणा है, जो आने वाली पीढ़ियों को समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करने की दिशा दिखाती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों का योगदान हमें यह सिखाता है कि जनसेवा ही सच्चा राष्ट्रधर्म है और इसी मार्ग पर चलकर हम एक सशक्त और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण कर सकते हैं।
इस दौरान कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
विशेषज्ञों द्वारा स्टेट कॉमन्स कन्विनिंग चर्चा के बाद जो तथ्य निकल कर आएंगे वे राज्य के नीति निर्माण में होंगे सहायक
जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका-श्री बोरा
दो दिवसीय छत्तीसगढ़ कॉमन्स कन्विनिंग कार्यशाला का शुभारंभ
रायपुर, / आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि कॉमन्स पर जनजातिय समुदायों के अटूट विश्वास उनके सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका है। उन्होंने न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की बात करें तो स्थानीय लोग नीति-कार्यान्वयन में सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत बदलाव के लिए सरकार एक समर्पित टास्क फोर्स बनाने की प्रक्रिया में है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य पूरे राज्य में अधिक प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के मध्य संतुलित समन्वय सुनिश्चित करना है। कॉमन्स सम्मेलन संवाद में सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों को केंद्र में रखा गया था, जिसकी शुरुआत पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्री जागेश्वर यादव और श्री पांडी राम मंडावी तथा गौर मारिया नृत्य कलाकार सुश्री लक्ष्मी सोरी जैसे सम्मानित अतिथियों के प्रारंभिक उद्बोधनों से हुई।
साझा प्राकृतिक संसाधनों (कॉमन्स) के सुशासन और सामुदायिक संरक्षण पर केंद्रित दो दिवसीय “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कंवीनिंग” का शुभारंभ आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने किया। कार्यशाला नवा रायपुर ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सेक्टर-24, में आयोजित हो रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से “प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स” पहल के अंतर्गत विभिन्न साझेदार संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। कल 10 अप्रैल को मुख्य सचिव श्री विकास शील जनजातीय नीति पर संवाद में शामिल होंगे। वहीं समापन सत्र में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम शामिल होंगे।
जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका
श्री बोरा ने कहा कि इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय विरासत के बीच गहरे जुड़ाव को पहचानते हुए, एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। जल्द ही यह प्रोजेक्ट सामने आएगा और यह स्टूडियो पारंपरिक लोक गीतों और स्वदेशी वाद्य यंत्रों की धुन, दस्तावेज़ीकरण, पहचान और कॉपीराइट सुरक्षा के लिए समर्पित होगा। इन साझा संसाधनों के संरक्षण के संबंध में, श्री बोरा ने कहा कि वैश्वीकरण और आधुनिक जीवन शैली जैसे चुनौतियों के बीच संतुलित तरीका अपनाते हुए, साझा ज्ञान का विकास कैसे करें और अपनी आकांक्षाओं, विरासत और भविष्य को कैसे बेहतर बनाएँ।
राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा कि यह सम्मेलन संवाद के लिए एक विशाल मंच साबित हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें विभिन्न संगठनों के नीति विशेषज्ञ, पंचायतों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता और समुदाय के समर्पित सदस्य शामिल हैं। यह विविध समूह छत्तीसगढ़ में कॉमन्स (साझा संसाधन) के रूप में वर्गीकृत 70 लाख एकड़ ज़मीन पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। इस ज़मीन में जंगल, घास के मैदान और जल निकाय शामिल हैं, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं। कॉमन्स कन्विनिंग के पहले दिन, विशेषज्ञों ने राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया।
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ने सरगुजा जिले के लुंड्रा में 280 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर आयोजित किसान सम्मेलन में बड़ी संख्या में उपस्थित अन्नदाता किसानों और स्थानीय जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ये सभी परियोजनाएं न केवल बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करेंगी, बल्कि क्षेत्र के समग्र और संतुलित विकास को नई गति भी देंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर को सरगुजा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वर्षों बाद लुंड्रा की धरती पर इतनी बड़ी विकासात्मक पहल एक साथ देखने को मिल रही है। उन्होंने बताया कि कुल 281 करोड़ रुपये के कार्यों में 28 करोड़ रुपये के कार्यों का लोकार्पण एवं 253 करोड़ रुपये के कार्यों का शिलान्यास शामिल है। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके सतत प्रयासों से सरगुजा को अंबिकापुर से दिल्ली एवं कोलकाता तक हवाई सेवाओं की सुविधा भी प्राप्त हुई है, जिससे क्षेत्र का संपर्क और विकास दोनों तेज होंगे।
मुख्यमंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति पूर्णतः संवेदनशील है और उनकी आय बढ़ाने के लिए निरंतर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है और भुगतान 24 से 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके साथ ही किसान उन्नति योजना के तहत अंतर की राशि भी समयबद्ध रूप से सीधे किसानों के खातों में हस्तांतरित की जा रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और त्यौहारों में उनकी खुशहाली स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक पहलें की गई हैं, जिनमें किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना प्रमुख हैं। राज्य सरकार भी इन योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर रही है, जिससे खेती को लाभकारी बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने शपथ ग्रहण के 24 घंटे के भीतर ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान कर दी थी, जिनमें से 8 लाख से अधिक आवास अब पूर्ण होकर हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत हजारों परिवारों को आवास, बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र ने दशकों तक हिंसा का दंश झेला, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के साहस के कारण अब प्रदेश नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए विशेष आवास भी स्वीकृत किए गए हैं, जिससे उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने में मदद मिल रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और सम्मान बढ़ा है। इसके अलावा तेंदूपत्ता संग्रहण मूल्य में वृद्धि, चरण पादुका योजना की पुनः शुरुआत और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित कर सरकार ने जनकल्याण को प्राथमिकता दी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं तथा 375 नई एंबुलेंस सेवाओं की शुरुआत से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का भी उल्लेख करते हुए आमजन से इन योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू करना है, ताकि हर व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के समग्र उत्थान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लुंड्रा क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनमें आधुनिक स्टेडियम निर्माण, सन्ना-जशपुर-धंवरपुर-सरगुजा से होते हुए बनारस तक सड़क निर्माण, ब्लॉक मुख्यालय में नवीन विश्राम भवन तथा कृषि उप मंडी की स्थापना शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्माण कार्यों से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं को नए अवसर प्राप्त होंगे।
कार्यक्रम में सांसद श्री चिंतामणि महाराज, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना की और इसे जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
पुनर्वास केंद्र के 116 आत्मसमर्पित युवाओं का बना मतदाता कार्ड
रायपुर /छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौट रहे आत्मसमर्पित युवाओं को अब लोकतंत्र से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक पहल की है। सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों का मतदाता परिचय पत्र (वोटर आईडी कार्ड) बनाकर उन्हें मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।
जिला शासन के इस सकारात्मक कदम से अब ये पुनर्वासित युवा अपने मताधिकार का प्रयोग कर पंच, सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का चयन कर सकेंगे। इतना ही नहीं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को और मजबूत करते हुए अब वे भविष्य में स्वयं भी चुनाव लड़ने के पात्र बन गए हैं। यह बदलाव उनके जीवन में सम्मान, अधिकार और आत्मविश्वास की नई शुरुआत माना जा रहा है।
सरकार की नीति से बदली जिंदगी
जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति का लाभ आत्मसमर्पित युवाओं को लगातार दिया जा रहा है। पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों के राशन कार्ड, जॉब कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड पंजीयन के साथ-साथ पीएम आवास योजना सर्वे भी पूरा कराया गया है। इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलना सुनिश्चित हो गया है।
कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
पुनर्वासित युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा उन्हें विभिन्न प्रकार के कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कृषि उद्यमिता प्रशिक्षण में 48 हितग्राही, सिलाई मशीन प्रशिक्षण में 5 हितग्राही, कृषि उद्यमी एवं राजमिस्त्री प्रशिक्षण में 265 हितग्राही, वाहन चालक प्रशिक्षण में 14 हितग्राही और मुर्गी पालन प्रशिक्षण में 25 हितग्राही कुल मिलाकर 317 पुनर्वासित युवा कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। जिला प्रशासन की यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को पहचान और अधिकार दिला रही है, बल्कि उन्हें एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर भी कर रही है।
रायपुर, 6/महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी वितरण तय मापदंड और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुआ है, लेकिन जहां भी गड़बड़ी मिली है, वहां सुधार किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर साड़ियां बदली जाएंगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दी गई साड़ियों की लंबाई और गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक्शन लिया है। विभाग के मुताबिक, केंद्र सरकार के प्रावधान के तहत हर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को साल में दो साड़ी यूनिफॉर्म दी जाती है। इसके लिए प्रति साड़ी 500 रुपए तय हैं। इसी आधार पर राज्य में करीब 1.94 लाख साड़ियों की आपूर्ति का आदेश छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी को दिया गया था। साड़ियों के रंग, डिजाइन और लंबाई का मापदंड राज्य स्तर पर तय किया गया था। इसके अनुसार साड़ी की लंबाई 5.50 मीटर और ब्लाउज पीस सहित कुल लंबाई 6.30 मीटर निर्धारित है।
महिला एवं बाल विकास विभाग को साड़ी की आपूर्ति से पहले छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़ी एजेंसी के सैंपल की जांच तकनीकी एजेंसी राइट्स लिमिटेड, मुंबई से कराई गई थी, जिसमें गुणवत्ता सही पाई गई।आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी वितरित की गई l हालांकि वितरण के बाद दुर्ग, धमतरी, रायगढ़ और कबीरधाम जिलों से कुछ शिकायतें सामने आईं। इनमें साड़ी छोटी होने, धागा निकलने और रंग छोड़ने की बात कही गई। विभाग ने तुरंत जांच समिति बनाकर इन मामलों की पड़ताल कराई। जांच में कुछ मामलों में लंबाई कम और बुनाई में खामियां सामने आईं।विभाग का कहना है कि कॉटन साड़ी होने के कारण पहली धुलाई में रंग छोड़ने की स्थिति कुछ जगहों पर दिखी, लेकिन बाद में रंग सामान्य रहा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने अब सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे साड़ियों की दोबारा जांच करें और जहां मापदंड से कमी मिले, उसकी जानकारी भेजें। साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को भी साफ निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी साड़ियों को बदलकर मानक के अनुसार नई साड़ियां उपलब्ध कराई जाएं। विभाग ने यह भी बताया कि जारी कार्यादेश में ही एजेंसी को गुणवत्ता बनाए रखने और शिकायत मिलने पर सामग्री बदलने की शर्त लिखी गई थी।विभाग का कहना है कि किसी भी हितग्राही को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका को साड़ी मानक के अनुरूप साड़ियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
रायपुर / कभी नक्सल गतिविधियों के कारण विकास से अछूता रहा कोयलीबेड़ा विकासखंड के ग्राम हेटारकसा आज बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। जहां पहले सड़क, संचार और मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच मुश्किल थी, वहीं अब शासन के नक्सल उन्मूलन अभियान और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गांव में विकास दिखने लगा है।
नक्सल प्रभाव के कारण वर्षों तक इस क्षेत्र में योजनाओं का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा कारणों से पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही थी। ग्रामीण, कुएं और नालों पर निर्भर थे, और गर्मी के दिनों में पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन और राज्य शासन के प्रयासों से ग्राम हेटारकसा के 63 घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाए गए हैं। दो सोलर पंप आधारित जल टंकियों के माध्यम से अब गांव के हर घर में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। गांव के निवासी राजनाथ पोटाई बताते हैं कि पहले पानी लाने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था, जिसमें अधिक समय व श्रम लगता था। वहीं अब घर में ही दिनभर पानी मिलने से दैनिक जीवन काफी आसान हो गया है।
गांव की महिला सविता बेन ने कहती हैं कि पहले पानी की समस्या के कारण दिन का बड़ा हिस्सा इसी कार्य में चला जाता था, लेकिन अब नल-जल सुविधा से उन्हें राहत मिली है और वे अन्य कामों में समय दे पा रही हैं।
स्वास्थ्य और आजीविका पर सकारात्मक असर
स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से गांव में जलजनित बीमारियों में कमी आई है। साथ ही ग्रामीण अब घरों के आसपास सब्जी-बाड़ी कर रहे हैं, जिससे टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी जैसी फसलें उगाकर वे पोषण के साथ-साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित इस दूरस्थ क्षेत्र में योजनाओं का सफल क्रियान्वयन प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज ग्राम हेटारकसा यह साबित कर रहा है कि जब सुरक्षा, विश्वास और विकास एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बदलाव संभव है।
ई-केवायसी, जियो-टैगिंग और क्यूआर कोड से पारदर्शिता को मिली नई गति
रायपुर / महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य ने विभिन्न प्रमुख मानकों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
97% सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी पूर्ण
1 अप्रैल 2026 की स्थिति में राज्य ने 97 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी पूर्ण कर लिया है, जिससे भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित हुई है। जिसके तहत प्रदेश के 58.16 लाख श्रमिकों का ई-केवायसी तथा 11.32 लाख निर्मित परिसंपत्तियों का जियो टैगिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जिससे कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग संभव हुई है।
11,668 ग्राम पंचायतों में जीआईएस आधारित योजना
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से 11,668 ग्राम पंचायतों में 2,86,975 कार्यों की जीआईएस आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक योजना निर्माण सुनिश्चित हुआ है। इसके साथ ही मनरेगा कार्यस्थलों पर फेस ऑथेंटिकेशन आधारित एनएमएमएस (NMMS) प्रणाली के उपयोग से उपस्थिति की निगरानी अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है।
क्यूआर कोड से आमजन को सीधी जानकारी
ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड के माध्यम से नागरिक, कार्यों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। एक सितंबर से अब तक लगभग 5 लाख से अधिक स्कैन दर्ज किए गए हैं। जिससे कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है।
हर माह 7 तारीख को समाधान का मंच
प्रदेश में प्रत्येक माह की 7 तारीख को चावल उत्सव के साथ “रोजगार दिवस” एवं “आवास दिवस” का आयोजन किया जा रहा है, जहां हितग्राहियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण एवं योजनाओं की जमीनी समीक्षा की जाती है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
