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बस्तर विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी पर विधानसभा में उठा मुद्दा, विधायक लता उसेंडी ने सरकार को घेरा

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  जगदलपुर / शौर्यपथ / बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा विधानसभा में जोर-शोर से उठाया गया। प्रश्न लगाने वाले विधायक लता उसेंडी ने विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय UGC मानकों से काफी पीछे है। जहां 223 शिक्षकों की जरूरत है, वहां केवल 29 शिक्षक ही कार्यरत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी कमी कब तक दूर की जाएगी और छात्रों की पढ़ाई का नुकसान कौन भरेगा।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि विश्वविद्यालय में सैकड़ों शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है। विधायक ने पूछा कि जब वित्त विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है, तो नियुक्तियां अब तक क्यों नहीं की गईं।
सबसे अहम सवाल उन विषयों में भर्ती को लेकर उठाया गया, जिनमें फिलहाल एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है। विधायक ने इसे संसाधनों का दुरुपयोग बताते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इसके साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में खाली पड़ी सीटों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि हजारों सीटें खाली होना इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है।
बस्तर जैसे आदिवासी और पिछड़े क्षेत्र का जिक्र करते हुए विधायक लता उसेंडी ने कहा कि यहां उच्च शिक्षा की ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना पर्याप्त शिक्षकों और संसाधनों के इसे लागू करना संभव नहीं है।
निष्कर्ष:विधानसभा में उठे इन सवालों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, खासकर बस्तर क्षेत्र में, गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। अब निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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शौर्यपथ

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