रायपुर । शौर्यपथ । दंगा फसाद का नही बीमारी का कर्फ्यू है , पुलिस अंकल रहम करो शायद यही कह रहा होगा डंडे खाने वाला शख्स । मामला रायपुर से जुड़ा हुआ है आज फेसबुक में भाजपा नेता गौरी शंकर श्रीवास की वाल में एक वीडियो देखें जिसमे एक पुलिस वाले द्वारा आम जनता को बेरहमी से डंडे से पिटाई का दृश्य था । वीडियो किसी ने बनाया होगा । इस वीडियो में जिस तरह पुलिस अधिकारी द्वारा बाइक सवार और साइकिल सवार पर डंडे बरसाए जा रहे थे देख कर ऐसा लगा मानो रायपुर में कर्फ्यू किसी प्रकृतिक आपदा का नही दंगा फसाद के कारण लगा हो और मार खाने वाला छत्तीसगढ़ का आम नागरिक नही कोई दरिंदा हो । आखिर ऐसा क्या कारण है कि पुलिस प्रशासन को सख्ती दिखाने के लिए कानून का पालन करवाने के लिए इतना सख्त होना पड़ा । क्या आम जनता पर इस तरह प्रहार सही है ? हो सकता है जिसकी पिटाई हुई हो उसने गलती की हो किन्तु खुलेआम किसी नागरिक के साथ इस तरह पेश आना क्या सही है । ऐसा करके क्या संदेश देना चाहती है पुलिस प्रशासन ? भाजपा नेता के फेसबुक वॉल में उल्लेख उरला टी आई द्वारा किया गया कार्य बताया जा रहा है । क्या पुलिस के आला अधिकारी मामले को संज्ञान लेंगे या मामला दब जाएगा । क्योकि वीडियो में जिस भी व्यक्ति को डंडे पड़ रहे थे उसके हाव भाव प्रतिक्रिया से ऐसा जरा भी प्रतीत नही हो रहा कि वह इस घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे पाएगा । कोरोना आपदा में मिडिल क्लास और निम्न वर्ग वैसे ही दो जून की रोटी के लिए संघर्षरत है ऐसे में खिलाफत या शिकायत का शायद प्रश्न ही नही उठता । किन्तु वीडियो के वाइरल होने से शायद उच्च अधिकारी , गृह मंत्री और प्रदेश के मुखिया मामले को संज्ञान में ले और मामले की निष्पक्ष जांच कर वीडियो की सच्चाई का पता लगवाए क्योकि आम मिडिल क्लास जनता को डंडे की मार से ज्यादा पेट की मार का सामना करना पड़ रहा है ।
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