दुर्ग / शौर्यपथ / प्रदेश सहित देश में कोरोना आपदा की मार से पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त है . आम आदमी की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है . छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी यह स्पष्ट सन्देश दिया है कि ऐसी कोई मितव्यतिता से बचा जाए . कोरोना आपदा में राज्य सरकार के अधिकारियों और पदेन जनप्रतिनिधियों को मितव्यतिता से बचने के सन्देश दिए है . किन्तु इस सन्देश का असर दुर्ग निगम में पड़ा हो ये नजऱ नहीं आ रहा है . एक तरफ निगम प्रशासन फण्ड की कमी की बात कर रहा है निगम आयुक्त स्वयं अधिकारियों को निर्देशित कर रहे है कि सार्थक प्रयास कर राजस्व की बकाया राशि वसूली जाए .वही महापौर बाकलीवाल द्वारा शहर के ऐसे दुकाने , गुमठिया जो खाली पड़ी है किराये में देने , विक्रय करने के लिए शहर के व्यापारियों से , चिकित्सको से , अधिवाक्ताओ से चर्चा कर रहे है ताकि निगम की करोडो की संपत्ति ( ऐसी दुकाने जो सालो से बनी है और अभी तक विक्रय नहीं हुई है ) का सही तरीके से उपयोग कर राजस्व की बढ़ोतरी की जाये किन्तु वही दुर्ग का एम्आईसी भवन निरंतर नए नए सुविधाओ से लेस हो रहा है जिसकी वर्तमान में जरुरत भी नहीं .
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सारा कार्य प्रभारी ईई मोहनपुरी गोस्वामी के निरिक्षण में हो रहा है . एक तरफ जब इस बारे में मोहन पूरी गोस्वामी से जानकारी ली गयी तो उनके अनुसार सिर्फ पेंट पुताई की बात कही गयी किन्तु आम जनता को भी आसानी से दिख रहा है कि एमआईसी भवन में पेंट के साथ डिजाइनर वाल , नए नए परदे , एक दरवाज़ा होने के बाद भी दूसरा कांच का दरवाज़ा , खिड़की की सही हालत होने के बाद भी नयी-नयी खिडकिया , कई केबिनो में नए नए चेयर तक की व्यवस्था की जा रही है . विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी मंत्रियो के कमरे में एसी लगाने की तैयारी की जा रही है . यह सारा कार्य एम्आईसी के प्रभारी के निर्देश पर होने की बात बताई जा रही है . आखिर प्रभारी ईई मामले को छुपाने की कोशिश क्यों कर रहे है क्या अपने किसी ख़ास ठेकेदार से ये कार्य करवाने के लिए सारी जहमत उठाई जा रही है या कोई और बात है ? क्या मामले को संज्ञान लेंगे आयुक्त बर्मन ?
ये सही है कि निगम में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आयी है और जनप्रतिनिधि होने के नाते ये उनका हक भी है कि अपनी केबिन की साज सज्जा उच्च स्तर की रखे ये अलग बात है कि 15 साल भाजपा सत्ता में रहने के बाद भी सिर्फ ज़रूरी सुविधाओ के साथ मंत्रालय में कार्य किया है जबकि तब स्थिति सामान्य थी कोई वैश्विक महामारी नहीं थी किन्तु वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री के सन्देश को भी दरकिनार करते हुए कार्य समझ से परे है . खैर सत्ता में कांग्रेस है और प्रदेश के मुखिया भी कांग्रेस से है तो कोई रोक टोक नहीं होगी सारी सुविधाए आ भी जाएँगी शायद इसे ही कहते है 15 साल बाद सत्ता में आने के बाद का सुख शायद यही है राजनितिक पद में विराजमान होने का लाभ , शायद यही कारण है कि पार्षद के चुनाव में लाखो खर्च करते है प्रत्याशी .