दुर्ग। शौर्यपथ। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश में बड़े परिवर्तन कर आने वाले विधानसभा चुनाव में पूरी दमदारी से चुनाव लड़ने का ऐलान तो कर दिया है इसी परिपेक्ष्य में प्रदेश अध्यक्ष ,नेता प्रतिपक्ष एवं जिलों के अध्यक्षों की जिम्मेदारियां नए-नए लोगों को दी गई है कई जिलों में नवनियुक्त अध्यक्ष जोर शोर से कार्य कर रहे हैं वही नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद बिलासपुर के सांसद अरुण साव भी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को लेकर बड़ी जीत के साथ प्रदेश में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं .
किंतु अगर देखा जाए तो दुर्ग की राजनीति में राज्यसभा सांसद सरोज पांडे का संगठन में पूरा वर्चस्व है ऐसा नहीं है कि दुर्ग में भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता नहीं है किंतु आपसी गुटबाजी के चलते हैं यह कार्यकर्ता चुनाव के समय भीतरी घात कर ही देते है वरना भाजपा के वो सदस्य जो निर्दलीय मैदान में उतर कर निकाय चुनाव में जीत अर्जित कर चुके है और आज भी भले ही निर्दलीय पार्षद है किन्तु भाजपा के कार्यकर्त्ता के रूप में समर्पित भी है . बता दें कि दुर्ग में आज भी हेमचंद यादव के कट्टर समर्थक भाजपा से जुड़े हैं वही विजय बघेल ,प्रेम प्रकाश पांडे के समर्थकों की संख्या भी काफी तादाद में है किंतु गुटबाजी के चलते हेमचंद गुट के सक्रिय कार्यकर्ता आज गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं ऐसी ही स्थिति विजय बघेल लोकसभा सांसद दुर्ग के समर्थकों की एवं पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडे के समर्थकों की भी है देखा जाए तो दुर्ग में आपसी गुटबाजी इतनी चरम सीमा पर है कि प्रेम प्रकाश गुटके समर्थकों को ,स्व. हेमचंद यादव गुट के समर्थकों को ,सांसद विजय बघेल के समर्थकों को भाजपा संगठन ( दुर्ग ) में सक्रीय कार्यकर्ता होने के बावजूद भी उचित मान-सम्मान नहीं मिल पा रहा है
ऐसी चर्चा भी है कि भाजपा की गुटबाजी का पूरा लाभ कांग्रेस को बिना मेहनत के मिल जाता है वहीं कांग्रेस भी कई मामलों में भाजपा का अपरोक्ष रूप से साथ देता आया है चाहे वह जल्परिसर का विद्युत बिल भुगतान का मामला हो , डॉग हाउस की फाइल का मामला हो या फिर गंजपारा एवं नलघर मैं बने नियम विरुद्ध शॉपिंग कंपलेक्स का मामला हो जिसके कारण निगम के करोडो रूपये कई सालो तक फसे रहे एवं शोपिंग काम्प्लेक्स अब संधारण की स्थिति में आ गया है . सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस इन मामलों पर अभी तक हमलावर नहीं हो पाया है जबकि गाहे-बगाहे भाजपा के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन कर विधायक एवं महापौर के मुर्दाबाद के नारे तक कई बार लगा चुके हैं किंतु इन सबके बावजूद बड़े बड़े आंदोलन करने और बड़ी भीड़ जमा करने के बाद भी अगर दुर्ग की जमीनी हकीकत देखी जाए तो आज भी आम जनता का झुकाव राज्यसभा सांसद सरोज पांडे के पसंदीदा उम्मीदवार की जगह कांग्रेस उम्मीदवार की तरफ ज्यादा है .
वही यह भी चर्चा है कि दुर्ग की बदहाल स्थिति में कोई सुधार ला सकता है तो वह सांसद सरोज पांडे ही है आम जनता को भाजपा से सुश्री सरोज पाण्डेय तो स्वीकार्य है किंतु उनके द्वारा चुना हुआ प्रत्याशी स्वीकार्य नहीं अब दुर्ग की जनता रबर स्टैंप से त्रस्त हो चुकी है ।
वही दुर्ग भाजपा के नव नियुक्त अध्यक्ष जितेन्द्र वर्मा पद सँभालने के बाद काफी सक्रियता से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओ को साथ लेकर चल तो रहे है किन्तु जिस तरह से संभागीय बैठक के समय जब कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष , पूर्व मुख्यमंत्री एवं कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे उसी समय दुर्ग के पूर्व पार्षद और भाजपा के सक्रीय कार्यकर्ता साहू कार्यालय के सामने बैठ कर संगठन की कार्य प्रणाली और जमीनी कार्यकर्ताओ की अनदेखी का आरोप लगा रहे थे
अब देखना यह है कि आने वाले विधान सभा चुनाव में भाजपा किसी रबर स्टैंप के स्वरूप को मैदान में उतारती हैं या सक्रिय प्रत्याशी को ....