
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
भिलाई। कभी समाजसेवा, कभी कारोबारी गतिविधियां, कभी खेल और सामाजिक आयोजनों में सहभागिता—इंद्रजीत सिंह उर्फ ‘छोटू’ की सार्वजनिक पहचान लंबे समय से अलग-अलग रूपों में शहर के सामने आती रही है। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की ओर से उन्हें समाजसेवी और कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। लेकिन अब इसी चमकदार सार्वजनिक छवि के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसे नजरअंदाज करना शायद आसान नहीं होगा—आखिर ‘समाजसेवी’ की पहचान के साथ ‘लोहा चोरी’ जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा क्यों जुड़ रही है?
सवाल इसलिए भी बड़ा हो गया है क्योंकि हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार विजया पाठक की सोशल मीडिया पोस्ट में इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ को लेकर बेहद गंभीर आरोपात्मक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। उनके पोस्ट में “लोहा चोर ट्रांसपोर्ट कारोबारी” जैसे शब्द लिखे गए हैं और साथ ही GST कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। यह पोस्ट अब भिलाई में चर्चा का विषय बनी हुई है।
हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी पत्रकार की पोस्ट या मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप अपने आप में न्यायिक रूप से अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं हैं। अंतिम सत्य जांच एजेंसियों की जांच, आधिकारिक दस्तावेज और न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।
GST की दस्तक ने बढ़ाई बेचैनी
24 अगस्त 2026 से इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ से जुड़े हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठिकानों पर स्टेट GST की टीम द्वारा जांच की खबर सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हथखोज स्थित कंपनी परिसर के साथ बलौदाबाजार स्थित यार्ड में भी कारोबारी दस्तावेजों, लेन-देन और GST से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। कंपनी के कारोबार में बड़ी संख्या में ट्रकों के संचालन की जानकारी भी सामने आई है।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि GST विभाग की ओर से जांच की अंतिम वजह, कथित अनियमितता और जांच का निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिर सवाल उठता है—जब तक जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है, तब तक इतनी बड़ी चर्चा क्यों?
जवाब शायद उसी सार्वजनिक छवि में छिपा है, जिसे वर्षों से पोस्टर, बैनर, सामाजिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए मजबूत किया गया।
पोस्टर की चमक से आरोपों की धूल तक?
भिलाई में यह कोई छिपी बात नहीं कि बड़े कारोबारी और प्रभावशाली सामाजिक चेहरों के कार्यक्रमों की तस्वीरें और बधाई संदेश अक्सर शहर के पोस्टर-बैनरों में दिखाई देते हैं। सवाल यह नहीं कि किसी कारोबारी को सामाजिक कार्य करने का अधिकार है या नहीं—बिल्कुल है।
सवाल यह है कि क्या सामाजिक सेवा की चमक किसी व्यक्ति से जुड़े गंभीर आरोपों पर सवाल पूछने की पत्रकारिता को रोक सकती है?
यदि किसी व्यक्ति पर आरोप सामने आए हैं तो उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा का सम्मान करते हुए भी सवाल पूछे जाने चाहिए।
और अगर आरोप निराधार हैं तो जवाब भी उतनी ही मजबूती से सामने आना चाहिए।
क्योंकि पोस्टर से बनी छवि को पोस्टर ही बचा पाएगा, यह जरूरी नहीं; कई बार एक जांच की फाइल पूरी तस्वीर बदल देती है।
भिलाई में सवाल बहुत हैं, जवाब अभी बाकी
वरिष्ठ पत्रकार विजया पाठक की पोस्ट ने जो सवाल उठाए हैं, वे अब स्थानीय चर्चाओं का हिस्सा बन चुके हैं। दूसरी ओर इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ की सामाजिक गतिविधियों और विभिन्न संस्थाओं से जुड़ाव की चर्चा भी होती रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में उन्हें ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के साथ सामाजिक और खेल संगठनों से जुड़ा बताया गया है।
यानी तस्वीर के दोनों पहलू मौजूद हैं।
एक तरफ समाजसेवा और कारोबारी पहचान, दूसरी तरफ लोहा चोरी जैसे गंभीर आरोपों की चर्चा और GST जांच।
अब असली परीक्षा पोस्टर-बैनर की नहीं, दस्तावेजों की है।
‘10 हजार करोड़’ की चर्चा भी जांच के दायरे में क्यों नहीं?
भिलाई स्टील प्लांट से कथित बड़े पैमाने पर लोहा चोरी को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में हजारों करोड़ रुपये के आंकड़े और दावे सामने आते रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कथित चोरी का दावा भी किया गया है। लेकिन ऐसे आंकड़ों को आधिकारिक जांच या न्यायिक निष्कर्ष के बिना स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इसलिए सवाल होना चाहिए—दावा कितना बड़ा है और उसके पीछे दस्तावेज कितने मजबूत हैं?
अब भिलाई को ‘चर्चा’ नहीं, खुलासा चाहिए
इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’ वास्तव में केवल एक समाजसेवी और कारोबारी हैं या उनके कारोबार से जुड़े आरोपों में भी कोई सच्चाई है—इसका फैसला सोशल मीडिया, चौक-चौराहे या पोस्टर-बैनर नहीं करेंगे।
फैसला जांच की रिपोर्ट करेगी।
यदि आरोप गलत हैं तो उन्हें सामने आकर तथ्य और दस्तावेजों के साथ खारिज करने का पूरा अधिकार है।
और यदि जांच में कोई गंभीर अनियमितता सामने आती है तो फिर समाजसेवा की चमकदार तस्वीर के पीछे छिपे सवालों का जवाब भी देना होगा।
फिलहाल भिलाई की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—
“नाम समाजसेवी का, पहचान कारोबारी की और अब ‘लोहा चोर’ जैसे आरोपों की सुर्खियां... आखिर असली चेहरा कौन सा है?”
इस सवाल का जवाब पोस्टर नहीं देगा।
जवाब जांच देगी, दस्तावेज देंगे और अंततः कानून देगा।
तब तक सवाल पूछना भी पत्रकारिता का अधिकार है और आरोपों का जवाब देना संबंधित व्यक्ति का अधिकार।
क्योंकि समाजसेवा की असली कसौटी पोस्टर पर छपी तस्वीर नहीं, बल्कि जांच की कसौटी पर खरे उतरने वाले दस्तावेज होते हैं।
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
